पुतिन ने BRICS देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर दिया जोर, भारत, चीन को लेकर कही बड़ी बात

पुतिन ने कहा, हम सक्रिय रूप से विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय भागीदारों, मुख्य रूप से ब्रिक्स देशों की ओर अपने व्यापार प्रवाह और विदेशी आर्थिक संपर्कों को फिर से उन्मुख करने में लगे हुए हैं।

मास्को, 23 जून : रूस और यूक्रेन में जारी जंग के बीच ब्रिक्स का वर्चुअल शिखर सम्मेलन (BRICS Virtual Summit) आयोजित किया जा रहा है। इस बार 23-24 जून को आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी चीन कर रहा है। इस सम्मेलन की शुरूआत से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस ब्राजील,भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के लिए व्यापार का मार्ग बदल रहा है। पुतिन ने यहां ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि इस साल के पहले तीन महीनों में ही रूस और ब्रि्क्स देशों के बीच व्यापार में 38 फीसदी की वृद्धि हुई है और यह 45 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

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भारत और चीन को लेकर पुतिन ने कही बड़ी बात
पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि रूस सक्रिय रूप से विश्वसनीय अंतरारष्ट्रीय भागीदारों, मुख्य रूप से ब्रिक्स देशों की ओर अपने व्यापार प्रवाह और विदेशी आर्थिक संपर्कों को फिर से आगे बढ़ाने कि दिशा में काम कर रहा है। पुतिन ने आगे कहा कि, रूस में भारतीय चेन स्टोर खोले जाने की बात चल रही है और रूसी बाजार में चीनी कारों, उपकरणों और हार्डवेयर की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भी वार्ता चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि, रूस ने चीन और भारत को रिकॉर्ड तेल सप्लाई की है। रूस से चीन का कच्चे तेल का आयात मई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिससे सऊदी अरब देश के शीर्ष आपूर्तिकर्ता के लाइन से बाहर हो गया।

ब्रिक्स दुनिया की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था
ब्रिक्स दुनिया की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संगठन का एक नाम है। इस संगठन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। ब्रिक्स के सदस्य अपने क्षेत्रीय मसलों पर अपने अहम प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। ब्रिक्स को दुनिया की अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जाना जाता है। ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता हर साल इसके सदस्य राष्ट्रों की ओर से की जाती है। पांच देशों में से हर साल बदल-बदलकर इस सम्मेलन की मेजबानी करते हैं। इस बार (23-24 जून) वर्चुअल शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है और इसकी मेजबारी चीन कर रहा है।

क्या है मुख्य एजेंडा
जानकारी के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग, व्यापार, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को 14वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के एजेंडे में सबसे ऊपर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं ब्रिक्स के विस्तार को लेकर भी इस सम्मेलन में चर्चा किए जाने की उम्मीद है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) भी इस वर्चुअल सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

2006 में हुई थी ब्रिक्स की स्थापना
ब्रिक्स (BRICS) की स्थापना जून 2006 में हुई थी। पहले इसमें चार देश शामिल थे जिससे इसका नाम ब्रिक (BRIC) था। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। बता दें कि, साल 2010 में इस संगठन में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हो गया। जिसके बाद इस संगठन का नाम बदल गया। ये BRIC से बदलकर BRICS हो गया। पहली बार साल 2009 में ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित किया गया था।

जानें ब्रिक्स का मकसद
ब्रिक्स (BRICS) संगठन एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें दुनिया की 5 अहम उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। बिजनेस जगत के जानकार बताते हैं कि, इन पांच देशों से दुनिया की जनसंख्या का 41 फीसदी, वैश्विक जीडीपी का करीब 24 प्रतिशत और विश्व व्यापार में 16 प्रतिशत भाग शामिल है। ब्रिक्स समिट में क्षेत्रीय मसलों के साथ वैश्विक मामलों पर भी चर्चा होती है। इसका अहम मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में सदस्य राष्ट्रों के बीच आपसी लाभकारी सहयोग को आगे बढ़ाना है।

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