US elections 2024: हारी हुई बाजी जीत पाएंगे बाइडेन, महिला वोटर कैसे बिगाड़ सकती हैं डोनाल्ड ट्रंप का गेम?
US presidential election 2024: अमेरिका में इस साल नवंबर में चुनाव होने वाले हैं। डोनाल्ड ट्रंप लगातार दो प्राइमरी-कॉकस चुनाव भारी अंतर से जीत चुके हैं। वहीं, जो बाइडेन भी साउथ कैरोलिना डेमोक्रेट्स प्राइमरी चुनाव में अपने विरोधियों पर शानदार जीत हासिल कर चुके हैं। शुरुआती रुझान देख ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिकी चुनाव 2024 का फाइनल मुकाबला 2020 की तर्ज पर बाइडेन बनाम ट्रंप लड़ा जाएगा।
हालांकि दोनों नेताओं के बीच सीधी टक्कर में ट्रंप भारी पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई सर्वेक्षणों में बताया गया है कि ट्रंप सभी 7 स्विंग स्टेट्स में बाइडेन से बहुत आगे हैं। ये वे राज्य हैं जहां पिछली बार ट्रंप को करारी हार नसीब हुई थी। अब ऐसे वक्त में जहां ट्रंप, अपने विरोधी पर भारी दिख रहे हैं आखिर कैसे बाइडेन ये बाजी पलट सकते हैं?

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि, हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरीज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरीज का बारहवां भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरीज आपको काफी पसंद आ रही होगी।
पिछली सीरीज में हमने आपको अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में तीसरे पक्ष की भूमिका और अमेरिका में द्विपक्षीय बाइनरी, स्वतंत्र उम्मीदवार कैनेडी जूनियर के बारे में बताया था। इस नए भाग में हम अमेरिकी महिला वोटरों के राष्ट्रपति चुनाव पर असर की चर्चा करेंगे।
नेशन वर्ल्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए दो प्रबल दावेदारों के बीच लिंग अंतर बढ़ रहा है क्योंकि वोटर चुनाव से पहले अपनी पसंद पर विचार करना शुरू कर देते हैं। क्विनिपियाक विश्वविद्यालय के नए सर्वेक्षण में पाया गया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर 50% से 44% की बढ़त बनाए हुए हैं, जो दिसंबर की तुलना में बढ़िया सुधार है। पिछली बार नवंबर में ये आंकड़ा लगभग बराबरी पर था।
बाइडेन के पक्ष में सबसे अच्छी बात ये है कि 5 स्विंग स्टेट्स में पुरुषों और महिलाओं के बीच पसंद का भारी अंतर है। इन राज्यों में जहां 58 फीसदी महिलाएं बाइडेन के प्रति समर्थन जता रही हैं वहीं ट्रंप को महज 36 फीसदी औरतों का सपोर्ट मिल रहा है।

वहीं पुरुष वोटरों की बात की जाए तो इन्हीं 5 स्विंग स्टेट में इसका उल्टा परिणाम निकलता है। इन राज्यों में जहां 53 फीसदी पुरुष वोटर ट्रंप का समर्थक हैं वहीं, महज 42 फीसदी वोटर बाइडेन को सपोर्ट कर रहे हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी को महिलाओं का समर्थन
1996 के बाद से अधिकांश महिलाओं ने हर राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को प्राथमिकता दी है। एसोसिएटेड प्रेस वोटकास्ट के एग्जिट पोल के अनुसार, 2020 में ट्रम्प और बाइडेन के बीच महिलाओं के वोटों का अंतर 12 फीसदी था।

पिछले कई चुनाव में दिखा है कि रिपब्लिकन और ट्रम्प को महिला मतदाताओं के साथ संघर्ष करना पड़ा है। पार्टी की चिंता ये है कि ये संघर्ष इस बार चरम पर पहुंच सकता है। वे महिलाएं जो छोटे शहरों में रहती हैं और कॉलेज की शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं, उसका बड़ा हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी को सपोर्ट करता है। प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, बाइडेन को 2020 के चुनाव में 54% अर्ध-शहरी महिलाओं का समर्थन हासिल था।
इस बार के चुनाव में ये अंतर और बढ़ सकता है। दो साल पहले गर्भपात के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 50 साल पुराना फैसला पलट दिया था। 24 जून 2022 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात के अधिकार को मिली संवैधानिक सुरक्षा खत्म कर दी थी। अदालत ने 49 साल पुराने रो वी वेड केस में दिए गए फैसले को पलट दिया था। इस केस में गर्भपात के अधिकार को सुरक्षा दी गई थी।

नए आदेश के मुताबिक, राज्यों को अबॉर्शन पर बैन लगाने या इसे जारी रखने की इजाजत देने की ताकत मिल गई। इसके बाद से ये देश में एक अहम मुद्दा बन चुका है। रिपब्लिकन पार्टी महिलाओं के अबॉर्शन करवाने के खिलाफ है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी इसके समर्थन में है।
अमेरिका में गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हर साल औसतन 6 लाख अबॉर्शन किए जाते थे। 2020 में तो हर 5 में से 1 महिला ने गर्भपात कराया था। ऐसी महिलाएं या इस विचार की महिलाएं जो अबॉर्शन को महिलाओं के लिए अधिकार मानती हैं, रिपब्लिकन पार्टी को वोट करेंगी... इस पर संदेह है।
ये महिलाएं चुनाव परिणाम पर कितना गहरा असर डाल सकती हैं ये तब पता चला जब डेमोक्रेट्स ने 2022 के मध्यावधि में मतदान में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप सहित तमाम रिपब्लिकंस जहां राज्यों में लाल लहर देखे जाने का दावे कर रहे थे वो कहीं नहीं दिखा।
यह चलन 2024 में भी जारी रह सकता है, हाल ही में जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने रो बनाम वेड निर्णय की 51वीं वर्षगांठ मनाई है। बाइडेन ने महिलाओं से वादा किया है कि यदि मतदाता उन्हें फिर से चुनते हैं और संसद में पर्याप्त बहुमत हासिल करते हैं तो वो इस कानून में बदलाव करेंगे।
हालांकि इस चुनाव में महिलाओं के इतन अन्य मुद्दे भी हैं जो जनमत सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट के लिए मुश्किल बन सकते हैं। हाल के सर्वेक्षणों में वोटरों ने मुद्रास्फीति, अर्थव्यवस्था की स्थिति और अवैध शरणार्थियों का मुद्दा सूची में काफी ऊपर रहा है। ये राष्ट्रपति के लिए कमजोर प्वाइंट हैं। इन सभी मुद्दों पर बाइडेन काफी पिछड़े नजर आते हैं।












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