अचानक चीन के दौरे पर क्यों पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन? भारत पर क्या होगा इसका असर?

यूक्रे्न के साथ चल रहे युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के पीस प्लान का समर्थन किया है। पुतिन ने चीन की इस योजना को तनाव को खत्म करने के लिए एक सार्थक प्रयास बताया है।

चीन पहुंचने से पहले पुतिन ने जिनपिंग की तारीफ करते हुए कहा कि वो शांति वार्ता के लिए तैयार हैं और चीन के 12 सूत्रीय शांति समझौते का समर्थन करते हैं। पश्चिमी देशों के दबाव, प्रतिबंध, रूस के आर्थिक संकट के बीच पुतिन का यह दौरा कई मायनों में अहम है।

vladimir putin

12 सूत्रीय समझौता

बता दें यूक्रेन युद्ध की समाप्ति के लिए चीन ने 12 सूत्रीय फॉर्मूला पेश किया है जिसका पुतिन ने स्वागत किया है। इसमे सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान, शांति वार्ता करने,सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने की बात शामिल है।

बता दें कि पुतिन दो दिन के चीन के दौरे हैं। इस दौरान वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। पुतिन के चीन दौरे पर पूरी दुनिया की नजर है।

व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में लगातार पांचवी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली । जिस तरह से राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद उन्होंने चीन को पहली विदेश यात्रा के लिए चुना है उसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।

भारत के लिहाज से अगर पुतिन की चीन यात्रा को देखें तो भारत और चीन के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। लेकिन जिस तरह से पिछले दो वर्षों से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है, उसके चलते रूस की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ा है। ऐसे में पुतिन चीन की यात्रा के जरिए अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देना चाहते हैं।

भारत के लिए क्या हैं मायने

भारत की बात करें तो पीएम मोदी ने पहले ही राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का काल नहीं है। ध्यान देने वाली बात है चीन की बात को सिर्फ रूस सुन रहा है तो भारत की बात को रूस के साथ यूक्रेन भी सुन रहा है।

वहीं भारत रूस पर पाबंदी के बावजूद बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत ने रूस के साथ पारंपरिक दोस्ती पर आंच नहीं आने दी है। ऐसे में पुतिन का चीन का दौरा रूस के व्यक्तिगत हितों के लिहाज से अहम है। लिहाजा इसे भारत के हितों के खिलाफ नहीं देखना चाहिए।

चीन पहुंचते ही की तारीफ

चीन पहुंचने के बाद पुतिन ने राष्ट्रपति जिनपिंग की तारीफ की है। उन्होंने कहा आपसी विश्वास और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए चीन ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के चलते ही मैंने रूस के राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद चीन का दौरा करने का फैसला लिया। आने वाले समय में हम स्पेस,उच्च तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,न्यूक्लियर एनर्जी, उद्योग में सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

No Limit साझेदारी

गौर करने वाली बात है कि रूस और चीन के राजनयिक संबंध 75 वर्ष के हो गए हैं। पुतिन इससे पहले 2022 में यूक्रेन के साथ जंग से कुछ दिन पहले चीन पहुंचे थे। उस वक्त पुतिन ने कहा था कि दोनों देशों के बीच साझेदारी की कोई सीमा नहीं होगी।

क्यों अहम है पुतिन का दौरा

दरअसल रूस पॉवर फ साइबेरिया 2 पाइपलाइन प्रोजेक्ट की डील चीन के साथ पूरी करना चाहता है। इस डील के होने के बाद उत्तरी रूस से चीन तक नैचुरअल गैस की सप्लाई हो सकेगी। दोनों देशों के बीच यह समझौता अभी भी अधूरा है।

यूक्रेन के साथ कई वर्षों से चल रहे युद्ध के चलते रूस की अर्थव्यवस्था नुकसान पहुंचा है। ऐसे में पुतिन देश की अर्थव्यवस्था को चीन के जरिए मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है लेकिन पुतिन इसे और भी बढ़ाना चाहते हैं।

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