US elections 2024: अमेरिकी चुनाव में अहम मुद्दे क्या हैं? कुछ पर तो ट्रंप, बाइडेन को बोलने तक नहीं दे रहे
US presidential election 2024: अमेरिका में इस साल 5 नवंबर को चुनाव होने वाले हैं। डोनाल्ड ट्रंप लगातार दो प्राइमरी-कॉकस चुनाव भारी अंतर से जीत चुके हैं। वहीं, जो बाइडेन भी साउथ कैरोलिना डेमोक्रेट्स प्राइमरी चुनाव में अपने विरोधियों पर शानदार जीत हासिल कर चुके हैं।
अमेरिकी चुनाव 2024 भी 2020 की तर्ज पर बाइडेन बनाम ट्रंप लड़ा जाएगा इसकी संभावना काफी अधिक है। देश की जनता डोनाल्ड ट्रंप को अपना कीमती वोट देकर दूसरी बार राष्ट्रपति बनाती है या फिर इस बार जो बाइडेन को जनता अपना वोट देकर देकर का प्रेसिडेंट बनाएगी, यह सब 4 अहम मुद्दों पर निर्भर करता है।

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि, हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरीज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरीज का तेरहवां भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरीज आपको काफी पसंद आ रही होगी।
पिछली सीरीज में हमने आपको अमेरिकी महिला वोटरों के राष्ट्रपति चुनाव पर असर की बात की थी। आज की सीरीज में हम आपको बताएंगे कि अमेरिका में होने जा रहे चुनाव में इस बार कौन से मुद्दे सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। चुनाव में अब 10 महीने से भी कम समय रह गया है और आमतौर पर यही वो सही समय है जब मतदाता प्रमुख मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू करते हैं।
अर्थव्यवस्था, कोराना, स्वास्थ्य, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और नस्लीय हिंसक घटनाएं पिछले चुनाव में अमेरिकी मतदाताओं के लिए सबसे अहम मुद्दा थीं। वहीं इस बार के अहम मुद्दों में गर्भपात, सीमा सुरक्षा, इकॉनमी, गाजा युद्ध, गन कल्चर को रखा जा सकता है।
1. गर्भपात का अधिकार
अमेरिका में पिछली बार हुए मध्यावधि चुनाव की तरह इस बार भी गर्भपात का मुद्दा छाया रहेगा। 24 जून 2022 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात के अधिकार को मिली संवैधानिक सुरक्षा खत्म कर दी थी। अदालत ने 49 साल पुराने रो वी वेड केस में दिए गए फैसले को पलट दिया था।
गर्भपात के अधिकार को गैरसंवैधानिक करार देने के बाद अमेरिकी महिलाएं रिपब्ल्किन पार्टी से नाराज चल रही हैं। यही वजह है कि डेमोक्रेट इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं वहीं, रिपब्ल्किन इससे बचने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले चुनाव में गर्भपात का मुद्दा टॉप-10 में भी नहीं था मगर इस बार ये सबसे पहले नंबर पर है।
डेमोक्रेटिक पार्टी का मानना है कि लोगों को इस बात का खुद चुनाव करना है कि उन्हें गर्भ गिराना है या रखना है। पार्टी के इस रूख की वजह से उन्हें महिलाओं का अच्छा समर्थन मिलता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक स्विंग स्टेंट्स में जहां 58 फीसदी महिलाएं बाइडेन के प्रति समर्थन जता रही हैं वहीं ट्रंप को महज 36 फीसदी औरतों का सपोर्ट मिल रहा है।
ट्रम्प भी स्पष्ट रूप से इस मुद्दे की ताकत को महसूस कर रहे हैं यही वजह है कि वे इस मुद्दे के खिलाफ मतदान करने वाले तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, हेली भी गर्भपात पर अपने रिकॉर्ड और योजनाओं के बारे में सवालों को टालने की कोशिश कर रही हैं।
2. सीमा सुरक्षा
हाल के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 2024 के चुनावों में आप्रवासन शीर्ष मुद्दे के रूप में तेजी से उभर रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आव्रजन का मुद्दा ट्रंप को व्हाइट हाउस में वापस ला सकता है। आपको बता दें कि अमेरिका की दक्षिणी सीमा इन दिनों डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच युद्ध का मैदान बनी हुई है।
टेक्सास सीमा से भारी संख्या में विदेशी लोगों का अमेरिका आना एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। यही वजह है कि अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े राज्य टेक्सास ने ओपन बॉर्डर मसले को लेकर बाइडेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल दिसंबर में रिकॉर्ड रिकॉर्ड 3 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों ने सीमा पार की। ये अवैध आप्रवासी बाद में डेमोक्रेट पार्टी के लिए वोट बैंक का काम करते हैं, इसीलिए उन्हें रोकने का ठोस प्रयास नहीं किया जाता है।
रिपब्लिकन प्रवासियों की संख्या में वृद्धि के लिए राष्ट्रपति बाइडेन की आप्रवासन नीतियों को दोषी मानते हैं। उनका मानना है कि प्रेसीडेंट की नीतियों ने अमेरिका में प्रवासन को प्रोत्साहित किया है। यही वजह है रिपब्लिनक्स ने सीमा समझौता पारित होने तक यूक्रेन के लिए आपातकालीन फंडिंग को मंजूरी देने से भी इनकार कर दिया है।
3. इकॉनमी
अमेरिकी मतदातों के लिए एक और सबसे अहम मुद्दा है देश की अर्थव्यवस्था, खासतौर पर तब जब वह उतने बुरे दौर से नहीं गुजर रही है। कोरोना के दौर में बुरी तरह से प्रभावित हुई इकॉनमी जो बाइडेन के काल में पटरी पर आ चुकी है। देश में बेरोजगारी दर सबसे कम है। स्टॉक एक्सचेंज डाओ जोंस उच्चतम स्तर पर है।
यह बाइडेन के लिए अच्छा संकेत होना चाहिए लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या पर्याप्त अमेरिकी ऐसा सोच रहे हैं? जाहिर है कि बहुत सारे मतदाता ऐसा नहीं सोचते हैं। जीवन-यापन की लागत संबंधी चिंताएं सार्वजनिक मतदान पर हावी हैं , मुद्रास्फीति ऊंची बनी हुई है। आम अमेरिकियों का मानना है कि मजबूत इकॉनमी की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। इसका फायदा उन्हें मिल नहीं रहा है।
4. गाजा युद्ध
इजराइल-गाजा युद्ध तेजी से अमेरिकी चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। इस युद्ध में इजराइल का खुलकर समर्थन करने और अभी तक सीजफायर न करा पाने के कारण अमेरिकी मुस्लिम जो बाइडेन से नाराज हैं। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वे हालिया चुनाव में बाइडेन की पार्टी को वोट नहीं देंगे।
वहीं, ट्रंप ने मौजूदा स्थिति को बाइडेन की असफलता के रूप में प्रचारित करने में कामयाब हो रहे हैं। ट्रंप का साफ कहना है कि यदि वे अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो आज न ही इजराइल पर हमास हमला कर पाता और न ही रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरआत होती।
5. गन कल्चर
बीते कुछ सालों की तरह इस साल भी अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं जारी हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद कभी भी, कहीं भी गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं। बीते कई दशकों से अमेरिका में बदूंकधारी आम लोगों के हमलों में लोगों की जानें जा रही हैं। इसके बावजूद, हथियारों से जुड़े कानूनों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है।
अमेरिका के गन कल्चर को रोकने के लिए जून 2022 में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक बिल पर दस्तखत भी किए थे। इस कानून में बंदूक खरीदारों के रिकॉर्ड चेक करने, हथियार वापस लेने और कई अन्य प्रोग्राम चलाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इसके एक साल भी हालात जस के तस बने हुए हैं। डेमोक्रेट का वादा है कि वे इसे आगे और सख्त बनाएंगे।
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