जानिए क्यों इस नदी को देखते ही दूर भागते हैं लोग? पानी में उतरने वाले को भुगतना पड़ा जिंदगीभर अंजाम
मास्को, 7 सितंबर। दुनिया में कई हैरान करने वाली जगहें हैं। इनमें से कुछ तो जितनी सुंदर होती हैं उतनी है खतरनाक भी होती हैं। आज हम आपको एक ऐसी नदी के बार में बताने जा रहे है जो देखने में तो बेहद खूबसूरत है लेकिन उसके अंदर जाना मौत को दावत देने के बराबर है। जी हां, रूस की टेका नदी अपनी सुंदरता के लिए जितनी मशहूर है, इंसानों या अन्य जीवों के लिए उतनी ही खतरनाक है। नदी का पानी शरीर पर लगते ही आपको कई जानलेवा बीमारियां घेर सकती हैं। आखिर क्यों है नदीं का पानी इतना घातक, आइए जानते हैं।

243 किलोमीटर लंबी है टेका नदी
रूस के यूराल पर्वतमाला से निकलने वाली टेका नदी किसी आम नदीं की तरह ही शांत और सुंदर दिखाई देती है। यह 243 किलोमीटर लंबी है और 7,600 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इसका पानी दिखने में किसी मिनरल वाटर की तरह साफ है लेकिन जिस किसी ने भी इसके पानी का इस्तेमाल किया उसकी जिंदगी बीमारियों के जाल में फंस गई। दरअसल इसकी वजह पानी का रेडियोएक्टिव होना बताया जाता है।

दिखने में खूबसूरत लेकिन बेहद खरनाक है नदी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टेका नदी का पानी इतना ज्यादा रेडियो एक्टिव है कि इसके शरीर पर लगते हैं कई जानलेवा बीमारियां घेर लेती हैं। नदी का खूबसूरत नजारा आपको उसके करीब जाने पर मजबूर कर देगा लेकिन न्यूक्लियर कम्पाउंड होने की वजह से पानी बेहद खरनाक है। बताया जाता है कि रूस में हुई न्यूक्लियर आपदा (चेरनोबिल परमाणु आपदा) के बाद नदी में ही रहस्यमयी न्यूक्लियर कंपाउंड को फेंका गया था जिसने हजारों लोगों को प्रभावित किया था।
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23 से ज्यादा गांव को करना पड़ा पलायन
पानी दूषित होने की वजह से इसके आस-पास रह रहे कई हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा था, पिछले 13 सालों में अब तक नदी के किनारे रह रहे 23 से ज्यादा ग्रामीण समुदाय यहां से जा चुके हैं। जब तक लोगों को पानी के दूषित होने का पता नहीं था तब तक कई लोगों की जिंदगियां इस नदी की वजह से चली गईं। हजारों लोगों को कैंसर, क्रोमोसोमल एब्नॉर्मलिटी और जन्मजात विकलांगता से जूझना पड़ा था। हालांकि आधिकारतौर पर इस बात को नहीं माना गया और आज भी सरकार इस पानी को इस्तेमाल करने योग्य बताती है।

नदी में डाला गया था दूषित पानी
हालांकि, आस-पास रहने वाले लोगों की दुर्दशा सारी कहानी बयां करती है, रूस के पर्यावरणविद मयाक ने एक इंटरव्यू में नदी के रेडियोएक्टिव होने को लेकर अहम जानकारी दी थी। उन्होंने कहा, 1949-1956 के बीच नदी में 76 मिलियन क्यूबिक मीटर खराब पानी टेका नदी में फेंका गया था। अधिकारियों को ये बात पता थी कि नदीं के पानी का इस्तेमाल दो दर्जन से ज्यादा गांव करते हैं। इन गावों में रहने वाले करीब 28 हजार से अधिक लोगों ने इस पानी का इस्तेमाल किया।

इन बीमारियों के होने का सबसे ज्यादा खतरा
मयाक के मुताबिक साल 2007 में एक सर्वे किया गया था जिसमें यह बात सामने आई कि नदी के पानी का इस्तेमाल करने से कैंसर होने का खतरा 3.6 गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा 25 फीसदी खतरना बच्चों में जन्मजात विकृति होने की बात सामने आई। मयाक की इन बातों को रूस सरकार ने मानने से इनकार कर दिया था और 1980 में रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया। हालांकि पिछले साल अब अधिकारियों की ओर से नदी के किनारे कई तरह के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
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