...तो क्या बृहस्पति पर ज्वालामुखी एक्टिव! Jupiter की PACE यान ने कैप्चर की तस्वीरें, NASA ने किया बड़ा दावा
अंतरिक्ष में होने वाली घटनाएं पृथ्वी के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रही हैं। ऐसे में स्पेस एजेंसी नासा समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों के साइंटिस्ट्स की लगातार स्पेस में घटित हो रही घटनाओं पर नजर रहती है। हाल ही में नासा ने बृहस्पति ग्रह पर एक अनोखी घटना देखी है। स्पेस एजेंसी ने इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा है कि स्पेस मिशन PACE के अंतरिक्ष यान में बैठे क्रू मेंबर्स ने इस घटना को काफी करीब से ऑब्जर्व किया है।
नासा का अंतरिक्ष मिशन PACE यानी प्लैंकटन एरोसोल क्लाउड ओशन इकोसिस्टम (Plankton Aerosol Cloud Ocean Ecosystem) लगातार बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को सुलझाने में अहम रोल अदा करने वाला है। स्पेस एजेंसी नासा ने इसे इस हफ्ते गुरुवार (8 फरवरी) को स्पेसएक्स के फॉल्कन राकेट से लॉन्च किया था।

नासा का PACE Satellite महासागरों झीलों, नदियों और वायुमंडल का अंतरिक्ष से विस्तृत सर्वेक्षण करेगा। ये उपग्रह करीब तीन साल तक 676 किलोमीटर ऊपर से महासागरों के साथ-साथ वायुमंडल का अध्ययन करेगा। सेटेलाइट में तीन प्रमुख उपकरण हैं, जिनमें से दो प्रतिदिन पृथ्वी पर होने वाले बदलाव को स्कैन करेंगे। जबकि तीसरा उपकरण मासिक आधार डेटा जुटाएगा। इस उपग्रह के जरिए वैज्ञानिक मौसम से जुड़े बेहतर पूर्वानुमान लगा सकेंगे।
नासा ने कहा PACE को दिखा ज्वालामुखी
पृथ्वी का वायुमंडलीय अध्ययन करने वाले उपग्रह पेस को लेकर नासा ने एक्स पर एक ट्वीट में कहा, "इस सप्ताह हमारे नए मिशन पर अंतरिक्षयान PACE रवाना हुआ। हमारे जूनो अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति के ज्वालामुखीय चंद्रमा आईओ के सबसे करीब उड़ान भरी।"
चंद्रमा पर भी ज्वालामुखी कैसे?
बृहस्पति ही नहीं चंद्रमा पर भी ज्वालामुखी होने का दावा किया गया है। रिसर्च के मुताबिक चंद्रमा पर पिछले 100 मिलियन सालों से ज्वालामुखी सक्रिय रहे हैं। नूह पेट्रो के मुताबिक समस्या यही है कि कोई भी वैज्ञानिक चंद्रमा पर ज्वालामुखी के बारे में इतना नहीं जानता जो यह तय कर सके यह गतिविधि वास्तव में कैसी थी और इसने चंद्रमा के भू-विज्ञान पर क्या प्रभाव डाला। कई चंद्र चट्टानों और ऑर्बिटर इमेजिंग पर आधारित विश्लेषण से इस इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है।












Click it and Unblock the Notifications