जानिए कैसे अमेरिकी हथियार बन गए आईएसआईएस की ताकत
लंदन। आईएसआईएस दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और तमाम बड़े देशों को समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी जुगत है जिसे लगाने के बाद इसका खात्मा हो सकेगा।
पढ़ें-आईएसआईएस का कॉल सेंटर
ब्रिटिश लेखक और इतिहासकार माइकल बर्लेघ ने डेली मेल में लिखा है कि आईएसआईएस अब एक ऐसी ताकत बन चुका है जिसे अब तक कभी देखा ही नहीं गया था।
इराक से अपनी दहशत की शुरुआत करने वाले संगठन ने सीरिया तक अपना साम्राज्य फैला लिया है। इसने दोनों देशों के बीच मौजूद बॉर्डर को ही खत्म कर दिया है। जहां सीरिया की राक्का शहर संगठन की राजधानी बन गया है तो वहीं इराक का मोसुल शहर इसके हेडक्वार्टर के तौर पर है।
इराक पर हमले ने दी ताकत
- आईएसआईएस की शुरुआत वर्ष 2003 में उस समय हुई जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया।
- उस समय आईएसआईएस अल कायदा का हिस्सा था।
- सद्दाम हुसैन की मौत के साथ ही अलकायदा कमजोर हो गया।
- यहीं से आईएसआईएस को ताकत मिलने लगी।
- 2011 में शुरू हुआ सीरिया का सिविल वॉर आईएसआईएस के लिए वरदान साबित हुआ।
- 2012 तक आईएसआईएस पूरी तरह से अलकायदा से अलग हो चुका था।
- वर्ष 2012 में इराक की आठ बड़ी जेलों पर हमले हुए।
- इन हमलों में संगठन के 10,000 सदस्य भाग निकले।
- इन्हीं 10,000 सदस्यों ने जून 2014 से दुनिया पर दहशत फैलाने का काम किया।
- इराक की फलुज्जा, रामादी और मोसुल पर आईएसआईएस का कब्जा हुआ।
- सीआईएस की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन में इस समय 33,000 लड़ाके हैं।
- विदेशी आतंकियों की संख्या संगठन में सबसे ज्यादा है।
- आज इस संगठन के पास आठ ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है।
संगठन से जुड़ी कुछ और बातों पर स्लाइड्स के जरिए नजर डालिए।

न था पैसा न ताकत
अमेरिकी जर्नलिस्ट बेन स्वॉन के मुताबिक आईएसआईएस वर्ष 2006 तक एक छोटा सा शरारती तत्व ही था। इसके पास न तो पैसा था और न ही ताकत थी। उन्होंने बस अमेरिकी सेना के लिए कुछ हद तक इराक में समस्याएं पैदा करने का काम किया था।

इस सच को भी जानिए
वर्ष 2001 में इराक में अमेरिका का अभियान तो खत्म हो गया लेकिन अमेरिकी सरकार ने हथियारों को वहीं छोड़ देने का फैसला किया। आईएसआईएस ने उन हथियारों पर अपना कब्जा किया। टैंक्स, हमवीख् और कई हथियार आज आईएसआईएस की ताकत बन गए हैं।

सीरिया का युद्ध बन गया आईएसआईएस की ताकत
फ्री सीरियन आर्मी के नॉर्दन जनरल ने वर्ष 2013 में बयान दिया कि अगर अतंराष्ट्रीय सेनाएं विद्रोहियों को हथियार न दें तो सीरिया के हालात सिर्फ एक माह में सामान्य हो सकते हैं।विद्रोहियों को मिल रहे हथियार दरअसल आईएसआईएस के आतंकियों को ही मिल रहे थे।

सीआईए ने विद्राहियों को दिए थे हथियार
सीरिया में असद व्रिदेाहियों को हथियार और ट्रेनिंग दी गई। साथ ही जो हथियार उन्हें मिल रहे थे वह भी अमेरिका में नहीं बने थे लेकिन उनकी फंडिंग अमेरिकन एजेंसी सीआईए की ओर से की गई थी।

आज खुद निशाना बनने की कगार पर
अमेरिकी सरकार इस बात को जानती थी कि आईएसआईएस आतंकी अमेरिकी की ओर दी गई मदद और हथियारों को हासिल कर रहे हैं लेकिन फिर भी उसने कुछ नहीं किया।












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