Bhutan: कौन हैं शेरिंग टोबगे जो बनेंगे भूटान के अलगे प्रधानमंत्री? BTP पार्टी को चुनाव में मिली बंपर जीत
भूटान में पूर्व प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे की पार्टी ने संसद में लगभग दो-तिहाई सीटों के साथ आम चुनाव जीत लिया है। चुनावी मैदान में भूटान टेंड्रेल पार्टी (BTP) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) उतरी थीं।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टोबगे की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने 2024 नेशनल असेंबली के आम चुनाव में 30 सीटों के साथ जीत हासिल की है। वहीं, भूटान टेंड्रेल पार्टी (BTP) ने शेष 17 सीटों पर कब्जा किया है।

भूटान के चुनाव आयोग द्वारा कल चुनाव के अंतिम परिणाम जारी करने की उम्मीद है। बहुमत हासिल करने के बाद अब शेरिंग टोबगे के दूसरी बार भूटान के पीएम बनने की उम्मीद है। वह भूटान की पहली संसद में विपक्ष के नेता थे जब 2008 में वर्तमान राजा के शासनकाल की शुरुआत के बाद इसकी स्थापना हुई थी।
58 साल के शेरिंग टोबगे ने पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री और हार्वर्ड से सार्वजनिक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने 2013 से 2018 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया है। वे पूर्व सिविल सेवक भी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भूटान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। विश्लेषक देश में विकास के बजाय सकल राष्ट्रीय खुशी (Gross National Happiness) पर ध्यान केंद्रित करने को लेकर मौजूदा सरकार की आलोचना कर रहे थे।
भूटान में सभी संवैधानिक पार्टियां संवैधानिक रूप से स्थापित दर्शन के प्रति प्रतिबद्ध हैं जिसमें भौतिक विकास से अधिक अहमियत लोगों की खुशी और भलाई को दी जाती है। भूटान की संस्कृति सदियों से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाले भौतिक विकास की बजाय जीवन की गहरी समझ पर आधारित रही है। सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (जीएनएच) की अवधारणा 1972 में भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने गढ़ी थी।
आंकड़ों से पता चलता है कि भूटान में हर 8 में से एक व्यक्ति भोजन और अन्य जरूरतों के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, भूटान की युवा बेरोजगारी दर 29 फीसदी है।
दरअसल, देश के युवा बेहतर वित्तीय और शैक्षिक अवसरों की तलाश में तेजी से दूसरे देशों की तरफ जा रहे हैं। भूटान में पिछले पांच वर्षों में आर्थिक वृद्धि औसतन 1.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। शेरिंग टोबगे का मानना है कि देश में अभूतपूर्व आर्थिक चुनौतियों और बड़े पैमाने पर पलायन के कारण आर्थिक वृद्धि अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी है।












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