Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Corina Machado: कौन हैं कोरिना मचाडो, जो बन सकती हैं वेनेजुएला की राष्ट्रपति, ट्रंप को पछाड़ जीता था नोबेल

Maria Corina Machado: वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हुए धमाकों और उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सनसनीखेज दावों ने पूरी दुनिया का ध्यान इस लैटिन अमेरिकी देश की ओर खींच लिया है। ट्रंप ने यह कहकर भूचाल ला दिया कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया है।

अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह वेनेजुएला के पिछले 25 वर्षों के राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ होगा, क्योंकि इसी के साथ चाविस्मो यानी ह्यूगो चावेज की विचारधारा पर टिकी सत्ता की जड़ें हिलती नजर आ रही हैं।

Maria Corina Machado

🟡 मादुरो के बाद कौन? सबसे बड़ा सवाल

मादुरो के कथित तौर पर सत्ता से बाहर होते ही एक सवाल सबसे तेजी से उभर रहा है - अब वेनेजुएला की कमान किसके हाथ में जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक हलकों में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है मारिया कोरिना मचाडो। वही नेता, जिन्हें उनके समर्थक 'वेनेजुएला की आयरन लेडी' कहते हैं और जिन्हें हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं मारिया कोरिना मचाडो के बारे में।

🟡 who is Maria Corina Machado: कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो

57 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की प्रमुख राजनीतिज्ञ हैं। कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला में विपक्ष की प्रमुख नेता हैं, जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। वेनेजुएला के नेता को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना गया था।

मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की राजनीति का वह चेहरा हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से मादुरो और उससे पहले चावेज शासन की नीतियों को खुली चुनौती दी। वह सिर्फ एक विपक्षी नेता नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की सबसे मुखर आवाज मानी जाती हैं। पेशे से औद्योगिक इंजीनियर मचाडो ने राजनीति में कदम रखने से पहले बिजनेस और सामाजिक क्षेत्र में भी काम किया।

🟡 इंजीनियर से आंदोलनकारी नेता तक का सफर

मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को काराकास में हुआ। उन्होंने एंड्रेस बेलो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में फाइनेंस में मास्टर डिग्री हासिल की। शुरुआती दौर में उन्होंने ऑटो इंडस्ट्री में काम किया, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में उन्होंने सामाजिक काम की ओर रुख किया। 1992 में उन्होंने एटेनिया फाउंडेशन की स्थापना की, जो काराकास के बेसहारा और सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए काम करता था।

2000 के दशक की शुरुआत में मचाडो ने राजनीति को पूरी तरह अपना लिया। उन्होंने 'सूमाते' नामक संगठन की सह-स्थापना की, जिसका मकसद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना था। यहीं से उनका टकराव चावेज सरकार से शुरू हुआ। धीरे-धीरे वह सत्ता प्रतिष्ठान की आंखों की किरकिरी बन गईं।

Maria Corina Machado

🟡 संसद से सड़क तक संघर्ष

मारिया कोरिना मचाडो 2011 से 2014 तक वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की निर्वाचित सदस्य रहीं। संसद में रहते हुए भी उन्होंने सरकार की नीतियों पर तीखे हमले किए। 2014 में जब मादुरो सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, तो मचाडो सबसे आगे खड़ी नजर आईं। इसके बाद उन्हें संसद से बाहर कर दिया गया, लेकिन इससे उनका कद और बड़ा हो गया।

🟡वेंटे वेनेजुएला और आयरन लेडी की छवि

मारिया कोरिना मचाडो दक्षिणपंथी विपक्षी पार्टी वेंटे वेनेजुएला की संस्थापक और राष्ट्रीय समन्वयक हैं। उनकी छवि एक ऐसी नेता की है, जो न तो धमकियों से डरती हैं और न ही समझौता करती हैं। जहां कई विपक्षी नेता जेल गए या देश छोड़ने को मजबूर हुए, वहीं मचाडो ने वेनेजुएला में रहकर ही सत्ता को चुनौती दी।

🟡 2024 चुनाव और सत्ता की चुनौती

2023 में मचाडो ने विपक्षी प्राइमरी जीतकर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एकजुट विपक्ष की उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। हालांकि मादुरो सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के वैकल्पिक उम्मीदवार का समर्थन किया। विपक्ष ने दावा किया कि उसने चुनाव में भारी जीत दर्ज की, लेकिन सरकारी चुनाव आयोग ने बिना ठोस सबूत पेश किए मादुरो को विजेता घोषित कर दिया।

Maria Corina Machado

🟡छिपकर रहना और फिर नोबेल तक का सफर

चुनाव के बाद हालात इतने बिगड़े कि मचाडो को अपनी जान और आज़ादी के डर से छिपकर रहना पड़ा। इसी बीच 2025 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके लंबे संघर्ष और तानाशाही से शांतिपूर्ण बदलाव की कोशिशों के लिए दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस पुरस्कार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी खुद को दावेदार बताते रहे थे, ऐसे में मचाडो का नोबेल जीतना ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

🟡 अंतरराष्ट्रीय पहचान और सम्मान

नोबेल से पहले भी मचाडो को कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। 2024 में उन्हें यूरोपीय संघ का सखारोव पुरस्कार और वाक्लाव हावेल मानवाधिकार पुरस्कार दिया गया। वह बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं और टाइम मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों की सूची में भी शामिल रह चुकी हैं।

क्या बनेंगी मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की राष्ट्रपति?

अब जबकि मादुरो की सत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं, तो मारिया कोरिना मचाडो को संभावित राष्ट्रपति के रूप में देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि अगर वे सत्ता में आती हैं, तो वेनेजुएला में लोकतंत्र की वापसी का रास्ता खुलेगा। हालांकि राह आसान नहीं है, लेकिन इतना तय है कि मचाडो आज वेनेजुएला की राजनीति का सबसे मजबूत और चर्चित चेहरा बन चुकी हैं।

काराकास की सड़कों से लेकर वैश्विक मंच तक, मारिया कोरिना मचाडो की कहानी सिर्फ सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि एक देश को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर ले जाने की जिद की कहानी है। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया की निगाहें 'आयरन लेडी' पर टिकी हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+