चीन का न्यूक्लियर सुपरकैरियर क्या है, जिसे कहा जा रहा 'तैरने वाला परमाणु बम', भारत की सुस्त रफ्तार
भारत के पास फिलहाल 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि चीन के पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। लेकिन, चीन 2030 तक 2 कैरियर और तैयार कर लेगा। लेकिन, भारत में एक और एयरक्राफ्ट बनना चाहिए या नहीं, इसपर एकमत नहीं है।

China's nuclear supercarrier: दो साल पहले अमेरिका की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि चीन की नेवी ने करीब करीब अमेरिका की नेवी को पीछे छोड़ दिया है।
और पिछले साल चीन की नेवी में फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हुआ था, जो काफी ज्यादा शक्तिशाली है। लिहाजा, अब चीन ने न्यूक्लियर कैरियर सुपरकैरियर कंसेप्ट पर काम करना शुरू कर दिया है।
इस महीने, द वारज़ोन की एक रिपोर्ट में बताया गया है, कि कि चीन के जियांगन शिपयार्ड ने यूएस गेराल्ड फोर्ड क्लास और फ्रांस के नेक्स्ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट कैरियर के समान परमाणु-संचालित सुपरकैरियर बनाने के लिए कंसेप्ट तैयार कर लिया है।
आनि, अमेरिका और फ्रांस के बाद चीन तीसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास न्यूक्लियर सुपरकैरियर होगा। यानि, चीन की समुद्री सेना की शक्ति में असीमित विकास और भारत के लिए एक बहुत बड़ा खतरा।
द वारज़ोन की रिपोर्ट में चीन के न्यूक्लियर सुपरकैरियर को लेकर कई खुलासे किए गये हैं, जिससे एक संकेत मिलता है, कि चीन का न्यूक्लियर सुपरकैरियर कैसा होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसके डिजाइन में कैटापल्ट-असिस्टेड टेकऑफ़ बट अरेस्टेड रिकवरी (CATOBAR) कॉन्फ़िगरेशन है। वहीं, इसका आर्टवर्क डेक पर FC-31 के समान कई स्टील्थ विमान को रखने का विकल्प देती है, जिससे ये संकेत मिलता है, कि फाइटर जेट्स, इस न्यूक्लियर कैरियर के एयर विंग की रीढ़ बन सकता है।
चीन धीरे-धीरे अपने न्यूक्लियर कैरियर कार्यक्रम की ओर बढ़ रहा है और इसके लिए फिलहाल न्यूक्लियर कैरियर प्रोग्राम पर काम कर रहा है।

चीन की नौसेना शक्ति में विशालकाय इजाफा
साल 2017 की सेंटर ऑफ स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज कमेंट्री में कहा गया था, कि लिओनिंग और शेडोंग दोनों के पास छोटे लड़ाकू विंग्स हैं। लिओनिंग के लिए सिर्फ 18-24 जे -15 फाइटर्स को रखने की जगह है, तो शेडोंग के पास चार जेट रखने की जगह हैं।
लिहाजा, ये दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन को इस कनफ्यूजन में डालता है, कि इनके जरिए चीन आक्रामक रवैया अपनाए, या फिर इन्हें अपने डिफेंस के लिए काम में ले।
वहीं, एशिया टाइम्स ने पिछले साल अगस्त में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था, कि चीन के इन दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर्स से चीन की डिफेंस के ऊपर एक सीमा रेखा लगती है।
लिहाजा, युद्ध की स्थिति में चीन इस दुविधा में होगा, कि इन दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर को हमला करने के लिए भेजा जाए, या उन्हें देश के डिफेंस के लिए बचाकर रखा जाए। अगर इन दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर पर क्षमता के हिसाब से फाइटर जेट्स भर दिए जाते हैं, तो इनका ऑपरेशनल पावर कम हो जाएगा।
हालांकि, चीन ने पिछले साल जिस फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को पानी में उतारा है, वो चीन की नौसैन्य क्षमता को काफी बढ़ा देता है, क्योंकि फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर पर एक साथ 50 से 70 फाइटर जेट्स को रखने और उन्हें ऑपरेशन में लगाने की क्षमता है।

फ़ुज़ियान एयरक्राफ्ट है काफी शक्तिशाली
फ़ुज़ियान एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम (EMALS) के संस्करण से भी लैस है, जो विमान को लॉन्च करने के लिए शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट का इस्तेमाल करने की इजाजत देता है। जिससे अतिरिक्त और भारी प्रकार के विमानों को तेज़ी से लॉन्च किया जा सकता है।
फ़ुज़ियान एयरक्राफ्ट कैरियर पर चीन ने अपने एडवांस J-15Bs, J-20 और FC-31 फाइटर जेट्स के नौसैनिक वेरिएंट्स को तैनात किया है। वहीं, J-600 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AWACS) विमान और ड्रोन भी इसपर शामिल किए जा सकते हैं।
एशिया टाइम्स ने बताया है, कि चीन फ़ुज़ियान पर FC-31 स्टील्थ फाइटर और FH-97A लॉयल विंगमैन ड्रोन तैनात करने की तैयारी कर सकता है। FC-31 स्टील्थ फाइटर का एयरक्राफ्ट वर्जन का नाम J-35 रखा गया है, जो पानी में रहकर चीन के हवाई हमले की क्षमता को असीमित स्तर तक बढ़ाता है।

परमाणु क्षमता वाला चौथा एयरक्राफ्ट
चीन के पास फिलहाल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि भारत के पास फिलहाल 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। वहीं, अमेरिका के 12 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।
वहीं, एशिया टाइम्स ने पिछले साल अक्टूबर में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था, कि चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर न्यूक्लियर एनर्जी से संचालित होगा। और चीन राज्य जहाज निर्माण निगम (सीएसएससी) फरवरी 2018 से परमाणु-संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर की डिजाइन विकसित कर रहा है।
चीन उम्मीद कर रहा है, कि परमाणु क्षमता से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर की टेक्नोलॉजी 2027 तक बना ली जाएगी।
हालाँकि, इस वक्त चीन की न्यूक्लियर प्रपल्शन टेक्नोलॉजी, अमेरिका से काफी पीछे है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) ने पिछले जून के एक लेख में लिखा है, कि सुरक्षा और वैज्ञानिक कारणों से परमाणु-संचालित सुपरकैरियर विकसित करने में जल्दबाजी नहीं की जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन का लिंगलोंग वन छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर, जिसे इसका सबसे एडवांस मॉडल माना जाता है, उसे हर दो या तीन साल में एक बार फिर से ईंधन भरने की जरूरत होती है, जबकि फोर्ड-श्रेणी के एयरक्राफ्ट कैरियर, जो न्यूक्लियर ऊर्जा से संचालित होंगे, वो कम से कम 25 सालों तक ऐसे ही काम कर सकता है।
माना जा रहा है, कि एयरक्राफ्ट कैरियर के सामरिक महत्व को देखते हुए, तीन कम से कम 6 एयरक्राफ्ट कैरियर्स के निर्माण का लक्ष्य रख सकता है और 3-3 बेड़े के दो-दो एयरक्राफ्ट का एक साथ संचालन कर सकता है।
यानि, अगर 6 एयरक्राफ्ट होते हैं, तो किसी भी परिस्थिति में चीन के पास हमेशा विकल्प के तौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात होगा।
इसे इस तरह से समझिए, कि अगर युद्ध के समय किसी एयरक्राफ्ट कैरियर पर बम गिर जाता है, तो फिर चीन उसे फौरन बदल सकता है।

दुनिया की सबसे शक्तिशाली नेवी का निर्माण
एशिया टाइम्स की फरवरी महीने की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन में बड़े पैमाने पर जहाज निर्माण उत्पादन दर और युद्धपोत डिजाइन प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए पिछले महीने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर ध्यान दिया गया है।
साल 2022 तक, चीन की PLA-Navy, 340 जहाजों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी थी और इसकी तुलना में अमेरिकी नौसेना के पास सिर्फ 280 जहाज हैं। चीन के पास 13 नौसैनिक शिपयार्ड भी हैं, जिनमें प्रत्येक सुविधा की क्षमता सभी सात अमेरिकी नौसैनिक शिपयार्डों की संयुक्त क्षमता से ज्यादा है।

भारत बनाम चीन की नौसेना
वहीं, अगर भारत से तुलना की जाए, तो चीन जहां हर साल अपनी नौसेना में 14 नये युद्धपोत को शामिल कर रहा है, वहीं भारतीय नौसेना में हर साल 4 युद्धपोत शामिल होते हैं।
इसके साथ ही, चीन की कोशिश पाकिस्तान की नौसेना को भी मजबूत करने की है और चीन का लक्ष्य साल 2030 तक पाकिस्तान की नौसेना की ताकत 50 प्रतिशत तक का इजाफा करना है, ताकि वो हिन्द महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में वर्चस्व जमाने की जंग में उतर सके।
वहीं, भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 200 युद्धपोत का बेड़ा बनाने का है, लेकिन भारत की रफ्तार इतनी कम है, कि अगर 2030 तक 160 जंगी जहाज ही बन जाएं, तो ये एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के 200 जंगी जहाजों का लक्ष्य 2032 के बाद ही पूरा हो पाएगा, जबकि चीन के पास 2030 तक दो और एयरक्राफ्ट कैरियर हो जाएंगे। यानि, 2030 तक चीन के पास 5, जबकि भारत के पास 2 ही एयरक्राफ्ट कैरियर होंगे।
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