तालिबान को पीछे धकेलने का अफ़ग़ान सरकार का 'प्लैन बी' क्या है?

अशरफ़ ग़नी
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तालिबान ने पिछले एक हफ़्ते में अफ़ग़ानिस्तान की 9 प्रांतीय राजधानियों को अपने कब्ज़े में ले लिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट में बताया गया है कि 90 दिनों के भीतर तालिबान काबुल को अपने नियंत्रण में ले सकता है.

क्या तालिबान ऐसे ही आगे बढ़ता रहेगा और अफ़ग़ान सरकार तमाशबीन बनी रहेगी? क्या अफ़ग़ानिस्तान में अशरफ़ ग़नी सरकार को जाना होगा?

क़तर के न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा से अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्री ने कहा है कि तालिबान को हराने के लिए उनकी सरकार प्लैन बी पर काम कर रही है. अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्री जनरल अब्दुल सत्तार मिर्ज़ाक्वल ने बुधवार को अल-जज़ीरा को दिए ख़ास इंटरव्यू में कहा कि तालिबान को पीछे धकेलने के लिए तीन स्तरीय योजना के तहत स्थानीय समूहों को हथियारबंद किया जा रहा है.

सत्तार ने कहा कि अफ़ग़ान बल अहम हाइवे को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. इसके अलावा बड़े शहरों और बॉर्डर क्रॉसिंग को बचाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. मिर्ज़ाक्वल के पास एक लाख 30 हज़ार पुलिस बलों की कमान है. उन्हें पाँच दिन पहले ही गृह मंत्रालय की कमान मिली है. मिर्ज़ाक्वल ने कहा कि सरकार स्थानीय लोगों को तैयार कर रही है.

मिर्ज़ाक्वल ने अल-जज़ीरा से कहा, ''हमलोग त्रिस्तरीय योजना पर काम कर रहे हैं. पहला यह कि हमारे सैनिकों को पीछे नहीं हटना पड़े. दूसरा ये कि अपने सुरक्षाबलों को फिर से जुटाया जाए और शहरों की सुरक्षा कड़ी की जाए. जिन्होंने भी सेना की नौकरी छोड़ दी है, उन्हें हम फिर से लाने की कोशिश कर रहे हैं. तीसरी योजना है कि हमला किया जाए. अभी हम दूसरे चरण की योजना पर काम कर रहे हैं.''

पिछले तीन महीनों में तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में अपना नियंत्रण दोगुने से ज़्यादा कर लिया है. बीते हफ़्ते से तालिबान ने प्रांतीय राजधानियों पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था.

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तालिबान से हार क्यों?

मिर्ज़ाक्वल ने कहा, ''सरकारी बलों की हार इसलिए हो रही है क्योंकि रोड और हाइवे पर तालिबान का नियंत्रण हो गया है. दुर्भाग्य से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से देश के 400 हिस्सों में जंग छिड़ गई. हमारे पास वायु सेना का बहुत सीमित सपोर्ट है. हेलिकॉप्टर आपूर्ति पहुँचाने के साथ मृतकों और घायलों को निकालने में व्यस्त हैं. हमारी सरकार स्थानीय नेताओं को नई भर्तियां और लोगों को हथियारबंद करने का अधिकार दे रही है ताकि तालिबान से लड़ा जा सके.''

मिर्ज़ाक्वल ने कहा, ''इन लोगों ने हमें पूरा समर्थन देने का वादा किया है. ये अफ़ग़ान बलों के साथ तालिबान का मुक़ाबला करेंगे. इन बलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं हैं, लेकिन सभी को आख़िरकार अफ़ग़ान बलों में शामिल कर लिया जाएगा.''

हाल के महीनों में अफ़ग़ान सेना के कई अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. लेकिन सरकार का कहना है कि सभी वापस आ रहे हैं और फिर से उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है. अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा की थी और उसके बाद ही तालिबान ने हमले बढ़ा दिए हैं.

मिर्ज़ाक्वल ने कहा, ''मैं तालिबान से अपील करता हूँ कि वो क्रूरता बंद करे. हत्याएं बंद करे. हमें आपस में प्यार से बात कर समाधान की ओर बढ़ना चाहिए. मैं उनसे कहता हूँ कि वे आएं और साथ में मिलकर बात करें और एक गठबंधन सरकार बनाएं. यह सभी के हक़ में है.''

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से तालिबान ने क्या कहा?

समचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इमरान ख़ान ने तालिबान के हवाले से कहा है कि जब तक अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता में अशरफ़ ग़नी रहेंगे तब तक तालिबान सरकार से बात करने के लिए तैयार नहीं है.

इमरान ख़ान ने विदेशी पत्रकारों से कहा कि अभी जो अफ़ग़ानिस्तान के हालात हैं, उसमें किसी राजनीतिक समाधान की उम्मीद कम ही है. इमरान ख़ान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार चाहती है अमेरिका कुछ करे, लेकिन अमेरिका 20 सालों में कुछ नहीं कर पाया तो अब क्या कर लेगा.

तालिबान के बढ़ते प्रभाव को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने बुधवार को कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में जो भी शामिल हैं, वे सकारात्मक कोशिश करें न कि अपनी नाकामी के लिए पाकिस्तान पर इल्ज़ाम लगाएं.

पाकिस्तानी सेना ने क़मर जावेद बाजवा के हवाले से कहा है, ''अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों को सकारात्मक भूमिका अदा करने की ज़रूरत है. ये सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है. किसी भी तरह की ग़लतफ़हमी से शांति प्रक्रिया कमज़ोर होगी.''

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65 फ़ीसदी हिस्से तालिबान के नियंत्रण में?

ईयू के एक सीनियर अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि तालिबान के नियंत्रण में 65 फ़ीसदी अफ़ग़ानिस्तान है और 11 प्रांतीय राजधानियों को अपने नियंत्रण में ले चुका है या ये राजधानियाँ नियंत्रण में आने वाली हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से सत्ता पर नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है.

31 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का सैन्य मिशन 20 सालों बाद पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा. बुधवार को तालिबान ने उत्तर-पूर्वी प्रांत बदख़्शां प्रांत की राजधानी फ़ैज़ाबाद को अपने कब्ज़े में लिया. दुनिया भर में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के अफ़ग़ानिस्तान से सेना वापसी के फ़ैसले की आलोचना हो रही है लेकिन बाइडन ने इन आलोचनाओं को ख़ारिज कर दिया है.

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मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उन्हें सेना वापसी के फ़ैसले पर कोई अफ़सोस नहीं है. बाइडन ने कहा था कि अफ़ग़ान नेताओं को एकजुट होकर अपने मुल्क के लिए ख़ुद ही लड़ना होगा.

अफ़ग़ानिस्तान की टोलो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार पहली बार तालिबान ने सेना के एक ठिकाने को अपने नियंत्रण में ले लिया है. सोशल मीडिया पर कई वीडियो फ़ुटेज शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें दिख रहा है कि कुंदुज़ में सुरक्षा बलों के दर्जनों सदस्य तालिबान के सामने सरेंडर कर रहे हैं. टोलो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान ने सेना के एक हेलिकॉप्टर को भी अपने नियंत्रण में लिया है. हालांकि कहा जा रहा है कि हेलिकॉप्टर सर्विस में नहीं है.

नौ प्रांतीय राजधानियों पर तालिबान के कब्ज़े के बाद अफ़ग़ानिस्तान ने सुरक्षा बलों के नेतृत्व में बदलाव भी किए हैं. सेना प्रमुख जनरल वली मोहम्मद अहमदज़ई को हटा दिया गया है. वो इसी जून महीने से सेना की कमान संभाल रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बीते एक महीने में अफ़गानिस्तान में एक हज़ार से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं.

इस बीच क़तर में आज अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए एक अहम बैठक भी हो रही है जिसमें भारत भी शामिल हो सकता है.

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