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G-7 Summit: जापान में प्रधानमंत्री मोदी और जो बाइडेन की होगी स्पेशल बैठक, व्हाइट हाउस का बड़ा बयान

जापान इस साल जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, जिसमें इसके सभी सदस्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, इटली, जापान और फ्रांस शामिल होंगे। भारत बतौर मेहमान इस शिखर सम्मेलन में शामिल होता है।

Joe Biden to meet PM Modi

PM Modi to Meet Joe Biden: व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन जापान में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज से मुलाकात करेंगे।

अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने कहा, कि "उन्हें (बाइडेन) क्वाड के अन्य सदस्यों के नेताओं, भारत के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ भी मिलने का अवसर मिलेगा।"

आपको बता दें, कि इस महीने ऑस्ट्रेलिया में क्वाड की बैठक होने वाली थी, लेकिन अमेरिका के कर्ज संकट में फंसने के बाद बाइडेन का ऑस्ट्रेलिया दौरा रद्द हो गया है, जिसके बाद क्वाड की बैठक भी टल गई है। हालांकि, बाइडेन जापान में जी7 की बैठक में शामिल होगें, जिसमें बतौर गेस्ट भारत भी हिस्सा लेता है और पीएम मोदी जी7 की बैठक के दौरान भारत के प्रतिनिधि रहेंगे।

जापान में जी7 की बैठक

इस साल जापान के हिरोशिया में जी7 की बैठक का आयोजन किया जा रहा है, जहां के लिए जो बाइडेन अमेरिका से निकल चुके हैं। हिरोशिमा, जापान के उन दो शहरों में से एक है, जहां पर अमेरिका ने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान परमाणु बम गिराया था।

जॉन किर्बी ने कहा, कि "जब से राष्ट्रपति ने कार्यभार संभाला है, हमारे गठबंधनों और साझेदारियों को पुनर्जीवित करना और दुनिया भर में अमेरिका के नेतृत्व को फिर से स्थापित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है।"

व्हाइट हाउस ने जोर देकर कहा, कि "जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल के दौरान जी7 को मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की है और उसी का परिणाम है, कि आज हमारे सहयोगी और पार्टनर्स, पहले की तुलना में अमेरिका के और करीबी हो चुके हैं"।

उन्होंने कहा, कि "पिछले 15 महीनों में जी7 काफी मजबूती के साथ यूक्रेन के साथ खड़ा हुआ है और एकजुटता दिखा रहा है, जिसपर पिछले साल फरवरी में रूस ने आक्रमण किया था"। उन्होंने कहा, कि "यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाए गये हैं और यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई की गई है।"

इसके साथ ही जॉन किर्बी ने कहा, कि "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना जो चुनौतियां पेश कर रहा है, उसको लेकर भी हम जी7 की बैठक के दौरान चर्चा करेंगे, जो समान मूल्यों पर आधारित होगी।"

G7 के विस्तार का प्रस्ताव

आपको बता दें, कि भारत अभी तक जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन हर साल भारत को गेस्ट के तौर पर आमंत्रित किया जाता है। जी7 में भारत को शामिल करने की मांग कई सालों से की जा रही है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी भारत को जी7 का स्थाई सदस्य बनाने की मांग उठा चुके हैं।

साल 2021 के शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था, कि 'जी-7 में भारत, ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया और साउथ अफ्रीका को शामिल कर लिया जाए और फिर 11 लोकतांत्रिक देशों को मिलकर डेमोक्रेटिक-11 का निर्माण करना चाहिए'।

आपको बता दें, कि जी7 सात देशों का संगठन है, जिसमें अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, इटली, जापान और फ्रांस है। पहले ये आठ देशों का संगठन जी-8 था, लेकिन 2014 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस को इससे बाहर कर दिया गया था।

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