क्या है पनामा पेपर्स लीक मामला, जिसमें नवाज शरीफ की कुर्सी गई

नवाज शरीफ के अलावा उनकी बेटी और दामाद को भी दोषी करार दिया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर ये पनामा पेपर्स लीक मामला क्या है।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर्स लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया है। दोषी करार देते ही नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया है। शरीफ पर काला धन जमा करने का आरोप था। इस मामले में इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने याचिका दाखिल की थी। नवाज शरीफ के अलावा उनकी बेटी और दामाद को भी दोषी करार दिया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर ये पनामा पेपर्स लीक मामला क्या है।

क्‍या है मोसैक फोंसेका और पनामा पेपर्स

क्‍या है मोसैक फोंसेका और पनामा पेपर्स

पनामा की मोसैका दुनिया में सबसे ज्‍यादा गुप्‍त तरीके से काम करने वाली कंपनी है। यह एक ऐसी कंपनी है जिसकी मदद दुनिया कई लोग सिर्फ इसलिए लेते हैं ताकि वे टैक्‍स देने से बच सकें या फिर कम टैक्‍स दें। इसी कंपनी के 10 लाख सीक्रेट्स डॉक्‍यूमेंट्स से ऐसी जानकारी सामने आई है जिससे ऐसे 'चोरों' के बारे में पता चलता है। इन डॉक्‍यूमेंट्स की इनवेस्टिगेशन को 'पनामा प्रोजेक्‍ट' नाम दिया गया और इन डॉक्‍यूमेंट्स को 'पनामा पेपर्स' नाम दिया गया है। इन डॉक्‍यमेंट्स की जांच इंटरनेशनल कोनसोर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्‍ट्स यानी आईसीआईजे की ओर से हुई थी।

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    दो लाख कंपनियों से जुड़ी है मोसैक फोंसेका

    दो लाख कंपनियों से जुड़ी है मोसैक फोंसेका

    पनापा पेपर्स की जब जांच की गई तो सामने आया कि यह कंपन‍ी दुनियाभर की कम से कम दो लाख कंपनियों से जुड़ी हुई है। ये दो लाख इसके लिए बतौर एजेंट काम करते हैं और पैसा इकट्ठा करते हैं। कई तरह की छानबीन के बाद भी यह साफ नहीं हो पाया कि इन दो लाख कंपनियों के मालिक कौन हैं। इस तरह की सबसे ज्‍यादा कंपनियां चीन और हांगकांग में पाई गईं। रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड और हांगकांग ऐसे देश थे जहां पर पैसा जमा करना सबसे सुरक्षित था। इसके बाद पनामा का नाम था।

    कैसे होती है चोरी

    कैसे होती है चोरी

    विदेशी कंपनियां ऐसे देशों जैसे पनामा में स्थित होती हैं और वे अपने ही टैक्‍स नियमों को फॉलो करती हैं। इन कंपनियों को ऐसे देशों में अपने गृहदेश की तुलना में कम टैक्‍स अदा करना पड़ता है।

    अमिताभ बच्‍चन और ऐश्‍वर्या राय

    अमिताभ बच्‍चन और ऐश्‍वर्या राय

    अमिताभ बच्‍चन को चार विदेशी शिपिंग कंपनियों जिनमें से एक ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड तो तीन बहमास में हैं, उनका निदेशक बनाया गया था। इन कंपनियों की स्‍थापना वर्ष 1993 में हुई थी। डॉक्‍यूमेंट्स का कहना है कि इन कंपनियों की ऑथराइज्‍ड पूंजी 5,000 अमेरिकी डॉलर से लेकर 50,000 अमेरिकी डॉलर ही थी लेकिन कई मिलियन डॉलर्स का लेनदेन किया गया।ऐश्‍वर्या राय बच्‍चन, उनके स्‍वर्गीय पिता कृष्‍ण राय, उनकी मां वृंदा राय और भाई आदित्‍य राय वर्ष 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में एक कंपनी एमिक पार्टनर्स लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स बनाए गए थे। वर्ष 2008 में कंपनी के खत्‍म होने से पहले ऐश का स्‍टेटस कंपनी में शेयरहोल्‍डर का हो गया था।

    केपी सिंह और समीर गहलौत

    केपी सिंह और समीर गहलौत

    डीएलएफ के मा‍लिक केपी सिंह ने भी वर्जिन आईलैंड में एक संपत्ति वर्ष 2012 में अपनी पत्‍नी इंद्रा केपी सिंह को को-शेयरहोल्‍डर बनाकर खरीदी थी। इसके बाद दो और कंपनियों की शुरुआत उनके बेटे राजीव सिंह और बेटी पिया सिंह ने वर्ष 2012 में की थी। इस परिवार के तीन विदेशी वेंचर्स की संपत्ति कुल मिलाकर 10 मिलियन डॉलर है। वहीं इंडिया बुल्‍स के मालिक समीर गहलौत की लंदन में परिवार के नाम पर तीन संपत्तियों के बारे में बताया गया। कहा गया कि समीर के पास दिल्‍ली, करनाल, न्‍यू जर्सी, बहमास और यूके में और भी प्रॉपर्टीज हैं। यह सारी प्रॉपर्टीज एसजी ग्रुप्‍स ऑफ ट्रस्‍ट के नाम पर है जिसकी शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी।

    गद्दाफी से लेकर असद का नाम

    गद्दाफी से लेकर असद का नाम

    इन डॉक्‍यूमेंट्स से पता लगता है कि 72 देशों के वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों के तार इस कंपनी से जुड़े हैं। इनमें कई पूर्व तानाशाह भी शामिल हैं जिन पर अपने ही देश को लूटने का आरोप है। इन डॉक्‍यूमेंट्स में इजिप्‍ट के पूर्व तानाशाह होस्‍नी मुबारक, लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी और सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के परिवार और उनके सहयोगियों से जुड़ी कंपनियों की गोपनीय जानकारी भी शामिल है।

    राष्‍ट्रपति पुतिन का नाम भी

    राष्‍ट्रपति पुतिन का नाम भी

    इन डॉक्‍यमेंट्स से अरबों डॉलर की हेराफेरी करने वाले एक ऐसे रैकेट का भी पता लगा जिसके संबंध एक रशियन बैंक से है इस बैंक में राष्ट्रपति ब्‍लादीमिर पुतिन के करीबी सहयोगी भी जुड़े हुए हैं। यह बैंक है बैंक ऑफ रशिया जिस पर यूक्रेन संकट के बाद अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने बैन लगा दिया था। इन डॉक्‍यूमेंट्स से पहली बार पता चला कि यह बैंक कैसे काम करता है। बैंक विदेश में मौजूद कंपनियों के जरिए पैसा लगाता है। इनमें से दो कंपनियां आधिकारिक तौर पर उन लोगों की हैं जो राष्ट्रपति पुतिन के सबसे करीबी दोस्तों में शुमार हैं। इनका नाम है सर्गेई रोल्डूगिन है जो टीनएज से ही पुतिन के दोस्‍त हैं और उनकी बेटी मारिया के गॉडफादर भी हैं।

    क्‍यों बढ़ी नवाज की मुश्किलें

    क्‍यों बढ़ी नवाज की मुश्किलें

    पनामा पेपर्स में आईसलैंड के प्रधनमंत्री सिग्‍मंडर डावियो के परिवार का भी नाम आया और उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया। इस घटना के बाद नवाज शरीफ की मुश्‍किलें बढ़ गईं थी। विपक्षी नेताओं जिसमें क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान सबसे आगे थे, उन्‍होंने आरोप लगाया कि फंड से जुड़े कोई भी कागजात उपलब्‍ध नहीं हैं। साथ ही उन्‍होंने नवाज शरीफ से मांग की कि वह यह साबित करें क‍ि उन्‍होंने मनी लॉन्ड्रिंग करके इस पैसे को नहीं कमाया है।

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