Video: सेना ने हिंसा से निबटने के लिए तैनात किए कुत्ते, बब्बर शेर लेकर पहुंच गई जनता
बगदाद। इराक में इन दिनों सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने जोर पकड़ रखा है। इस प्रदर्शन के बीच ही पिछले दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। एक प्रदर्शनकारी यहां पर शेर लेकर पहुंच गया। इराक में अक्टूबर माह से सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। प्रदर्शन में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल भी हुए हैं। यहां पर लोग आर्थिक तंगी और भ्रष्टाचार को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
शेर से किया कुत्तों का सामना
पिछले दिनों यहां पर इराकी पुलिस ने हिंसक होते प्रदर्शनकारियों को जवाब देने के लिए कुत्तों का सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों ने शेर को लाकर कुत्तों का सामना किया। जो वीडियो सामने आया है उसमें एक शेर को कुछ युवकों के ग्रुप में देखा जा सकता है। इसमें शेर को सड़क के एक किनारे पर आराम करते हुए देखा जा सकता है। इसका हैंडलर इसे इराक के झंडे में लपेट कर लाया था और इसके गले में चेन भी बंधी हुई नजर आई। लाल टी-शर्ट और काली जींस पहले हैंडलर ने इसकी पीठ पर बैठकर ही प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इराक की राजधानी बगदाद में अक्टूबर माह से ही प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। यहां पर लोग भ्रष्टाचार और आर्थिक तंगी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शन में 320 लोगों की मौत
अब तक सुरक्षाबलों के साथ हुए टकराव में करीब 320 लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को इराकी सुरक्षाबलों के साथ हुई हिंसा में चार और लोगों की मौत हुई तो 65 लोग घायल हो गए। सुरक्षाबलों की तरफ से अब तक प्रदर्शनकारियों पर कई बार रबर बुलेट्स और आंसू गैस का प्रयोग किया जा चुका है। प्रदर्शनकारी इराक के तहरीर स्क्वायर पर जमे हुए हैं और देश की सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन जारी रखे हैं। लोगों में अर्थव्यवस्था को लेकर खासा गुस्सा है।

सरकार की बात भी नहीं सुन रहे हैं लोग
लोगों का कहना है कि तेल की कमाई से जो पैसा आया है उसकी मदद से न तो यहां पर नौकरियां पैदा करने की कोशिश की गई है और न ही युवाओं की जिंदगी बेहतर करने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री अब्देल अब्दुल मेहदी की सरकार की तरफ से प्रदर्शन को शांत करने की सभरी कोशिशें असफल हो गई हैं। उन्होंने गरीबों और कॉलेज ग्रेजुएट्स की मदद करने के लिए कई कदम उठाने की बात भी कही है। प्रदर्शनकारी अब मांग कर रहे हैं कि देश में जो एक एलीट वर्ग जिसने अमेरिकी सेनाओं के जाने और सद्दाम हुसैन की मौत के बाद देश की बागडोर संभाली, उसे अब सत्ता से जाना होगा।

आजादी के बाद भी स्थिति बदतर
साल 2017 में इराक आईएसआईएस के चंगुल से आजाद हो गया था लेकिन पिछले दो वर्षों से यहां पर अस्थिरता का माहौल है। तेल की वजह से यहां पर अच्छी खासी आय आती है लेकिन इसके बाद भी यहां पर लोग गरीबी में रहने को मजबूर हैं, उन्हें पीने के लिए साफ पानी, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर शिक्षा तक नसीब नहीं हो रही है।












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