'डर्टी बम' क्या है ? इसके बारे में सबकुछ जानिए, रूसी मीडिया ने यूक्रेन पर चेर्नोबिल में बनाने का लगाया है आरोप
मास्को/कीव/वॉशिंगटन, 6 मार्च: यूक्रेन अपने चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट में 'डर्टी बम' बनाने के करीब था। यह आरोप रूसी मीडिया ने लगाया है। गौरतलब है कि चेर्नोबिल न्यूक्लियर पॉवर प्लांट साल 2000 से ही बंद हो चुका है। यही नहीं यूक्रेन ने यह भी कहा है कि वह 1994 से ही परमाणु हथियारों की होड़ से दूर हो चुका है। आइए जानते हैं कि 'डर्टी बम' और परमाणु बमों में क्या अंतर है, इसके खतरे कितने गंभीर हैं और यूक्रेन पर इस समय ऐसे आरोप लगाने के पीछे रूस के आधार कितने मजबूत हैं।

'डर्टी बम' बनाने के करीब था यूक्रेन- रूसी मीडिया
न्यूज एजेंसी रॉयटर के मुताबिक रूसी मीडिया ने अज्ञात स्रोत के हवाले से रविवार को दावा किया है कि यूक्रेन प्लूटोनियम-आधारित परमाणु हथियार 'डर्टी बम' बनाने के करीब था। हालांकि, स्रोत ने इसको लेकर कोई सबूत नहीं दिए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम समर्थक अपने पड़ोसी मुल्क यूक्रेन की सैन्य ताकत घटाने और उसे नाटो में शामिल होने से रोकने के इरादे से बीते 24 फरवरी को उसपर हमला कर दिया था। न्यूज एजेंसी ताश, आरआईए और इंटरफैक्स ने रविवार को रूस में 'एक सक्षम निकाय के प्रतिनिधि' के हवाले से कहा है कि यूक्रेन तबाह हो चुके चेर्नोबिल न्यूक्लियर पॉवर प्लांट में न्यूक्लियर हथियार विकसित करने के करीब था, जो कि साल 2000 में बंद हो चुका है।

यूक्रेन कह चुका है ऐसे कार्यक्रम छोड़ने की बात
जबकि यूक्रेन की सरकार कह चुकी है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद 1994 में उसने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ दिए हैं, और उसके बाद उसकी परमाणु क्लब में फिर से शामिल होने की कोई योजना नहीं थी। यूक्रेन पर हमला करने से ठीक पहले पुतिन ने भी शिकायत भरे लहजे में कहा था कि यूक्रेन परमाणु हथियार बनाने के लिए सोवियत तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था, और यह एक तरह से रूस पर हमले की तैयारी की तरह था। हालांकि, उन्होंने भी अपने दावे का कोई सबूत नहीं दिया था।

'डर्टी बम' क्या है ?
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक 'डर्टी बम डायनामाइट जैसे विस्फोटकों का रेडियोऐक्टिव पावडर या छर्रों के साथ एक मिश्रण है। जब डायनामाइट या दूसरे विस्फोटकों में विस्फोट होता है तो धमाके की वजह से रेडियोऐक्टिव पदार्थ आसपास के इलाके में पहुंच जाते हैं।' 'डर्टी बम' और 'रेडियोलॉजिकल डिसपर्सल डिवाइस' जैसे नाम अक्सर एक-दूसरे की जगह पर इस्तेमाल होते हैं।

'डर्टी बम' और परमाणु बम एक नहीं हैं
परमाणु बम द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए थे। इसमें परमाणुओं के विभाजन से अत्यधिक ऊर्जा निकलती है, जिससे मशरूम की तरह परमाणु बादल का निर्माण होता है। 'डर्टी बम' पूर्ण रूप से अलग तरीके से काम करता है और परमाणु विस्फोट नहीं कर सकता। एक 'डर्टी बम' में डायनामाइट या दूसरे विस्फोटकों (मौजूदा केस में प्लूटोनियम का दावा) का इस्तेमाल करके रेडियोऐक्टिव धूल, धुएं और बाकी पदार्थों को फैलाया जाता है, जिससे कि रेडियोऐक्टिव प्रदूषण फैल सके।

'डर्टी बम' का मुख्य खतरा क्या है?
'डर्टी बम' का सबसे ज्यादा खतरा इसके विस्फोट से है। इससे गंभीर चोटें लग सकती हैं और संपत्तियों को भारी नुकसान हो सकता है। विस्फोट के बहुत नजदीक रहने वाले लोगों को छोड़कर 'डर्टी बम' में इस्तेमाल हुआ रेडियोऐक्टिव पदार्थ तत्काल इतना रेडियएशन नहीं पैदा करता, जिससे फौरन गंभीर बीमारी का खतरा हो। लेकिन, इसका धुआं और धूल दूर तक फैलता है, जो सांस में जाने पर बाद में स्वास्थ्य को बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि, लोग इसे तत्काल ना तो देख सकते हैं, ना ही इसका गंध महसूस होता है और ना ही रेडिएशन का स्वाद पता चलता है।












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