संतोष शाह ने ऐसा क्या पकाया जिसने ब्रिटेन के शो में जीता सबका दिल
संतोष शाह के लिए मास्टरशेफ़ः द प्रोफ़ेशनल्स शो के फ़ाइनल राउंड में पहुंचा एक सपने जैसा है.
इस सप्ताह जब वो अंतिम छह प्रतियोगियों में पहुंच गए तो उन्होंने झुककर जजों का शुक्रिया अदा किया.
नेपाल के रहने वाले संतोष इन दिनों में लंदन में रहते हैं.
पिछले सप्ताह हुए सेमीफ़ाइनल में उन्होंने सेलिब्रिटी शेफ़ एंड्र्यू वांग के लिए खाना बनाया. उन्होंने अपने डिम सम से सबका दिल जीत लिया. इसमें उन्होंने नेपाल के योमारी डंपलिंग्स बनाए जिनमें चॉकलेट, काजू और मिर्ची भरे थे. उन्होंने इस पर संतरे और दालचीनी की परत लगाई थी. उन्होंने जजों के लिए एक दूसरी डिश क्रिस्पी चिली चिकन भी बनाई. इसे उन्होंने भारत और चीन की खाद्य शैली में बनाया जिसे गर्म सूप और क्रिस्पी नूडल के साथ पेश किया.
जज उनके खाने से इतने प्रभावित हुए कि उनकी डिश को दिन का सर्वश्रेष्ठ पकवान घोषित करते हुए उन्हें सीधे फ़ाइनल में भेज दिया.
मास्टरशेफ़ बीबीसी की हिट टीवी सीरीज़ है जिसमें इस साल 32 प्रतियोगी शामिल हुए. मंगलवार को होने जा रहे फ़ाइनल राउंड में छह प्रतियोगी होंगे.
इसके बाद दो और राउंड होंगे जिसमें प्रतियोगियों की रचनात्मकता भी परखी जाएगी. अंतिम मुकबाल गुरुवार को होगा जिसे करोड़ों लोग टीवी पर देखेंगे.
संतोष ने बीबीसी से कहा, 'मैं हमेशा से ही नेपाली खाने को दुनिया के सामने पेश करना चाहता था. इस शो ने मुझे ये मौका दिया है.'
वो नेपाल में एक सेलिब्रिटी भी बन गए हैं. यहां नेशनल मीडिया में उन्हें ख़ूब दिखाया जा रहा है. यहां टीवी शो में उनके साक्षात्कार चलाए जा रहे हैं.
संतोष ऐसे पहले प्रतियोगी नहीं है जिन्होंने ये कहा है कि मास्टरशेफ़ एक बेहद कड़ी प्रतियोगिता है.
वो कहते हैं, 'हमें मानसिक रूप से मज़बूत रहना पड़ता है, समय का ध्यान रखना होता है और हमारे ऊपर बहुत ज़्यादा दबाव होता है. मैं हर डिश की कई बार प्रेक्टिस करता हूं.'
'इसके बाद कैमरा का दबाव होता है और जज भी बहुत ज़्यादा मांगें करते हैं. हर राउंड में शेफ़ बाहर होते हैं और ये प्रतियोगिता और कड़ी होती जाती है.'
मैं ख़तरे उठाता हूं
संतोष नेपाल में भारत की सीमा से लगे इलाक़े में पैदा हुए थे. उनके गांव का नाम कारजन्हा है. सात भाई बहनों में वो सबसे छोटे थे. वो सिर्फ़ पांच साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया.
वो जब दस साल के थे तब से ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था. वो स्थानीय बाज़ारों में प्लास्टिक के थैले बेचा करता थे.
वो बताते हैं, 'मैं अपने दोस्तों के साथ सात किलोमीटर पैदल चलकर जाता था. हम कुछ पाव-रोटी ख़रीदते और फिर उसे बाज़ार में बेचते. मैंने अपने ज़िले में नहर परियोजना में मज़दूर का काम भी किया है.'
संतोष ने दसवीं तक की पढ़ाई की है लेकिन वो परीक्षा पास नहीं कर सके थे.
वो बताते हैं, 'मैं अपने गांव के दोस्तों के साथ भारत के गुजरात राज्य में काम की तलाश में चला गया था. तब मैं पंद्रह साल का था.'

नेपाल से लाखों लोग काम की तलाश में भारत आते हैं. संतोष ने अहमदाबाद के एक रेस्त्रा में बर्तन धोने का काम किया.
इसके बाद वो एक होटल से दूसरे होटल में नौकरी करते रहे. वो हमेशा काम सीखते रहना चाहते थे. उन्होंने अंग्रेज़ी सीखी और होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा लिया. सात साल के भीतर ही वो एक पांच सितारा होटल में एक्ज़ीक्यूटिव शेफ़ के तौर पर काम कर रहे थे.
उन्होंने भारत में एक फुड फेस्टिवल का आयोजन किया जिसने सुर्खियां बटोरी. उनकी कला दुनिया के सामने आ गई. और फिर उन्हें लंदन में रह रहे एक गुजराती कारोबारी का फोन कॉल आया. उन्होंने उन्हें वर्क परमिट भेजा और लंदन आकर काम करने का न्यौता दिया. संतोष साल 2010 में लंदन पहुंच गए.
ये कोई ऐसा ड्रीम रेस्त्रां नहीं था जिसमें काम करने का सपना संतोष देख रहे थे. उन्होंने जल्द ही नौकरी छोड़ दी और फिर डिशूम नाम के एक नया रेस्त्रां के साथ काम करने लगे. बाद में उन्होंने लंदन के ललित होटल और बनारस में भी काम किया.
अपने अब तक के सफर को याद करते हुए संतोष कहते हैं, 'मैं ख़तरे उठाने वाला हूं.' उन्होंने एक बार एक फ्रेंच रेस्त्रां की अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी थी. इस रेस्त्रां को भी एक सेलिब्रिटी शेफ़ ही चला रहे थे. वो कहते हैं, 'यहां सीखने के बहुत मौके थे लेकिन मैं यहां से एक भारतीय रेस्त्रां में चला गया.'
वो इन दिनों सिनामोन कलेक्शन में हेड शेफ़ हैं और सेफरॉन सर्किल यूके में भी एक्ज़ीक्यूटिव शेफ़ हैं.
'मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा'
पैंतीस साल के संतोष ने मास्टरशेफ़ में बहुत लोगों के दिल जीत लिए हैं. वो एक्जॉकिट नेपाली कुज़ीन पेश कर रहे हैं.
वो कहते हैं कि मास्टरशेफ़ ने उनकी ज़िंदगी बदल दी है.
उनकी पीछे की ज़िंदगी को देखते हुए अब उन्होंने जो हासिल किया है उसे ख़ूब सुर्ख़ियां भी मिल रही हैं.
होलीकाऊ फ़ाइन डाइनिंग रेस्त्रां चेन के मालिक और कभी बर्तन धोने का काम करने वाले कुल आचार्य कहते हैं, 'संतोष नेपाली समुदाय के बीच सेलिब्रिटी बन चुके हैं. सिर्फ़ ब्रिटेन में ही नहीं बल्कि नेपाल में भी.'
वो कहते हैं, 'ब्रिटेन में दक्षिण बारतीय समुदाय की अपनी अलग पहचान और प्रतिष्ठा है लेकिन बावजूद इसके किसी नेपाली व्यक्ति का मास्टरशेफ़ में पहुंचना और अपनी जगह बनाना असाधारण है.'
मास्टरशेफ़ शो कॉपीराइट कारणों की वजह से सीधे तौर पर नेपाल में नहीं दिखाया जाता है लेकिन नेपाल के लोग उन्हें सोशल मीडिया पर ख़ूब फॉलो कर रहे हैं. वो उनका यूट्यूब देखते हैं.
उन्हें नेपाल के एकमात्र डॉलर अरबपति बिनोद चौधरी ने मुबारकबाद भेजी है. नेपाल की फेशन डिज़ाइनर और न्यू यॉर्क में रहने वाली प्रबल गुरुंग ने भी उन्हें संदेश भेजा है.
इस सप्ताह फ़ाइनल में कुछ भी हो लेकिन संतोष का भविष्य चमकदार दिख रहा है.
संतोष अभी सिंगल हैं और उनके सामने एक और ज़िम्मेदारी है.
वो कहते हैं, 'मैं अगले साल शादी करने पर विचार कर रहा हूं. मुझे अपनी पार्टनर मिल ही जाएगी. लगता है ये शादी का सही समय है.'
लेकिन फिलहाल उनका ध्यान सिर्फ़ मास्टरशेफ़ पर है.
'मेरे सामने ये नेपाल के व्यंजनों को दुनिया के सामने पेश करने का दुर्लभ मौका है और मैं जजों को प्रभावित करने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करूंगा.'
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