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Abu Mohammed al-Julani: विद्रोही बलों का नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी कौन है, जो बनेगा सीरिया का नया सुल्तान?

Who is Abu Mohammed al-Julani: सीरिया में 50 सालों से चले रहे राष्ट्रपति बशर अल-असद के परिवार के शासन का अंत हो गया है और उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा है। इसके साथ ही, देश के प्रधानमंत्री ने विद्रोही बलों को नई सरकार के निर्माण का न्योता दिया है।

सीरिया की लड़ाई में सरकारी सेना ने सिर्फ तीन दिनों में अलेप्पो शहर में हथियार डाल दिए थे और छिटपुट लड़ाई के बाद ही राजधानी दमिश्क से भी सेना पीछे हट गई, जिसकी वजह से ज्यादा खूनखराबा हुए बिना ही विद्रोही बलों ने देश पर नियंत्रण हासिल कर लिया है।

Abu Mohammed al-Julani

इस हमले का नेतृत्व अबू मोहम्मद अल-जुलानी कर रहे था, जो हयात तहरीर अल-शाम (HTS) का मुखिया है और अब इस समूह के हाथ में सीरिया का भविष्य फंस गया है, जिसके कभी अलकायदा और ISIS जैसे आतंकवादी संगठनों से काफी गहरे ताल्लुकात थे।

यानि, अब सीरिया की कमान अबू मोहम्मद अल-जुलानी के हाथों में आ गई है और पूरी संभावना है, कि देश का नया सुल्तान वही बनेगा। लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि अबू मोहम्मद अल-जुलानी कौन है, उसका अतीत क्या है और वो वर्तमान में क्या करता रहा है?

अबू मोहम्मद अल-जुलानी कौन है?

हयात तहरीर अल-शाम का गठन करने के बाद अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने कहा था, कि अब उसका ध्यान सिर्फ सीरिया पर रहेगा और उसका अब अंतर्राष्ट्रीय अभियानों से कोई लेना-देना नहीं है। इस घोषणा के साथ अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने वैश्विक समुदाय को ये संदेश देने की कोशिश की, कि वो दुनिया के लिए खतरा नहीं है। इसके साथ ही उसने अलकायदा के साथ भी अपने सभी संबंधों को खत्म करने की घोषणा की थी और खुद को सीरिया का नेता बताने का संदेश दिया था।

पिछले कई सालों से उसने बार बार यही दोहराया है, कि उसका मकसद सीरिया में 'इस्लामिक गणराज्य' की स्थापना करना है। साल 2016 के बाद उसने लगातार खुद को अपने संगठन को सीरिया के भविष्य के तौर पर पेश किया है, जिसका मकसद राष्ट्रपति बशर अल-असद के क्रूर शासन को उखाड़ फेंकना है।

सीरिया मं साल 2011 में गृहयुद्ध शुरू हुआ था, जिसे राष्ट्रपति असद ने हिज्बुल्लाह, रूस और ईरान की मदद से कुचल दिया था, लेकिन इस बार इजराइल के साथ जंग लड़ते लड़ते हिज्बुल्लाह अपंग हो चुका है, रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा है और ईरान भी इजराइल के साथ संघर्ष में है, और इन घटनाओं ने अबू मोहम्मद अल-जुलानी के लिए असद शासन को उखाड़ फेंकने के लिए रास्ता साफ कर दिया।

HTS ने सीरियाई साल्वेशन सरकार के माध्यम से इदलिब के गवर्नरेट को चलाया है, जिसे उसने 2017 में नागरिक सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, न्यायपालिका और बुनियादी ढांचा प्रदान करने के साथ-साथ वित्त और सहायता वितरण का प्रबंधन करने के लिए स्थापित किया था। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय निगरानी संस्थाओं ने कहा है, कि HTS भी कठोर शासन चलाता है और उसे भी असहमति बर्दाश्त नहीं है।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में स्वतंत्र पत्रकारिता संगठन सीरिया डायरेक्ट की रिपोर्ट है, कि एचटीएस ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लापता करवाया है और प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं, जिन्होंने इसका विरोध किया था।

Abu Mohammed al-Julani

अबू मोहम्मद अल-जुलानी का अतीत क्या है?

उसका जन्म 1982 में सऊदी अरब के रियाद में हुआ था और उसका शुरू में नाम अहमद हुसैन अल-शरा था। उसके पिता पेट्रोलियम इंजीनियर थे। साल 1989 में पूरा परिवार वापस सीरिया लौट आया और दमिश्क के पास बस गया। 2003 में इराक जाने से पहले दमिश्क में उसने अपना समय कैसे बिताया, उसके बारे में जानकारियां काफी कम हैं, लेकिन ये जानकारी है, कि वो अलकायदा में शामिल हो गया था।

2006 में इराक में अमेरिकी सेना ने इसे गिरफ्तार कर लिया और पांच सालों तक वो हिरासत में रहा था। लेकिन, जब उसे रिहा कर दिया गया, तो अल-जुलानी को सीरिया में अल-कायदा की शाखा, अल-नुसरा फ्रंट की स्थापना का काम सौंपा गया, जिसने विपक्ष के कब्जे वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से इदलिब में अपना प्रभाव बढ़ाया।

अल-जुलानी ने उन शुरुआती वर्षों में अल-कायदा के "इस्लामिक स्टेट इन इराक" के प्रमुख अबू बकर अल-बगदादी के साथ काम किया, जो बाद में ISIL (ISIS) बन गया। अप्रैल 2013 में, अल-बगदादी ने अचानक घोषणा की, कि उसका समूह अल-कायदा के साथ संबंध तोड़ रहा है और सीरिया में विस्तार करेगा, जिससे अल-नुसरा फ्रंट प्रभावी रूप से ISIL नामक एक नए समूह में बदल गया।

लेकिन अल-जुलानी ने इस परिवर्तन को खारिज कर दिया और उसवने अल-कायदा के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।

2014 में अपने पहले टेलीविज़न इंटरव्यू के दौरान उसने अल जजीरा से कहा था, कि सीरिया में वो इस्लामिक शासन की स्थापना करना चाहता है, जहां इस्लामिक कानून लागू होगा और देश के अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और अलावी शामिल हैं, उन्हें इसमें समायोजित नहीं किया जाएगा।

लेकिन, उसके बाद के कुछ सालों में उसने अलकायदा से भी खुद को अलग करना शुरू कर दिया और वैश्विक खिलाफत की स्थापना करने की अलकायदा की मुहिम से खुद को अलग कर लिया और उसने सीरिया में ही अपना ध्यान केन्द्रित करना शुरू कर दिया।

साल 2016 में राष्ट्रपति असद की सेना ने रूस की मदद से अलेप्पो शहर पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद अल-जुलानी ने घोषणा की, कि उनका समूह बदलकर 'जबात फतेह अल-शाम' हो गया है। 2017 की शुरुआत में, हजारों लड़ाके अलेप्पो से भागकर इदलिब में घुस आए और अल-जुलानी ने उनमें से कई समूहों को अपने साथ मिलाकर HTS बनाने की घोषणा कर दी।

वाशिंगटन सी में सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज थिंक-टैंक के अनुसार, HTS का घोषित मकसद सीरिया को असद की निरंकुश सरकार से आजाद कराना, देश से "ईरानी मिलिशिया को बाहर निकालना" और "इस्लामी कानून" की अपनी व्याख्या के अनुसार, एक राज्य की स्थापना करना है।

अबू मोहम्मद अल-जुलानी का भविष्य क्या है?

पिछले हफ्ते अलेप्पो पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद HTS ने अब सीरिया की राजधानी दमिश्क को अपने कब्जे में ले लिया है और अल-जुलानी ने अल्पसंख्यकों को लेकर अपने पुराने रूख को बदलते हुए उदार रूख अपनाने के संकेत दिए हैं। अलेप्पो पर कब्जा करने के बाद इसने आश्वासन दिया था, कि धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की रक्षा की जाएगी।

अलजजीरा ने लेवेंट में सशस्त्र समूहों पर सीरियाई विशेषज्ञ हसन हसन के हवाले से कहा है, कि अल-जुलानी एचटीएस को सीरिया में एक विश्वसनीय शासक इकाई और वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों में एक संभावित भागीदार के रूप में ब्रांड करना चाहता है।

CSIS के मुताबित, इदलिब में, उसने हरकत नूर अल-दीन अल-ज़िन्की, लिवा अल-हक और जैश अल-सुन्ना जैसे अन्य सशस्त्र विपक्षी समूहों के साथ साझेदारी करने की कोशिश की है, और सीरिया में अल-कायदा की नई शाखा हुर्रास अल-दीन जैसे पहले के सहयोगियों से बचने की कोशिश की है।

HTS को वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र, तुर्किये, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने एक "आतंकवादी" संगठन करार दिया गया है।

अल-जुलानी ने कहा है, कि उसे आतंकी संगठन मानना अनुचित है, क्योंकि उसके समूह ने राष्ट्रीय कर्तव्य के लिए अपने पुराने संबंधों को त्याग दिया है। अल-जुलानी की घोषित घरेलू महत्वाकांक्षाओं के बावजूद, सीरिया में सबसे बड़े विपक्षी सशस्त्र समूह के प्रमुख के रूप में, देश पर उसका प्रभाव राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देगा।

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