Venezuela: राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के जीतने से वेनेजुएला में गृहयुद्ध के हालात, क्या अमेरिका की है साजिश?
Venezuela News: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला प्रदर्शन की आग से जल उठा है और देश एक खतरनाक गृहयुद्ध की तरफ मुड़ चुका है। लोगों में देश के ताकतवर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लगातार तीसरी बार जीतने से भीषण आक्रोश फैल गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अभी तक एक शख्स की मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई है, जबकि कई शहरों में भीषण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। आरोप है, कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने बेइमानी करके जीत हासिल की है।

वेनेजुएला के अभी क्या हैं हालात?
वेनेजुएला के काउंटी के चुनावी प्राधिकरण ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनाव में विजेता घोषित किया है, लेकिन लोगों का आरोप है, कि चुनाव में धोखाधड़ी हुई है।
राजधानी कराकास में, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया है, जबकि रविवार को मादुरो की जीत पर गुस्सा बढ़ने के कारण लोगों की भीड़ मुख्य सड़क पर बर्तन बजाते हुए देखी गई। वेनेजुएला के मानवाधिकार संगठन PROVEA ने कहा है, कि राष्ट्रपति मादुरो के समर्थक सशस्त्र समूहों ने एवेन्यू उरदानेटा में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं हैं।
माराके सहित अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं और CNN ने देश के विपक्षी नेता एस्तेफ़ानिया नटेरा के हवाले से बताया है, कि "सच बताने की मांग को लेकर हम सड़कों पर हैं, क्योंकि हम वास्तविक परिणाम जानते हैं।" रिपोर्ट के मुताबिक, तटीय राज्य फाल्कन में, प्रदर्शनकारियों ने मादुरो की एक प्रतिमा को गिरा दिया हैं और सोशल मीडिया पर विरोधी प्रदर्शनों के दर्जनों वीडियो वायरल हो रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर शासन के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, तो देश में अशांति की एक नई लहर आ सकती है। पिछले वर्षों में सड़कों पर हुए प्रदर्शनों को देश की सेना ने कुचल दिया था, जिसने लंबे समय से मादुरो और उनके पूर्ववर्ती दिवंगत ह्यूगो शावेज का समर्थन किया है।
सोमवार की रात, राष्ट्रपति मादुरो ने कहा, कि उनकी सरकार "जानती है कि इस स्थिति का सामना कैसे करना है और हिंसक लोगों को कैसे हराना है।"
उन्होंने बिना सबूत के दावा किया, कि प्रदर्शनकारियों में से ज्यादातर नफरत से भरे अपराधी थे और उनकी योजना संयुक्त राज्य अमेरिका में रची गई थी।
मादुरो को नेशनल इलेक्टोरल काउंसिल (CNE) ने एक समारोह में औपचारिक रूप से विजेता घोषित किया है, और इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति के समर्थन भरे हुए थे। लेकिन, CNE ने अभी तक आधिकारिक तौर पर चुनाव की टैली जारी नहीं किए हैं, जिससे लोगों में आक्रोश और भरा हुआ है।
लेकिन, CNE के अध्यक्ष एल्विस एमोरोसो ने औपचारिक घोषणा से पहले कहा है, कि "वेनेजुएला में दुनिया की सबसे अच्छी चुनावी प्रणाली है!"
लेकिन, विपक्षी नेताओं का कहना है, कि चुनावों में जमकर धांधली की गई है। विपक्ष ने कहा है, कि उसके गवाहों को वोटों की गिनती के दौरान नेशनल इलेक्टोरल काउंसिल (CNE) मुख्यालय में नहीं जाने दिया गया और आरोप लगाया, कि चुनाव प्राधिकरण ने और ज्यादा वोटिंग होने से रोक दिया। सरकार पर पहले भी वोटों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया है, जिसका उसने खंडन किया है।

राष्ट्रपति मादुरो का देश पर कितना कंट्रोल?
राष्ट्रपति मादुरो की सरकार लगभग सभी राज्य संस्थानों को नियंत्रित करती है, जिसमें CNE भी शामिल है। साल 2017 में आरोप लगे थे, कि CNE को जिस कंपनी ने चुनावी सॉफ्टवेयर दिए थे, वहीं से धोखाधड़ी की गई थी और मतदान के आंकड़ों में हेरफेर की गई थी। CNE ने इस दावे का खंडन कर दिया था।
लेकिन, मारिया कोरिना मचाडो के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने इस बार राष्ट्रपति मादुरो की जीत को खारिज कर दिया है। मचाडो और विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने दावा किया है, कि उनके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त वोट मिले हैं। सोमवार को उन्होंने कहा, कि उन्होंने 73% से ज्यादा टैली शीट हासिल की हैं। उनका दावा है, कि उन्हें 60 लाख वोट मिले हैं, जबकि राष्ट्रपति मादुरो को सिर्फ 27 लाख ही वोट मिले हैं।
विपक्षी नेता मचाडो ने कहा कि "सभी आंकड़ों को सत्यापित किया गया हैं, उन्हें जोड़ा गया है, स्कैन किया गया है, डिजिटल किया गया और फिर एक मजबूत वेब पोर्टल पर अपलोड किया गया।" उन्होंने कहा, कि "कई वैश्विक नेता पोर्टल की जांच कर रहे हैं।"
मंगलवार को और ज्यादा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों का आह्वान किया गया है। जवाब में, वेनेजुएला की नेशनल असेंबली (मादुरो के प्रति वफादार निकाय) के डिप्टी जॉर्ज रोड्रिगेज ने कहा, कि CNE परिणामों में, जिसमें 80% मतों की गणना पहले ही हो चुकी है, मादुरो को 51.2% मतों के साथ आगे दिखाया गया है, उसके बाद एडमंडो को 44.2% मत मिले हैं।
मचाडो और गोंजालेज एक एकीकृत विपक्षी आंदोलन का हिस्सा हैं, जिसने अपने मतभेदों को दूर करके डेमोक्रेटिक यूनिटरी प्लेटफ़ॉर्म के नाम से गठबंधन बनाया है। इसे मादुरो के शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया था।

क्या हिंसा के पीछे अमेरिका की है साजिश?
वेनेजुएला में प्रदर्शन के बीच अमेरिका के साथ साथ पेरू और चिली ने भी चुनाव में पारदर्शिता की मांग की है और इन देशों ने परिणाम की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
अमेरिका ने सोमवार को वेनेजुएला के नागरिक समाज समूहों और विपक्ष के साथ मिलकर वेनेजुएला की सरकार से राष्ट्रपति चुनाव पर विशिष्ट डेटा "तुरंत" जारी करने का आह्वान किया, जिसमें मादुरो की जीत की विश्वसनीयता के बारे में चिंता जताई गई।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय खिलाड़ी ब्राजील ने अभी तक नरम रुख अपना रखा है, लेकिन उसने भी कहा है, कि वह "राष्ट्रीय चुनाव परिषद की तरफ से डेटा जारी होने का इंतजार कर रहा है। जो चुनाव परिणामों की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और वैधता के लिए एक आवश्यक कदम है।"
लेकिन वेनेजुएला की सरकार ने कहा है, कि वह अर्जेंटीना, चिली, कोस्टा रिका, पेरू, पनामा, डोमिनिकन गणराज्य और उरुग्वे से अपने डिप्लोमेट्स को निकाल रहा है और उन्होंने इन देशों को 'अमेरिका का गुलाम' कहा है। वेनेजुएलान सरकार ने कहा है, कि 'ये घिनौने फासीवादी विचारधारा' के लिए प्रतिबद्ध हैं।
लेकिन, आरोप हैं कि मतदान की निगरानी के लिए बहुत सीमित संख्या में चुनाव पर्यवेक्षकों को ही इजाजत दी गई थी। इनमें कार्टर सेंटर और संयुक्त राष्ट्र शामिल थे, जिन्होंने देश के चुनाव आयोग (सीएनई) से मतदान केंद्र स्तर के परिणाम प्रकाशित करने का भी आह्वान किया है। वाशिंगटन ऑफिस ऑन लैटिन अमेरिका (डब्ल्यूओएलए) में वेनेजुएला कार्यक्रम के डायरेक्टर लॉरा क्रिस्टीना डिब ने CNN को बताया है, कि "कार्टर सेंटर के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है।" उन्होंने बताया, कि यह एकमात्र अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अवलोकन मिशन है, जो परिणामों पर एक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी कर सकता है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है, कि यह कब जारी किया जाएगा।
बाइडेन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है, कि वेनेज़ुएला के चुनाव अधिकारियों को चुनाव के "विस्तृत प्रीसिंक्ट-स्तर के परिणाम" जारी करने चाहिए। एक वरिष्ठ प्रशासन अधिकारी ने कहा है, कि वेनेज़ुएला कानून के तहत यह डेटा आवश्यक है और इसे फौरन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। दूसरे अधिकारी ने कहा, कि अगर चुनाव परिणाम विश्वसनीय हैं, तो "डेटा जारी करना काफी आसान काम होना चाहिए और सरकार को तत्काल डेटा जारी करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।"












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