क़तर में वर्ल्ड कप के दौरान अरब और इस्लाम को लेकर क्या हुआ?

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क़तर में आयोजित फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप अर्जेंटीना की जीत के साथ ही ख़त्म हो गया. अर्जेंटीना तीसरी बार चैम्पियन बना और लियोनेल मेसी की सबसे बड़ी भूमिका रही.

अर्जेंटीना ने इससे पहले 1978 और 1986 में फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप जीता था. इस बार का वर्ल्ड कप जैसा हुआ, वैसा पहले कभी नहीं हुआ, ऐसा जानकार मानते हैं.

यह पहली बार था कि वर्ल्ड कप का आयोजन एक मुस्लिम देश में हुआ. क़तर ने इस आयोजन को अरब और इस्लामिक टच देने के लिए लंबा सफ़र तय किया. क़तर ने फ़ीफ़ा के आयोजन के लिए 220 अरब डॉलर का निवेश किया था.

अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी जब वर्ल्ड कप उठाने जा रहे थे तभी क़तर के शासक शेख़ तामिन बिन हमाद अल-थानी ने उनके कंधे पर एक ब्लैक कपड़ा डाल दिया. यह अरब के पुरुषों का पारंपरिक चोगा होता है.

इस चोगे से मेसी की शर्ट ढँक गई थी. यहाँ तक कि उनका नेशनल बैज भी ढँक गया था. इस दौरान फ़ीफ़ा प्रमुख मुस्कुराते दिखाई दिए. अरब के लोग इस परंपरा के सम्मान के लिए तारीफ़ कर रहे हैं, लेकिन पश्चिम के ट्विटर यूज़र्स इसकी आलोचना कर रहे हैं.

अर्जेंटीना के पूर्व फ़ुटबॉल प्लेयर पाब्लो ज़ाबलेटा ने पूछा है, ''यह चोगा क्यों? इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी.''

20 नवंबर को क़तर में फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का आग़ाज़ हुआ तो एक महिला सिंगर पारंपरिक बुर्क़े में थीं. इस तरह से चेहरा ढँकना यूरोप के कई देशों में प्रतिबंधित है.

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इस्लामिक टच

इसके अलावा कु़रान की एक आयत भी पढ़ी गई थी. सोशल मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो क़तर के कुछ होटल में विज़िटर्स को इस्लाम के बारे में समझ बढ़ाने के लिए क्यूआर कोड की पेशकश की गई. इसके अलावा मुस्लिम वॉलन्टियर्स विज़िटर्स को इस्लामिक फ़ैशन के बारे में बताते दिखे.

अमेरिकी केबल न्यूज़ चैनल सीएनएन ने क़तर में वर्ल्ड कप आयोजन और उससे जुड़े इन्फ़्रास्ट्रक्चर को देखने वाली सुप्रीम कमिटी फ़ीफ़ा को इस्लामिक टच देने को लेकर सवाल पूछा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला था. लेकिन इस सवाल से पहले सीएनएन को क़तर की सुप्रीम कमिटी ने एक बयान दिया था.

इस बयान में कहा था, ''हम समावेशी और भेदभाव मुक्त वर्ल्ड कप के लिए प्रतिबद्ध हैं. सभी का क़तर में स्वागत है, लेकिन हम एक रूढ़िवादी मुल्क हैं और यहाँ सार्वजनिक रूप से प्यार-मोहब्बत से जुड़ी गतिविधियां नहीं कर सकते हैं. हम लोगों से कह रहे हैं कि हमारी संस्कृति का सम्मान करें.''

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क़तर में फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप कवर करने आए पश्चिम के पत्रकारों पर यह आरोप लगा कि वे अरब और मुसलमानों के बारे में पूर्वाग्रह फैला रहे हैं.

टाइम्स ऑफ़ लंदन ने एक फ़ोटो के कैप्शन में लिखा था कि क़तर के लोग महिलाओं को वेस्टर्न ड्रेस में देखने के अभ्यस्त नहीं हैं. सोशल मीडिया में इसे लेकर विवाद हुआ तो यह कैप्शन डिलीट करना पड़ा.

क़तर की 29 लाख की आबादी में क़रीब 87 फ़ीसदी प्रवासी हैं और इनमें से बड़ी संख्या में लोग पश्चिमी देशों के हैं.

क़तर में फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के आयोजन को लेकर पश्चिमी मीडिया में जो आलोचना हो रही थी, उसे फ़ीफ़ा चीफ़ ज्यानी इन्फ़ैंटीनो ने ख़ारिज कर दिया था और उन्होंने क़तर से सहानुभूति जताई थी.

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फ़ीफ़ा चीफ़ ने क्या कहा

फ़ीफ़ा चीफ़ ने क़तर में वर्ल्ड कप के उद्घाटन से पहले कहा था, ''आज लग रहा है कि मैं क़तर का हूँ. आज मैं ख़ुद को अरब का पा रहा हूँ. आज मैं ख़ुद को अफ़्रीकी के रूप में देख रहा हूँ. आज मैं ख़ुद को गे महसूस कर रहा हूँ. आज मैं ख़ुद को विकलांग की तरह महसूस कर रहा हूँ. आज मैं ख़ुद को प्रवासी वर्कर के रूप में देख रहा हूँ. पश्चिम अपने पाखंडों से घिरा हुआ है और दूसरों को नैतिकता का संदेश दे रहा है.''

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, वर्ल्ड कप के दौरान बाहर से आए फ़ुटबॉल प्रेमियों को क़तर इस्लाम के बारे में बताने के लिए बेक़रार दिखा. इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने वर्ल्ड कप में आए मेहमानों के लिए कटारा क्लचरल विलेज मस्जिद में एक पूरा पविलियन बनाकर रखा था.

इस पविलियन में इस्लामिक चिह्न 30 भाषाओं में थे. इसके अलावा बुकलेट्स और क़ुरान भी मेहमानों के बीच बाँटे जा रहे थे. जो बसें वर्ल्ड कप के स्टेडियम तक जा रही थीं, उनमें क्यूआर कोड थे और उन्हें स्कैन करने के बाद क़ुरान और इस्लाम के बारे में पढ़ा जा सकता था.

तुर्की की न्यूज़ एजेंसी अनादोलु ने लिखा है कि क़तर की राजधानी दोहा स्थित कटारा कल्चरल विलेज मॉस्क़ आकर्षण का केंद्र रहा. ख़ास कर उनके लिए जो इस्लाम को जानना और समझना चाहते हैं. अनादोलु ने लिखा है कि यहाँ कई भाषा जानने वाले पुरुष और महिला थे जो पर्यटकों को बता रहे थे कि इस्लाम एक सहिष्णु मज़हब है.

https://twitter.com/RazShechnik/status/1596439101318004736

क़तर में इसराइल को लेकर भी हुआ विवाद

पिछले महीने फ़ीफ़ा ने घोषणा की थी कि 2022 के वर्ल्ड कप के दौरान इसराइल के तेल अवीव से दोहा के लिए सीधे फ्लाइट आएगी. यह व्यवस्था इसराइली और फ़लस्तीनी प्रशंसकों के लिए की गई थी.

क़तर और इसराइल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है और दोनों देशों के बीच कभी भी हवाई सेवा नहीं रही है. इसराइल इस वर्ल्ड कप के दौरान दोहा और तेल अवीव के बीच उड़ान शुरू होने को लेकर काफ़ी उत्साहित था.

इसराइल के विदेश मंत्रालय ने इसे ऐतिहासिक बताया था. कई लोगों ने इसे इस रूप में भी देखा कि अरब वर्ल्ड इसराइल को स्वीकार करने की ओर बढ़ रहा है.

लेकिन इसराइल के इस उत्साह को अरब के फ़ुटबॉल प्रेमियों ने बहुत लंबे समय तक ज़िंदा नहीं रहने दिया. टूर्नामेंट कवर करने आए इसराइली मीडिया का अरब देशों के फ़ुटबॉल प्रेमियों ने बहिष्कार करना शुरू कर दिया.

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https://twitter.com/HananyaNaftali/status/1597149308432035841

फ़लस्तीनियों के लिए समर्थन

दूसरी तरफ़ क़तर की सार्वजनिक जगहों पर फ़लस्तीनियों के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे. स्टेडियम के बाहर इसराइली पत्रकारों के सामने फ़लस्तीन के समर्थन में नारे लगाए गए और फ़लस्तीनी प्रशासन के झंडे भी लहराए गए.

इराक़ और अरब वर्ल्ड को कवर करने वाले अमवाज मीडिया ने लिखा है, ''फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में फ़लस्तीनियों के समर्थन में जो सेंटिमेंट दिखा, वह पर्यवेक्षकों के लिए हैरान करने वाला है. यह इसराइल और अमेरिका के लिए भी हैरान करने वाला रहा.

कई लोग अब्राहम एकॉर्ड्स की सीमा को समझने में नाकाम रहे थे. कहा जा रहा था कि अरब में इसराइल की स्वीकार्यता बढ़ रही है, लेकिन फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में अरब देशों के आम लोगों के बीच बिल्कुल उलट स्थिति थी.''

2020 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मदद से इसराइल ने बहरीन, मोरक्को, सूडान और यूएई के साथ औपचारिक रिश्ता कायम करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया था.

अमवाज मीडिया ने लिखा है कि इन चारों देशों ने सरकार के स्तर पर इसराइल से औपचारिक रिश्ते भले कायम कर लिए हैं, लेकिन वहाँ के आम लोगों की प्रतिक्रिया कुछ और ही है. अरब के बाक़ी देशों में भी इसराइल को लेकर नाराज़गी कम नहीं हुई है.

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अरब के आम लोग नाराज़

अमवाज मीडिया ने लिखा है, ''इसराइल अरब की सरकारों के साथ शांति कायम कर रहा है, यह अलग चीज़ है, लेकिन अरब के आम लोगों के बीच इसराइल को लेकर क्या राय है, यह दूसरी बात है. यह बात स्पष्ट हो गई है कि अरब के जिन देशों ने इसराइल से रिश्ते सामान्य किए हैं, उससे वहाँ के आम लोग सहमत नहीं हैं.''

पूरे मामले पर अमवाज मीडिया से यूनिवर्सिटी ऑफ़ डेनवर में सेंटर फ़ॉर मिडिल ईस्ट स्टडीज़ के निदेशक डॉक्टर नादेर हाशमी ने कहा है, ''वर्ल्ड कप में अरब के लोगों और खिलाड़ियों के बीच फ़लस्तीनियों के प्रति सहानुभूति बताती है कि अरब की सरकारों और आम लोगों के बीच इसराइल को लेकर अलग-अलग राय है.

अब्राहम एकॉर्ड्स आम लोगों के बीच बुरी तरह से अलोकप्रिय हो रहा है. अरब देशों में जैसे-जैसे खुलापन बढ़ेगा और लोकतंत्र आएगा वैसे-वैसे अब्राहम अकॉर्ड्स और कमज़ोर पड़ेगा. अरब के आम लोग चाहते हैं कि फ़लस्तीनियों को बराबर का हक़ मिले.''

मध्य-पूर्व के मीडिया में कहा जा रहा है कि क़तर में वर्ल्ड कप का आयोजन अरब के प्रशंसकों के लिए मौक़ा था कि वे इसराइल से रिश्ते सामान्य करने के मामले में खुलकर बोलें. फ़लस्तीनियों की तरह अरब के बाक़ी देशों के लोगों को इसराइलियों से आमना-सामना नहीं होता है.

ऐसे में वर्ल्ड कप उनके लिए एक मौक़ा था कि इसराइलियों के मुँह पर अपना विरोध दर्ज कराएं. अरब के आम लोगों के मन में यह बात भी थी कि अगर वे ऐसा करेंगे तो ग्लोबल मीडिया के ज़रिए पूरी दुनिया को अपना विरोध बता पाएंगे.

अरब न्यूज़ ने लिखा है कि इसराइली मीडिया के सामने अरब के आम लोगों का जवाब काफ़ी वायरल हुआ है. 18 नवंबर का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें क़तर के एक व्यक्ति ने इसराइली टीवी चैनल के रिपोर्टर से बात करने से इनकार कर दिया.

इसके दो दिन बाद एक और वीडियो की चर्चा हुई जिसमें लेबनान के लोगों ने इसराइली पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया. एक व्यक्ति ने चैनल 12 के रिपोर्टर से कहा, ''इसराइल के लिए कोई जगह नहीं है. सारा फ़लस्तीन है.''

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इसराइलियों से नफ़रत?

क़तर में अरब प्रशंसकों के बीच इसराइल का बहिष्कार काफ़ी विवादों में रहा. इसराइल के पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया भी दी. इसराइल के पत्रकार राज़ शेचिंक ने 26 नवंबर को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है.

इस वीडियो में अरब के लोग फ़लस्तीनी झंडा लिए हुए हैं और इसराइली पत्रकार का विरोध कर रहे हैं. इसमें महिला और पुरुष दोनों हैं. लोग कह रहे हैं कि इसराइल कहीं नहीं है, सारा इलाक़ा फ़लस्तीनी है.

इस वीडियो में एक नौजवान पत्रकार से पूछ रहा है, ''आप कहाँ से हैं? पत्रकार ने कहा कि इसराइल से. इतना सुनते ही वह नौजवान फ़लस्तीनी झंडा लिए आगे बढ़ जाता है और कहता है कि मैं इसराइल को देश नहीं मानता हूँ. केवल फ़लस्तीन है.

इसी दौरान बुर्के़ में दो लड़कियां आती हैं और वे भी वही बात दोहराती हैं. फिर मोरक्को के प्रशंसक आते हैं और वे भी इसराइली पत्रकार से बात करने से इनकार कर देते हैं.

मोरक्को के प्रशंसक से इसराइली पत्रकार कहता है कि आपके देश ने तो इसराइल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है. इस पर मोरक्को के प्रशंसक कहते हैं, कोई इसराइल नहीं है. केवल फ़लस्तीन है.''

इसराइली पत्रकार इसी दौरान एक इसराइली नागरिक से बात करता है तभी पीछे से आकर लोग फ़लस्तीन का नारा लगाने लगते हैं. नारे में लोग कहते हैं- कोई इसराइल नहीं है. केवल फ़लस्तीन है.

इसराइल के पत्रकार राज़ शेचिंक ने ट्विटर पर इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है, ''मैं कुछ लिखना नहीं चाहता हूँ. आप ख़ुद ही सुन लीजिए. हम हमेशा एक पत्रकार के रूप में रहते हैं. यह एक खेल का महाआयोजन है, लेकिन यहाँ जो कुछ भी चल रहा है, उसे मैं शेयर नहीं कर सकता. हमलोगों को लेकर यहाँ पर्याप्त नफ़रत है.''

इस वर्ल्ड कप में मोरक्को के सेमीफ़ाइनल में पहुँचने को अरब और इस्लाम के गर्व से जोड़ा गया. इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने मोरक्को बधाई देने के लिए अलग से बयान जारी किया तो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ने मोरक्को टीम को मुस्लिम टीम बताया. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने भी मोरक्को के किंग को फ़ोन कर बधाई दी.


मैच की ख़ास बातें

  • अर्जेंटीना ने फ़ाइनल में फ़्रांस को हराकर फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 जीत लिया.
  • अर्जेंटीना ने तीसरी बार वर्ल्ड कप जीता है. 1978 और 1986 में भी अर्जेंटीना टीम चैम्पियन बनी थी.
  • फ़ाइनल मैच का फ़ैसला पेनल्टी शूट आउट से हुआ और 4-2 से अर्जेंटीना के हक़ में रहा.
  • दूसरे हाफ़ के बाद दोनों टीमें 2-2 और एक्स्ट्रा टाइम के बाद 3-3 से बराबर थीं.
  • अर्जेंटीना के लिए लियोनेल मेसी ने दो और मारिया ने एक गोल किया.
  • फ़्रांस के लिए तीनों गोल किलियन एमबापे ने किए.
  • टूर्नामेंट में आठ गोल करने वाले एमबापे को 'गोल्डन बूट' मिला.
  • सात गोल करने वाले लियोनेल मेसी प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट चुने गए

(कॉपी - रजनीश कुमार)

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