Wakhan Corridor: अफगानिस्तान के 'चिकेन नेक' पर कब्जा करेंगे चीन-पाकिस्तान? भारत के लिए क्यों होगा खतरनाक?
Wakhan Corridor Afghanistan: तालिबान के साथ झगड़ा शुरू होने के बाद अब पाकिस्तान में वखान कॉरिडोर पर कब्जा करने की बात की जा रही है, जो अफगानिस्तान का हिस्सा है, लेकिन पाकिस्तान इसके जरिए एक तीर से दो निशाने साधना चाहता है। एक तो तालिबान को रणनीतिक झटका देना है, दूसरा भारत के खिलाफ नया फ्रंट खोलना है।
दुनिया की कुछ सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से घिरी भूमि की एक संकरी पट्टी, वखान कॉरिडोर, ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य और जारिस्ट रूस के बीच 19वीं सदी के 'ग्रेट गेम' का परिणाम है। आप मैप में देख सकते हैं, कि वखान कॉरिडोर कहां है और उसके बाद आपको इस संकरी पट्टी की अहमियत का अंदाजा हो जाएगा और आप समझ जाएंगे, कि आखिर पाकिस्तान क्यों चाहता है, कि वो नहीं, तो कम से कम चीन इस पट्टी को अपने नियंत्रण में ले ले।

वखान कॉरिडोर में चीन की दिलचस्पी क्यों है? (Why is China interested in the Wakhan Corridor?)
वैसे तो वखान कॉरिडोर अफगानिस्तान का यह सुदूर हिस्सा, जो आधिकारिक तौर पर तालिबान के नियंत्रण में है, लेकिन, चीन के लिए रणनीतिक रूप से तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है, जो इस कम आबादी वाले, ऊबड़-खाबड़ इलाके को नियंत्रित करने के लिए तालिबान अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है।
वखान कॉरिडोर सिर्फ 13 किलोमीटर चौड़ा है और इसे अफगानिस्तान का 'चिकन नेक' कहा जाता है। वखान कॉरिडोर धरती के सबसे सुदूर इलाकों में से एक है और अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत को चीन के झिंजियांग क्षेत्र से जोड़ता है। यह उत्तर में ताजिकिस्तान के गोर्नो-बदख्शां स्वायत्त क्षेत्र को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और दक्षिण में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र से भी अलग करता है।
यह पट्टी 350 किलोमीटर लंबी और 13 से 65 किलोमीटर चौड़ी है। इसका कुल क्षेत्रफल 10,300 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या सिर्फ 15,000 है।
लेकिन, पिछड़ा इलाका होने के बाद भी चीन की इस संकीर्ण भूमि पट्टी में दिलचस्पी काफी बढ़ गी है, जो उसके लिए "शक्ति का गलियारा" बन सकता है।
क्या वखान कॉरिडोर पर चीन का नियंत्रण संभव है? (Is it possible for China to control the Wakhan Corridor?)
वखान कॉरिडोर में चीन की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। दरअसल, बीजिंग पिछले एक दशक से इस सुदूर इलाके में दिलचस्पी रखता है। इसका महत्व बीजिंग को तब पता चला, जब चीन ने पहली बार चीन-पाकिस्तान-आर्थिक-कॉरिडोर (CPEC) का प्रस्ताव रखा, जो पाकिस्तान में चीन की महत्वाकांक्षी 66 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सड़क और बुनियादी ढांचा नेटवर्क है, जो बीजिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग, वखान कॉरिडोर में CPEC का विस्तार करना चाहता है ताकि इसे मध्य एशिया से जोड़ा जा सके और प्राचीन सिल्क रोड को पुनर्जीवित किया जा सके, जो चीन को मध्य और पश्चिम एशिया और फिर यूरोप से जोड़ता था।
साल 2011 में, ताजिकिस्तान ने वखान कॉरिडोर के करीब पामीर पर्वत में 386 वर्ग मील (1,000 वर्ग किमी) जमीन चीन को सौंप दी थी। वहीं, साल 2016 में, ऑस्ट्रेलिया के लोली इंस्टीट्यूट ने बताया था, कि चीन वखान कॉरिडोर के ताजिकिस्तान की तरफ सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है और वखान कॉरिडोर में एक स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है।
हालांकि, काबुल में अमेरिका समर्थित सरकार इस क्षेत्र में बीजिंग की योजनाओं में बाधा बन रही थी।
लेकिन, अगस्त 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद चीन ने अपनी योजनाओं को फिर से शुरू किया। अक्टूबर 2023 में, कार्यवाहक अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने तीसरे ट्रांस-हिमालय फोरम फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन के मौके पर तिब्बत में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और चीन और अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए वखान कॉरिडोर खोलने पर चर्चा की।
इसके दो हफ्ते बाद, तालिबान ने आधिकारिक तौर पर वखान कॉरिडोर में सड़क कनेक्शन के माध्यम से चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने के अपने इरादे की घोषणा की।
वखान कॉरिडोर पर लेटेस्ट डेवलपमेंट (Latest Development on Wakhan Corridor)
- तालिबान का यह फैसला, राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी इनिशिएटिव की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ, जिसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए प्राचीन सिल्क रोड को फिर से बनाने के रूप में पेश किया गया।
- अप्रैल 2024 में, अफगान और चीनी विदेश मंत्रालयों ने बीजिंग में मुलाकात की और वखान कॉरिडोर में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का फैसला किया।
- अगस्त 2024 में, काबुल में चीन के राजदूत झाओ जिंग और तालिबान शासन के अधिकारियों ने वखान कॉरिडोर का दौरा किया और चीन की सीमा तक वाखान रोड पर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया।
- 14 जनवरी को अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने एक समाचार रिपोर्ट ट्वीट की, जिसमें कहा गया था, कि तीन वरिष्ठ चीनी खुफिया अधिकारियों ने जनवरी के पहले सप्ताह में वखान कॉरिडोर का दौरा किया और तालिबान अधिकारियों से क्षेत्र में सभी गतिविधियां बंद करने को कहा, जिससे प्रभावी रूप से रणनीतिक कॉरिडोर पर उनका पूर्ण नियंत्रण हो गया।
इस क्षेत्र में चीन के कई हित हैं। CPEC का विस्तार करने और इसे मध्य एशिया से जोड़ने के अलावा, बीजिंग इस क्षेत्र में अपनी स्थायी उपस्थिति स्थापित करना चाहता है ताकि वह तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान से चीन में मादक पदार्थों के प्रवाह को रोक सके और चीन के एकमात्र मुस्लिम-बहुल शिनजियांग प्रांत में इस्लामी कट्टरपंथियों पर भी नजर रख सके, जहां बीजिंग कई वर्षों से अलगाववादी विद्रोह से जूझ रहा है।
चीन इस संकीर्ण भूमि पट्टी को नियंत्रित करने की कोशिश करने वाली लेटेस्ट शक्ति है और पहले भी प्रभावशाली शक्तियों ने हमेशा इस क्षेत्र को नियंत्रित करने की कोशिश की है।
19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान, शाही ब्रिटेन और जारिस्ट रूस ने इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए होड़ की। शीत युद्ध के दौरान, सोवियत संघ और पश्चिमी शक्तियों ने वखान कॉरिडोर के लिए रेस लगाई। और अब, अपनी बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के साथ, चीन ने इस क्षेत्र को नियंत्रित करने की योजना बनाई है।
चीन के वखान कॉरिडोर प्लान में शामिल हुआ पाकिस्तान (Pakistan joins China's Wakhan Corridor plan)
अपनी बिगड़ती आर्थिक और सुरक्षा स्थिति के बावजूद, पाकिस्तान भी वखान कॉरिडोर के लिए 'ग्रेट गेम' में शामिल हो गया है। 30 दिसंबर, 2024 को, पाकिस्तान के खुफिया प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक की ताजिकिस्तान की अचानक यात्रा ने व्यापक अटकलों को हवा दी, कि इस्लामाबाद वखान कॉरिडोर पर कब्जा करने के लिए कमर कस रहा है।
हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन अफवाहों ने जोर पकड़ा, क्योंकि ये कॉरिडोर पाकिस्तान को अफगानिस्तान को दरकिनार करते हुए मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान कर सकता है, जिसके साथ इस्लामाबाद के रिश्ते खराब हैं।
फ्राइडे टाइम्स में लिखते हुए पाकिस्तानी पत्रकार तलत मकबूल ने कहा, कि "वखान बॉर्डर में पाकिस्तान के लिए एक बड़ी दिलचस्पी मध्य एशिया तक उसकी पहुंच में है। वर्तमान में, मध्य एशिया के भूमि से घिरे देशों के साथ पाकिस्तान के व्यापारिक संबंध सीमित हैं, जिसका मुख्य कारण भौगोलिक चुनौतियां और राजनीतिक बाधाएं हैं। वखान कॉरिडोर एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में काम कर सकता है, जिससे पाकिस्तान के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।"
हालांकि, यह संभावना नहीं है कि पाकिस्तान चीन की स्वीकृति के बिना वखान कॉरिडोर को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश करेगा, क्योंकि बीजिंग के इस क्षेत्र में अपने हित हैं। लेकिन, अगर चीन और पाकिस्तान, वखान कॉरिडोर पर कब्जा करते हैं, तो भारत के खिलाफ भी एक नया फ्रंट खुल सकता है, जिसे काउंटर करना नई दिल्ली के लिए काफी मुश्किल होगा।
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