इजराइल में घुसकर कत्लेआम मचाने वाली नुखबा फोर्स क्या है? ये इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती है?
Hamas’s ‘Nukhba Force
फिलिस्तीनी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को गाजा पट्टी से इजरायल की तरफ 5000 से ज्यादा रॉकेट दागे। इसके बाद से इजरायल और हमास के बीच लगातार 7 दिनों से जंग चल रही है। इजरायल भी गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
इस जंग के बीच अब एक नई फोर्स का नाम सामने आया है जिसका नाम नुखबा फोर्स है। इजरायली वायुसेना हमास की स्पेशल मिलिट्री यूनिट इसे खासतौर पर निशाना बना रहे हैं। न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, नुखबा फोर्स ने ही शनिवार (7 अक्टूबर) को इजरायल पर हमले को लीड किया था।

इजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेचट ने दावा किया कि इजराइल पर हुए हमले में नुखबा फोर्स का ही हाथ था। उन्होंने बताया कि अब नुखबा को टारगेट किया जा रहा है। आपको बता दें कि नुखबा फोर्स हमास की मिलिट्री विंग इज्ज अल-दीन अल-कसम में आने वाली फाइटिंग यूनिट है।
आइए जानते हैं क्या है नुखबा फोर्स और ये क्यों है इतना खतरनाक माना जाता है
'अल-नुखबा' असल में अरबी शब्द है, जिसका मतलब 'एलिट' यानी 'कुलीन' है। नुखबा एक ऐसी स्पेशल फोर्स है, जिसमें शामिल लड़ाकों का चुनाव हमास के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक कमेटी करती है।
नुखबा फोर्स में शामिल लड़ाके घात, छापेमारी, हमले, आतंकी सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ के साथ-साथ एंटी-टैंक मिसाइल, रॉकेट और स्नाइपर फायर जैसे हमलों को अंजाम देने में माहिर होते हैं। नुखबा फोर्स के खतरनाक लड़ाके हमास के शीर्ष नेताओं की हिफाजत करते हैं।
नुखबा फोर्स के लड़ाकों की ट्रेनिंग भी बहुत सख्त होती है। उन्हें हथियार और विस्फोटकों को संभालने की खास ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही स्कूबा डायविंग और हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट के लिए भी तैयार किया जाता है।
हमास की अल-नुखबा यूनिट 2014 में गाजा युद्ध में भी शामिल रही थी। उस समय इसके लड़ाकों ने इजरायली सेना पर कई सारे सफल हमले किए थे। इसके बाद इजरायली सेना ने 'ऑपरेशन प्रोटेक्टिव एज' चलाया था। इस ऑपरेशन में नुखबा के कई लड़ाई मारे गए थे।
हाल के सालों में अल-नुखबा के लड़ाकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। साथ ही साथ उनकी क्षमताएं भी बढ़ी हैं। हालांकि, हमास और ISIS के बीच अदावत चलती है। यही वजह है कि ISIS के लड़ाके नखुबा फोर्स को खूब निशाना बनाते हैं। इसकी वजह से नुखबा के काफी लड़ाके भी मारे जा चुके हैं।












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