Mojtaba Hosseini: इजरायल-अमेरिका से ईरान को बचाने के पीछे यह शिया धर्मगुरु, जानें कौन है मोजतबा होसैनी?
Mojtaba Hosseini Khamenei: इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग में सुप्रीम लीडर खामनेई के नेतृत्व ईरान की सेना के साथ ही एक शख्स का जिक्र बार-बार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह शख्स ही ईरान की बचाव की रणनीति बनाने से लेकर इजरायल और अमेरिकी सैन्य बेस पर हमले की सारी योजनाओं और फैसले के पीछे प्रमुख चेहरा है। यह हस्ती कोई और नहीं बल्कि सुप्रीम लीडर के बेटे मोजतबा होसैनी खामनेई हैं। खामनेई के चार बेटों में मोजतबा दूसरे नंबर के हैं और वह ईरान की सेना और सत्ता के शक्तिशाली लोगों में शुमार हैं।
Who is Mojtaba Hosseini: मोजतबा खामनेई शिया धर्मगुरु
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के पुत्र मोजतबा पिछले 25 सालों में ईरान की राजनीति में रहस्यमय हस्ती के तौर पर उभरे हैं। सार्वजनिक जगहों पर उनकी उपस्थिति बहुत कम होती है, लेकिन उनकी ताकत और प्रभाव से दुनिया में कोई इनकार नहीं कर सकता है। सुप्रीम लीडर के इस बेटे को उनका उत्तराधिकारी भी कहा जा रहा है, लेकिन खामनेई की ओर से अब तक ऐसा कोई बयान नहीं आया है। अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया में कई बार दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य और विदेश नीति पर अंतिम फैसला अब मोजतबा ही लेते हैं।

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Israel Iran War में मोजतबा की क्या भूमिका?
मोजतबा खामनेई पर आरोप लगते हैं कि वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और बसीज मिलिशिया जैसे शक्तिशाली सुरक्षा बलों का पर्दे के पीछे से संचालन करते हैं। माना जा रहा है कि हालिया इजरायल-ईरान संघर्ष में मोजतबा ही सभी निर्देश दे रहे थे। उनकी रणनीतियों के आधार पर ही ईरान ने अपने कदम आगे बढ़ाए। मोजतबा इराक और ईरान युद्ध के बाद विदेशी मीडिया में चर्चा का केंद्र बने थे। कहा जाता है कि मोजतबा ने इस युद्ध के दौरान आईआरजीसी में अपना नेटवर्क मजबूत किया था और और उसका इस्तेमाल आज भी कर रहे हैं। मोजतबा को ईरान के अंदर और विदेशों में भी मजबूत नेटवर्क बनाने के लिए जाना जाता है। हिज्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों से लेकर देश के अंदर वह पर्दे के पीछे से अपना संगठन चलाते हैं। उन्हें एक कुशल प्रशासक और रणनीतिकार माना जाता है।
मोजतबा खामनेई की पहचान एक क्रूर शासक के तौर पर भी है, क्योंकि कहा जाता है कि 2009 में ईरान में प्रदर्शनों को दबाने के लिए उन्होंने आईआरजीसी का इस्तेमाल किया था। उस वक्त अहमदीनेजाद को जिताने के लिए मोजतबा ने चुनावों में हेर-फेर भी की थी। वह जनता के सामने बहुत कम आते हैं और ईरान के अंदर भी उनकी छवि रहस्यमयी ही मानी जाती है।
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शिया धर्मगुरु के तौर पर भी बनाई पहचान
प्रशासन और सैन्य नीतियों तक की मोजतबा की भूमिका सीमित नहीं है। उन्होंने ईरान के प्रसिद्ध शहर कुम में रहकर धार्मिक शिक्षा हासिल की है। कुम ईरान ही नहीं दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए धार्मिक शिक्षा केंद्र है। उन्हें हुज्जत-उल-इस्लाम का दर्जा दिया गया है। यह शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं में मिड सीनियर लेवल दर्जा माना जाता है। शिया धर्मगुरु के तौर पर उनकी मुस्लिम समुदाय के बीच एक पहचान और सम्मान है।












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