बलूचों का माजिद ब्रिगेड क्या है, जिसने चीन के 26 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को किया फेल, पस्त हुई पाकिस्तानी सेना!

Who are the Majeed Brigade: बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करने वाले अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के माजिद ब्रिगेड ने पाकिस्तान के रणनीतिक ग्वादर बंदरगाह के बाहर फिर से एक भीषण बम धमाका किया है।

बुधवार को हुए इस बम धमाके में कम से कम 25 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है। हालांकि, पाकिस्तान का कहना है, कि हमले में आठ आतंकवादी और दो सुरक्षाकर्मी मारे गए, लेकिन बीएलए ने 25 सुरक्षाकर्मियों को मारने का दावा किया है।

Majeed Brigade gawadar port

बलूचों का माजिद ब्रिगेड क्या है?

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में कई अलगाववादी समूहों में बीएलए को सबसे खतरनाक माना जाता है। और माजिद ब्रिगेड, बीएलए का ही एक आत्मघाती दस्ता है, जिसका काम अलग अलग पाकिस्तानी प्रांतों में आत्मघाती बम धमाके करना है। इसका गठन 2011 में दो भाइयों के नाम पर किया गया था, जिन्हें माजिद लैंगोव कहा जाता था और माजिद ब्रिगेड उन्हीं की कहानी है।

बलूच लिबरेशन आर्मी का लक्ष्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करवाना है, जहां पर पाकिस्तान की सेना ने सालो तक नरसंहार किए हैं और जिसे पाकिस्तान ने अब चीन के हवाले कर दिया है।

पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बलूचिस्तान, देश का सबसे बड़ा और सबसे कम आबादी वाला प्रांत है, जिसपर पाकिस्तान ने भारत से विभाजन के बाद अवैध कब्जा कर लिया था। बलूचिस्तान में विशालकाय तेल और प्राकृतिक संसाधनों के भंडार हैं, लेकिन स्थानीय बलूचों को इसमें से कुछ नहीं मिलता, बल्कि जो भी पैसा आता है, वो पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी पंजाबी हजम कर जाते हैं। पाकिस्तान की संसद में भी बलूचों का सबसे कम प्रतिनिधित्व है।

बलूचिस्तान का मुद्दा क्या है?

भारत के विभाजन के समय बलूचिस्तान पर अंग्रेजों का कब्जा था, लेकिन बलूचिस्तान के लोग अपना अलग देश चाहते थे और बलूचिस्तान के कई सरदारों ने अपना अलग मुल्क होने के नाम पर अंग्रेजों का समर्थन किया था, जिनमें कलात के मुखिया अहमद यार खान सबसे शक्तिशाली थे, जो स्थानीय आदिवासी समाज से आते थे।

लेकिन, आजादी मिलने के बाद 1948 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर हमला कर दिया और फिर पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर बलूच नेताओं को मार डाला। जिसके बाद बलूचों का कभी ना थमने वाला विद्रोह शुरू हो गया।

इस बीच पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह चीन की मदद से बनाया, जिसे बलूचिस्तान के लोग अन्याय का प्रतीक समझते हैं और इस प्रोजेक्ट पर लगातार हमले करते रहते हैं। ग्वादर बंदरगाह की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के हजारों सैनिक तैनात रहते हैं।

बलूचों के गुस्से की दूसरी सबसे बड़ी वजह ये है, कि ग्वादर बंदरगाह की नींव पड़ने के साथ ही इस प्रोजेक्ट को बलूचों से दूर रखा गया और बलूचों की जगह पाकिस्तानी पंजाबियों को बड़े पैमाने पर नौकरी दिए गये। वहीं, चीन के सैकड़ों इंजीनियरों को भी इस प्रोजेक्ट से रोजगार मिला, लेकिन बलूचों के हाथ पूरी तरह से खाली रहे। लिहाजा, हाल के वर्षों में बलूच उग्रवादियों ने देश में ग्वादर और चीनी नागरिकों, दोनों को बार-बार निशाना बनाया है।

Majeed Brigade gawadar port

माजिद सीनियर और भुट्टो

बलूचिस्तान में साल 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल अवामी पार्टी (एनएपी) भारी बहुमत से सत्ता में आई थी और उस वक्त पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार थी और पाकिस्तानी संसद में एनएपी विपक्ष में थी। एएनपी लंबे समय से बलूचिस्तान की स्वायत्तता की वकालत कर रही थी और 1971 में बांग्लादेश के अलग होने से इसका हौसला काफी बढ़ गया था।

लेकिन, 1971 की जंग में भारत से मिली अपमानजनक हार को भुट्टो भुला नहीं पा रहे थे और उन्होंने बलूचों की इस पार्टी को निर्ममता से कुचलना शुरू कर दिया। एनएपी, लोकतांत्रिक तरीके से बलूचों के लिए हक मांग रही थी, लेकिन सेना की कठोर कार्रवाई ने बलूच राष्ट्रवादियों को भड़का दिया और बलूचों का आंदोलन हिंसक हो गया, जिससे पूरे प्रांत में कानून व्यवस्था का हाल खराब हो गया।

1973 में भुट्टो की सरकार ने एएनपी पर गद्दारी का आरोप लगाकार बलूचिस्तान में उसकी सरकार को बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद बलूचों के सब्र का बांध टूट गया और 1973 से 1977 के बीच पाकिस्तानी सेना ने हजारों बलूचों की हत्या कर दी। वहीं, सैकड़ों सैनिक और पुलिसकर्मी भी मारे गये। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने हजारों बेगुनाह बलूचों की हत्याएं की, महिलाओं से रेप किए और हजारों युवाओं को हमेशा के लिए गायब कर दिया गया, जिनके सुराग आज तक नहीं मिले हैं।

इसी दौरान माजिग लैंगोव सीनियर, जो बलूचिस्तान के एक युवा थे, उन्होंने प्रधानमंत्री भुट्टों की हत्या करने का फैसला किया और 2 अगस्त 1974 को क्वेटा में आयोजित भुट्टो के एक कार्यक्रम के दौरान ग्रेनेट लेकर एक पेड़ पर छिप गये। माजिद का भागने का कोई इरादा नहीं था और भुट्टो को मारने की कोशिश में उनकी जान निश्चित तौर पर जाने वाली थी।

लेकिन, किस्मत ने माजिद का साथ नहीं दिया। माजिद ने पेड़ से भुट्टो की तरफ ग्रेनेड फेंका भी, लेकिन वो ग्रेडेन उन्हीं के हाथ में फट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

जूनियन माजिद ने कुर्बान कर दी जिंदगी

सीनियर माजिद की भुट्टो की हत्या की कोशिश में मौत हो गई और उनकी मौत के 2 सालों के बाद जूनियन माजिद का जन्म हुआ। मौत के बाद सीनियर माजिद, बलूचों के लिए क्रांतिकारी बन गये थे।

इस बीच 17 मार्च 2010 को पाकिस्तानी सेना ने क्वेटा में जूनियर माजिद को एक घर में घेर लिया और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। यानि, बलूचिस्तान के लिए दोनों ही भाइयों ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।

मजीद जूनियर की मौत पर पूरे बलूचिस्तान में राष्ट्रवादियों ने शोक व्यक्त किया। लेकिन, दोनों भाइयों की कुर्बानी ने बलूचों की आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया और अब हर बलूच माजिद भाइयों की कुर्बानी को याद कर उनसे प्रेरणा लेने लगे और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जंग छेड़ने लगे।

वहीं, जब बीएलए के नेता असलम अचू ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के आत्मघाती दस्ते का निर्माण करने का फैसला किया, तो नये दस्ते का नाम माजिद भाइयों के नाम पर ही 'माजिद ब्रिगेड' रखा गया।

माजिद ब्रिगेड ने पहला आत्मघाती हमला 30 दिसंबर 2011 को एक आदिवासी नेता और पाकिस्तानी सेना के प्रतिनिधि शफीक मेंगल को निशाना बनाकर किया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के 14 लोग मारे गये और 35 से ज्यादा सैनिक घायल हो गये, हालांकि शफीक सुरक्षित बच गया।

हालांकि, इसके बाद ये समूह काफी अर्से तक शांत रहा, लेकिन 2018 में ये समूह फिर से सक्रिय हो गया और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास दलबंदिन में चीनी इंजीनियरों को ले जा रही एक बस पर हमला कर दिया। इस हमले को असलम अचू के 22 साल के बेटे रेहान असलम बलूच ने अंजाम दिया था। जिसमें सभी चीनी इंजीनियर मारे गये थे।

दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, माजिद ब्रिगेड ने कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास (2018), ग्वादर पर्ल कॉन्टिनेंटल होटल (2019) और कराची में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (2020) पर भी हमला किया है। और इसीलिए, 26 अरब डॉलर का सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है, क्योंकि पूरे बलूचिस्तान ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

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