इमरान खान की प्रधानमंत्री पद से विदाई... शरीफ ब्रदर्श की वापसी, जानिए भारत के लिए क्या हैं मायने?
अविश्वास प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की वजह से पिछले एक हफ्ते में चरम पर पहुंची पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल अब समाप्ति की तरफ बढ़ गई है और इमरान सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया गया है।
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, अप्रैल 10: पाकिस्तान को विश्वकप में जीत दिलाने वाले पूर्व क्रिकेटर इमरान खान अब पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम नहीं रहे और 9 अप्रैल को पूरे दिन और देर रात तक चली नेशनल असेंबली की कार्यवाही के बाद इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव हार गये और प्रधानमंत्री पद से उनकी विदाई हो गई। पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री अब शहबाज शरीफ होंगे। लेकिन, इमरान खान का जाना... और शहबाज शरीफ का आना... भारत के लिए क्या मायने रखता है?

इमरान खान की विदाई
अविश्वास प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की वजह से पिछले एक हफ्ते में चरम पर पहुंची पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल अब समाप्ति की तरफ बढ़ गई है इमरान सरकार सत्ता से बाहर कर दी गई है और पाकिस्तान की तमाम विपक्षी पार्टियों ने एक साथ मिलकर नई सरकार बनाने का ऐलान किया है, जिसके मुखिया शहबाज शरीफ होंगे। ये भी काफी दिलचस्प है, कि 10 अप्रैल, 1973 को पाकिस्तान की संसद ने उसके संविधान को मंजूरी दी थी और 10 अप्रैल को ही, पाकिस्तान की संसद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को पारित किया, जिसमें 342 सदस्यों वाले सदन में 174 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसका मतलब यह हुआ कि इमरान खान अब पाकिस्तान के पीएम नहीं हैं।

लोकतंत्र के लिए मतलब
पाकिस्तान का लोकतंत्र, कई बड़ी खामियों से भरा और आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी एक ‘निर्देशित लोकतंत्र' है। इससे पहले सेना सीधे तौर पर दखल देकर चुनी हुई सरकार को संसद से धक्के मारकर निकालती थी, या फिर प्रधानमंत्री को सूली पर टांग देती थी, जबकि ऐसा पहली बार हुआ है, कि सरकार को गिराने के लिए तमाम विपक्षी पार्टी एक साथ एक मंच पर आ गये और प्रधानमंत्री के खिलाफ वोट किया। हालांकि, भारत के नजरिए से देखें, तो भारतीय लोकतंत्र के लिए ये काफी सामान्य घटना है और भारत में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकारें गिरती रही हैं, लेकिन पाकिस्तान के लिए ये एक असामान्य घटना है और इसका मतलब यह हो सकता है, कि पाकिस्तान में लोकतंत्र धीरे-धीरे अपने पैर जमा रहा है और सरकार को गिराने के लिए संसद अपने नियमों के मुताबिक काम कर रहा है, जिसमें सीधे तौर पर सेना शामिल होती दिखाई नहीं दे रही है।
Recommended Video

इमरान खान शासन का अंत
इमरान खान का राजनीतिक पतन भी उनके ऊभार की तरह की शानदार है, क्योंकि जब उन्होंने राजनीति शुरू की थी, तो पाकिस्तान की राजनीति के लिए वो एक ‘अज्ञात' व्यक्ति थे और मुख्यधारा की राजनीति और मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से उनका कोई वास्ता नहीं था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के लिए एक बेहतरीन विपक्ष की भूमिका निभाई। सरकार को घेरा और सबसे खास बात ये थी, कि उन्होंने उन मुद्दों को उठाया, जिन्हें उठाने से पारंपरिक पार्टियां और नेता परहेज करते थे। जैसे अमेरिकी ड्रोन हमला... बलोचिस्तान में सेना की बर्बर कार्रवाइयां। बलोचिस्तानी लोगों के खिलाफ सेना की कार्रवाई का सिर्फ इमरान खान ने ही विरोध किया और कद बढ़ने के साथ उन्होंने जनता से बड़े बड़े वादे करने शुरू किए और फिर सेना का साथ मिलते ही सबसे पहले बलोचिस्तान के मुद्दे को भूल गये। जो वादे उन्होंने किए...उन्हें निभाया नहीं। हर गुजरते दिन के साथ इमरान खान अपनी प्रसिद्धि खोते रहे, जिसे बचाने के लिए उन्होंने वही मजहबी राजनीति शुरू कर दी, जिसकी उम्मीद कम से कम इमरान खान से नहीं थी।

क्या सेना वाकई न्यूट्रल है?
पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक संकट को लेकर सेना ने बयान जारी किया और कहा, कि सेना को राजनीति से दूर रखा जाए और सेना तटस्थ रहेगी। लेकिन, क्या वाकई ऐसा है? जैसा कि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों का आरोप रहा है, और जैसा की पाकिस्तान के कई पत्रकार मानते हैं, कि पाकिस्तानी सेना ने ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने के लिए इमरान खान को "चयनित" किया था। लेकिन, जैसे ही वह अलोकप्रिय हुए और सेना के लिए ही ‘बोझ' बनने लगे, सेना ने उन्हें सर से उतार फेंका। इसका मतलब है कि कोई भी राजनीतिक नेता पाकिस्तानी सेना के समर्थन के बिना जीवित नहीं रह सकता है। इमरान खान अलोकप्रिय हुए, तो उन्होंने सेना पर भी सवाल उठाने शुरू किए, खासकर इमरान की विदेश नीति और सेना की विदेश नीति में आकाश-पाताल का अंतर है। पाकिस्तानी सेना को ‘भोजन' अभी भी अमेरिका से ही मिलता है, जबकि इमरान ने पाकिस्तान को ही ‘एंटी अमेरिका' बना दिया। यानि, अगला प्रधानमंत्री भी जो बनेगा, वो भी सेना के निर्देश में ही काम करेगा, लिहाजा राजनीतिक तौर पर भारत के लिए स्थिति उसी तरह की रहने वाली है!

भारतीय फैक्टर
पाकिस्तान की राजनीति में भारत... और भारत की राजनीति में पाकिस्तान... दोनों ही हमेशा महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। लेकिन, इस बार कुछ अलग हुआ। ऐसा पहली बार हुआ, कि पाकिस्तान की राजनीतिक संकट में भारत की जमकर तारीफें की गईं हैं। इमरान खान ने विदेश नीति के लिए कई बार भारत की प्रशंसा की, और उन्होंने पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति के ‘अयोग्य संचालन' के लिए पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाया। कहा जाता है कि इसने रावलपिंडी को पहले से कहीं ज्यादा परेशान कर दिया था। अगर इमरान खान ने पाकिस्तान की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा किया और उसे ‘गुलाम' बताया, तो उनका हमला सीधा सेना पर था और अब लेना के लिए भी जनता को जवाब देना आसान नहीं होगा।

शरीफ परिवार की वापसी
करीब चार साल पहले नवाज शरीफ चुनाव हार गए थे और नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे थे। लेकिन अब, इमरान खान को सत्ता से बाहर कर नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने दिखा दिया है, कि उनके पास अभी भी खेल में वापस आने के लिए कई कार्ड हैं। वह इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के प्रमुख प्रस्तावक थे, और उन्होंने पाकिस्तानी सेना से समर्थन प्राप्त करने के लिए अपने तरीके से काम किया है। नवाज़ शरीफ़ अभी भी लंदन में हैं, लेकिन उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ ने अपने भाषण के दौरान उन्हें कई बार याद किया। जब अविश्वास प्रस्ताव द्वारा इमरान ख़ान को अपदस्थ कर दिया गया था, उस वक्त भी शहबाज ने अपने भाई को याद किया। नवाज शरीफ हमेशा से भारत के साथ संबंध सुधारने को लेकर काफी सकारात्मक रहे हैं, लेकिन इमरान खान के बयानों के कारण यह मुश्किल हो सकता है। जब नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे, उस वक्त कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था, कि अगर उन्हें सेना का साथ मिला होता, तो भारत-पाकिस्तान में कश्मीर समझौते का हल हो गया होता, लेकिन सेना का साथ उन्हें नहीं मिला।
-
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Monalisa Caste: मुस्लिम मर्द से शादी करने वाली मोनालिसा की क्या है जाति? क्या कर लिया धर्म परिवर्तन? -
IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी रद्द, BCCI ने अचानक ले लिया बड़ा फैसला, मैच पर भी मंडराए संकट के बादल? -
Iran US War: ईरान ने खाक किए अमेरिकी बेस, बताया अब किसकी बारी? खौफनाक दावे से मचा हड़कंप -
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, ईरान जंग के बीच इस कंपनी ने बढ़ाई कीमतें, ये है रेट -
Energy Lockdown: एनर्जी लॉकडाउन क्या है? कब लगाया जाता है? आम पब्लिक पर कितना असर? हर सवाल का जवाब -
LPG Price Today: क्या राम नवमी पर बढ़ गए सिलेंडर के दाम? आपके शहर में आज क्या है रेट? -
Fact Check: क्या सच में देश में लगने वाला है Lockdown? क्या है वायरल दावों का सच? -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी होने लगा महंगा, गोल्ड 6000 और सिल्वर के 10,000 बढ़े भाव, अब ये है रेट












Click it and Unblock the Notifications