WHO को ट्रंप ने लगाया 2100 करोड़ का चूना, कर्जा उधार छोड़कर अमेरिका ने संगठन को कहा गुडबाय
एक साल पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा फैसला लेते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अमेरिका को बाहर करने वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। व्हाइट हाउस लौटने के बाद ट्रम्प ने 100 से ज्यादा आदेशों पर साइन किए थे, जिनमें WHO से बाहर निकलने वाला आदेश भी शामिल था। उस वक्त ट्रम्प ने इसे "एक बड़ा कदम" बताया था। अब एक साल के नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद अमेरिका आधिकारिक रूप से WHO से अलग हो चुका है।
ट्रम्प ने क्यों छोड़ा WHO?
डोनाल्ड ट्रम्प का तर्क साफ था-खर्च में कटौती। उन्होंने कहा कि WHO अमेरिका से जरूरत से ज्यादा पैसा लेता है। ट्रम्प इससे पहले अपने पहले कार्यकाल में भी WHO से बाहर निकलने की कोशिश कर चुके थे। आदेश पर हस्ताक्षर करते वक्त ट्रम्प ने कहा था- "वर्ल्ड हेल्थ ने हमें लूटा है। हर कोई अमेरिका को लूटता है। अब ऐसा नहीं होगा।"

WHO को पैसा कैसे मिलता है?
WHO को कुल 193 सदस्य देशों की सरकारों और अन्य दानदाताओं से फंडिंग मिलती है। यह फंडिंग दो तरह की होती है-अनिवार्य और स्वैच्छिक। मेंडेटरी डोनेशन (Mandatory Donation) किसी देश की जनसंख्या और उसकी आर्थिक स्थिति के हिसाब से तय होता है और हर साल इसमें बदलाव हो सकता है।
हमसे बहुत पैसा लिया-ट्रंप
अमेरिकी सरकार का आरोप था कि WHO अमेरिका से "अनुचित रूप से बहुत ज्यादा भुगतान" की मांग करता है। कार्यकारी आदेश में साफ लिखा गया था कि अमेरिका का योगदान बाकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
चीन का उदाहरण देकर ट्रम्प ने क्या कहा?
कार्यकारी आदेश में चीन का खास तौर पर जिक्र किया गया। इसमें कहा गया कि चीन की आबादी 1.4 अरब है, जो अमेरिका की जनसंख्या से करीब 300 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन इसके बावजूद चीन WHO को अमेरिका से लगभग 90 प्रतिशत कम योगदान देता है। यही तुलना अमेरिका की सबसे बड़ी वित्तीय शिकायतों में से एक थी।
पैसा ही नहीं कार्यप्रणाली भी बनी वजह
फंडिंग से पहले ट्रम्प प्रशासन ने WHO के कामकाज पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। आदेश में कहा गया कि WHO कोविड महामारी और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने में असफल रहा। इसमें यह भी दावा किया गया कि संगठन जरूरी सुधारों को अपनाने में नाकाम रहा और वह राजनीतिक दबाव से खुद को स्वतंत्र नहीं रख पाया।
सिर्फ WHO ही नहीं कई और ऑर्गनाइजेशन को किया नमस्ते
7 जनवरी को ट्रम्प प्रशासन ने 35 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से बाहर निकलने की योजना की भी घोषणा की थी। व्हाइट हाउस के एक ज्ञापन में कहा गया कि ट्रम्प ने घरेलू प्राथमिकताओं-जैसे बुनियादी ढांचा, सैन्य तैयारी और सीमा सुरक्षा-पर फोकस करने के लिए यह फैसला लिया।
अमेरिका पर WHO का कितना बकाया था?
पहले बताया गया था कि अमेरिका को 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए WHO को भुगतान करना था। NPR की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका पर WHO का करीब 228 मिलियन डॉलर (लगभग 2100 करोड़ भारतीय रुपए) बकाया था, लेकिन 20 जनवरी तक यह भुगतान नहीं किया गया था।
WHO क्या है और यह करता क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष स्वास्थ्य एजेंसी है। इसका काम मपॉक्स, इबोला, पोलियो जैसी वैश्विक बीमारियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को समन्वित करना है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है और यह दुनियाभर में स्वास्थ्य संकटों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
गरीब देशों के लिए WHO की भूमिका
WHO गरीब देशों को तकनीकी मदद देता है, टीकों और दवाओं की सप्लाई में सहयोग करता है और मानसिक स्वास्थ्य, कैंसर समेत सैकड़ों बीमारियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है। हालांकि WHO किसी भी देश को जबरन कुछ करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, यह सिर्फ सलाह देता है।
अमेरिका के बाहर निकलने से क्या खतरा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के बाहर निकलने से दुनिया की महामारी से लड़ने की ताकत कमजोर हो सकती है। अमेरिका लंबे समय से WHO का सबसे बड़ा दानदाता रहा है और उसने संगठन को सैकड़ों पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट भी दिए हैं।
अमेरिका का आर्थिक योगदान कितना बड़ा था?
पिछले दस सालों में अमेरिका ने WHO को हर साल करीब 160 मिलियन डॉलर से 815 मिलियन डॉलर तक दिए हैं। WHO का कुल सालाना बजट लगभग 2 से 3 अरब डॉलर का होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के बाहर जाने से पोलियो उन्मूलन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और नए वायरस की पहचान जैसे कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
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