Vivek Ramaswamy News: हिंदू होने पर विवेक रामास्वामी को गर्व, क्या भारतीय पहचान बतलाना है नापसंद?
Vivek Ramaswamy News: विवेक रामास्वामी अपनी भारतीय विरासत से कतराते नहीं हैं और खुलकर खुद को हिंदू बताते हैं। विवेक रामास्वामी के नाम के साथ उनकी हिंदू आस्था जुड़ी हुई है और वो अपने चुनावी प्रचार अभियान के दौरान बार बार खुद को हिंदू कहकर संबोधित करते हैं।
उन्होंने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान कई बार बताया है, कि वह अपने परिवार की परंपरा के कारण शाकाहारी हैं। अगस्त महीने में रिपब्लिकन पार्टी की पहली बहस के दौरान, जो एक ब्रेकआउट प्रदर्शन था, उसमें उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की प्रतिध्वनि करते हुए खुद को "एक अजीब उपनाम वाले पतले आदमी" के रूप में पेश किया था।

भारतीय पहचान से रामास्वामी को परहेज?
फिर भी, विवेक रामास्वामी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा है, कि वह एक भारतीय अमेरिकी के रूप में अपनी पहचान नहीं बताते हैं। उन्होंने मार्शलटाउन, आयोवा में एक चुनावी अभियान के बाद कहा, कि हिंदू और भारतीय होना "निश्चित रूप से मेरी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, और मुझे इस पर गर्व है और मैं इसके साथ बहुत सहज हूं। लेकिन मैं पहले एक अमेरिकी हूं।"
विवेक रामास्वामी ने कहा, कि "भारत उनकी परंपरा जरूर शामिल है, लेकिन वो पहले एक अमेरिकी हैं।"
पहली बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और कंजर्वेटिव मानसिकता वाले लेखक, 38 साल के विवेक रामास्वामी, अपनी भारतीय जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं और इस बात पर अड़े हैं, कि अमेरिका में विविधता और नस्लीय असमानता पर बढ़ता ध्यान, राष्ट्रीय एकता की कीमत पर आया है।
उनका संदेश रिपब्लिकन मतदाताओं की ओर केंद्रित है, जो भारी मात्रा में श्वेत और ईसाई हैं, और उन्होंने अपने वोटरों के लिए अपनी व्यक्तिगत कहानी तैयार की है। उदाहरण के लिए, जब अमेरिकी वोटर्स उनसे उनकी हिंदू आस्था को लेकर सवाल पूछते हैं, तो वह अक्सर इस बात पर ज़ोर देते हैं, कि उनकी हिंदू आस्था उन्हें "यहूदी ईसाई" मूल्यों को बनाए रखने की इजाजत देता है।

ऊर्जा से लबालब भरे हुए और तेजतर्रार भाषण देने में माहिर, विवेक रामास्वामी ने अगस्त में रिपब्लिकन पार्टी की पहली बहस में पूरे अमेरिका का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था और उन्होंने चुनाव में अच्छी खासी बढ़त हासिल कर रखी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप कानूनी अड़चनों की वजह से रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से टिकट हासिल नहीं कर पाते हैं, तो रामास्वामी की किस्मत चमक सकती है।
वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति बनते हैं, तो विवेक रामास्वामी उप-राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं। ये बाद खुद डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं, कि विवेक रामास्वामी एक अच्छे उप राष्ट्रपति साबित होंगे।
वहीं, तमाम सर्वे में विवेक रामास्वामी दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। पहले नंबर पर डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो विवेक रामास्वामी से काफी ज्यादा आगे हैं।
इस बीच, विवेक रामास्वामी को मियामी में बुधवार को होने वाली तीसरी रिपब्लिकन पार्टी बहस क्वालिफाई करने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल चुका है।
कई भारतीय अमेरिकी, यहां तक कि जो लोग विवेक रामास्वामी की राजनीतिक मान्यताओं के आलोचक हैं, उन्होंने साक्षात्कारों में कहा है, कि विवेक रामास्वामी को राष्ट्रीय मंच पर उन्हें देखकर विशेष गर्व होता है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है, कि अभी तक अमेरिका में शीर्ष पदों पर पहुंचे या पहुंचने की कोशिश में लगे ज्यादातर भारतीय नेताओं ने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया, जिनमें बॉबी जिंदल भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने ना सिर्फ अपनी हिंदू पहचान, बल्कि अपना हिंदू नाम भी बदल लिया था।
जिसका खामियाजा ये हुआ, कि ना उन्हें ईसाइयों का समर्थन मिला और ना ही हिंदुओं का। बॉबी जिंदल अब अमेरिकी राजनीति में साइडलाइन किए जा चुके हैं।
लेकिन, विवेक रामास्वामी अपनी हिंदू पहचान के साथ अडिग खड़े हैं।

विवेक रामास्वामी की भारतीय पहचान
रामास्वामी की कहानी कई एशियाई अमेरिकियों की कहानी है, जिनके माता-पिता 1965 में आव्रजन कानूनों के उदार होने के बाद देश में आए थे और यूरोप के बाहर से प्रवास में अमेरिका में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई थी। एशियाई अमेरिकी देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला नस्लीय समूह है, और भारतीय अमेरिकी अब संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़ा स्टैंड-अलोन समूह हैं।
विवेर रामस्वामी का बचपन अमेरिका के ओहिया के सिनसिनाटी क्षेत्र में गुजरा, जो हिंदू बाहुल्य क्षेत्र है और वो एक मंदिर से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, उनकी पढ़ाई ईसाई स्कूल में हुई, जहां उन्होंने कहा है, कि वह अपनी कक्षा में एकमात्र हिंदू छात्र थे।
द सिनसिनाटी इंक्वायरर में 2002 के एक लेख के अनुसार, एक किशोर के रूप में, उन्होंने स्कूल में एक इंडिया एसोसिएशन की सह-स्थापना की थी और एक स्थानीय भारतीय रेडियो स्टेशन के लिए भी काम किया।
यानि, वो बचपन से ही अपनी हिंदू पहचान के साथ मजबूती से जुड़े रहे।
उनके सहपाठियों ने कई अलग अलग इंटरव्यू में कहा है, कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अलग अलग धार्मिक समूहों के बीच विवेक रामास्वामी आराम से रहते थे। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जीवविज्ञान का अध्ययन किया है, जहां वो हार्वर्ड पॉलिटिकल यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में, उन्होंने दक्षिण एशियाई संघ द्वारा आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में कॉमेडियन की भूमिका निभाई और हिंदू छात्र संघ धर्म में वो काफी सक्रिय रहे।
विवेक रामास्वामी ने उस वक्त बॉबी जिंदल के लिए एक छात्र नेता के तौर पर काम किया, जो उस वक्त अमेरिकी राजनीति में चमकते हुए सितारा था, जो लुइसियाना के गवर्नर बनने से पहले 2004 में हार्वर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में विजिटिंग फेलो थे और राष्ट्रपति पद के लिए रेस में शामिल होने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी थे।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विवेक रामास्वामी के सहपाठी और प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ सैकत चक्रवर्ती ने कहा, कि "जब हम कॉलेज में थे, तो आपने मुझसे पूछा होता, कि क्या एक भारतीय अमेरिकी होना उनकी पहचान का एक बड़ा हिस्सा है, तो मैंने हां कहा होता।"
विवेक रामास्वामी अपनी हिंदू पहचान के साथ आगे बढ़ रहे हैं और अब अगले कुछ महीनों में रिपब्लिकन पार्टी को तय करना है, कि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार किसे बनाया जाता है। अगर विवेक रामास्वामी उम्मीदवार बनते हैं, तो निश्चित तौर पर ये भारतीय प्रवासियों के लिए गर्व की बात होगी।












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