इमैनुएल मैकरॉन-फ्रांस के 'अरविंद केजरीवाल' नए राष्ट्रपति, 39 वर्ष के इमैनुएल मैक्रों
अपनी बैंकर की नौकरी छोड़कर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकोइस होलांद के आर्थिक सलाहकार बने थे नए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों। फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं मैक्रों।
पेरिस। 39 वर्ष के इमैनुएल मैक्रों अब फ्रांस के नए राष्ट्रपति हैं और सबसे कम उम्र में फ्रांस के राष्ट्रपति बनकर उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया है। फ्रैंकोइस फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं। मैक्रों फ्रांस के टेक स्टार्टअप मूवमेंट के चैंपियन माने जाते हैं। मैक्रों ने इन चुनावों में एक राइटविंगर मैरीन ले पेन को शिकस्त दी है। मैक्रों को यूरोप और यूरोपियन यूनियन का बड़ा समर्थक माना जाता है। अगर आप चाहे तो मैकरॉन को फ्रांस का 'अरविंद केजरीवाल' कह सकते हैं। जानिए कौन हैं इमैनुएल मैक्रों और क्यों हम उनकी तुलना अरविंद केजरीवाल से कर रहे हैं।

सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति
सिर्फ39 वर्ष की उम्र देश के राष्ट्रपति बनने मैक्रों पहले व्यक्ति हैं। इसी तरह से जब दिल्ली ने अरविंद केजरीवाल को अपना मुख्यमंत्री चुना था तो वह भी सबसे उम्र के सीएम बने थे। मैक्रों ने चुनावों में केजरीवाल की ही तरह एक अनुभावी नेता को मात दी है।

राजनीति का कोई अनुभव नहीं
केजरीवाल की ही तरह मैक्रों के पास राजनीति का कोई अनुभव नहीं है। अगर कुछ है तो वह है पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकाइस होलांद के साथ बतौर आर्थिक सलाहकार जुड़ना। एक स्टार स्टूडेंट रहे मैक्रों एक इनवेस्टमेंट बैंकर थे और होलांद ने उन्हें वर्ष 2012 में राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल करने के बाद आर्थिक सलाहकार की जिम्मेदारी दी। इसके बाद वर्ष 2014 में वह होलांद के वित्त मंत्री रहे और वर्ष 2016 तक उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरा किया।

रविवार को भी अब खुलते हैं स्टोर
जब मैक्रों देश के वित्त मंत्री बनें तो उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में कई तरह के सुधार किए इनमें से सबसे ऊपर था रविवार को ज्यादा से ज्यादा स्टोर्स को खुला रखने का आदेश देना। साथ ही कुछ खास तरह के स्टोर्स को देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से शाम को खोलने की मंजूरी दी गई। दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने भी कई तरह के सुधारों को आगे बढ़ाया है।

विपक्षियों ने लगाए कई तरह के आरोप
मैकरॉन के विपक्षियों ने उन पर मजदूरों की सुरक्षा को बर्बाद करने का आरोप लगाया। कई माह तक मैक्रों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और फिर होलांद को संसद के कानून के तहत स्पेशल पावर का प्रयोग करना पड़ा। सीएम केजरीवाल पर भी आरोपों का लगना कोई नई बात नहीं है।

मैक्रों ने लॉन्च किया अपना कैंपेन
पिछले वर्ष मैक्रों ने अपना एक राजनीतिक आंदोलन शुरू किया। इसका नाम था एन मार्श या फिर इन मोशन कहा गया। इस आंदोलन के साथ ही उन्होंने होलांद की समाजवादी सरकार को बाय-बाय कर दिया। मैक्रों ने चुनावों में वादा किया कि वह व्यावसायिक और सिविल सोसायटी के नए चेहरों के साथ देश की राजनीति का मेकओवर करेंगे। सीएम केजरीवाल ने भी सत्ता में आने से पहले इसी तरह का वादा किया था।

मैक्रों की अगली चुनौती
मैक्रों की अगली चुनौती है जून में देश में होने वाले संसदीय चुनाव जिसमें कोई भी बड़ी पार्टी उन्हें समर्थन नहीं करती है। मैक्रों फ्री मार्केट के बड़े समर्थक हें और उन्होंने ग्लोबलाइजेशन के जरिए फ्रांस को फायदे पर ध्यान देने की अपील की है।












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