इतमार बेन-ग्विर कौन हैं, जिनकी चर्चा इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू से भी अधिक हो रही है?
बेन ग्विर उन इजरायली सैनिकों को लीगल माफी देना चाहते हैं, जो फिलिस्तीनियों पर गोलियां बरसाने के दोषी पाए गए हैं। बेन उन यहूदियों के मुकदमे लड़ते रहे हैं, जिन पर आतंकवाद और हेट क्राइम के आरोप लगे हों।
इजरायल चुनावः अभी खबर लिखे जाने तक 91 फीसदी सीटों की गिनती पूरी हो चुकी है। इस चुनाव में नेतन्याहू गुट को 120 में से 65 सीटें मिलती दिख रही हैं। यह एक दिन पहले ही तय हो गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू छठी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। हालांकि अन्य चुनावों की तरह इस बार जीते के अकेले हीरो बेंजामिन नेतन्याहू नहीं हैं। उनके साथ हैं धुर दक्षिणपंथी नेता बेन-ग्विर। नेतान्याहू की सत्ता में वापसी के पीछे धुर दक्षिणपंथी नेता इतामार बेन-ग्विर का अहम योगदान माना जा रहा है।

कुहानिस्ट विचार को मानते हैं बेन-ग्विर
बेन-ग्विर दिवंगत अति-राष्ट्रवादी मीर कुहान के कुहानिस्ट विचारधारा के अनुयायी हैं। कुहानिस्ट विचारधारा का मानना है कि कि इजरायल में गैर यहूदियों को मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। कुहाने संगठन अरबी तथा मुसलमानों को यहूदी समुदाय तथा इजरायल के दुश्मन के रूप में देखती है। हालांकि कहाने संगठन को 1994 में इजरायल में प्रतिबंधित कर दिया गया था जब इसके एक समर्थक बारूक गोल्डस्टीन ने 29 मुस्लिमों की हत्या कर दी थी। बेन-ग्विर, बारूक के बड़े फैन हैं और इसकी तस्वीर घर में टांग कर रखते हैं।

सभी फिलिस्तियों को इजरायल से निकालना चाहते हैं बेन-ग्विर
अमेरिका ने भी कुहान संगठन को एक आतंकवादी समूह के रूप में घोषित कर रखा है। कुछ साल पहले बेन-ग्विर ने कहा था कि इजरायल से सभी फिलिस्तीनियों के निकाल देना चाहिए। ग्वेर का मानना है कि यहूदियों को देश के प्रति वफादार होना चाहिए, जो कोई भी देश के प्रति वफादार नहीं हैं वे आतंकी हैं। बीते चुनाव में बेन-ग्विर की पार्टी ओट्ज़मा येहुदित का गठन 2012 में हुआ था। बीते चुनाव में इस पार्टी को महज 1 सीट मिली थी, लेकिन इस बार रुझानों के मुताबिक इस पार्टी को 14 से 15 सीटें मिल सकती हैं।

जीत के बाद सभी के लिए काम करने का किया वायदा
बहुमत को देखते हुए बेन-ग्विर ने मीडिया से कहा कि वे इजरायल के सभी नागरिकों के लिए काम करेंगे, चाहें वे उनसे नफरत करने वाले ही क्यों ना हों। हालांकि, बेन ग्विर के समर्थक उनके जैसे दरियादिल नहीं दिखे और सभी ने सभा में आंतकियों की मौत के नारे लगाए। पिछले महीने बेन-ग्विर उस समय खूब सुर्खियों में रहे, जब पूर्वी यरुशलम के अरब शेख जर्राह जिले फ्लैशपॉइंट के दौरा करने के दौरान फिलिस्तीनियों ने पत्थर से उन्हें निशाना बनाया था। इसके बाद बेन-ग्विर ने अपनी हैंडगन उठा ली और अपने सुरक्षाकर्मियों को ललकारा कि वे आसपास मौजूद अरब लोगों को गोली मार दें।

सुरक्षा मंत्री बनना चाहते हैं बेन-ग्विर
बेन ग्विर नई सरकार में सुरक्षा मंत्री बनने की चाह रखते हैं। 46 वर्षीय बेन-ग्विर को साल 2007 में अरबों के खिलाफ नस्लवादी उकसावे और कुहन के समर्थन के लिए दोषी ठहराया गया था। बेन-ग्विर पेशे से वकील हैं। यरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद के पास भी अक्सर जाते रहते हैं। इसे यहूदी पवित्र टेंपल माउंट मानते हैं। यह इलाका यहूदियों का सबसे पवित्र और मुस्लिमों का तीसरा सबसे पवित्र जगह है। उस जगह वे अक्सर कहते हैं, "मैं यहाँ देश को बचाने के लिए आया हूँ।" वे कहते हैं, "मैं जेहादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूँ और अपने देश को बचाने निकला हूँ।"

विपक्षी सांसदों को आंतकी कहते हैं बेन ग्विर
बेन गवीर उन इजरायली सैनिकों को लीगल माफी देना चाहते हैं, जो फिलिस्तीनियों पर गोलियां बरसाने के दोषी पाए गए हैं। बेन उन यहूदियों के मुकदमे लड़ते रहे हैं, जिन पर आतंकवाद और हेट क्राइम के आरोप लगे हों। बेन विपक्षी सांसदों को आतंकवादी बताते हैं और कहते हैं कि उन्हें दूसरे देश चले जाना चाहिए। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार का प्रमुख हिस्सा बनने के बाद से देश में दक्षिणपंथी ताकतें और मजबूत होंगी। स्थिर सरकार होने और मजबूत तथा सहयोगियों का समर्थन मिलने से नेतन्याहू और कड़े तरीके से शासन चलाने में सक्षम होंगे।












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