रूस की S-400 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल से थर-थर कांपता है अमेरिका, एक बार में उड़ा सकती है 80 विमान
मास्कोः हाल ही के कुछ महीनों में मास्को और वाशिंगटन में तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सीरिया में हुए केमिकल अटैक के बाद दुनिया के दो ताकतवर देश आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सीरिया पर हमला करने की बात कही तो वहीं रूस ने भी धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर सीरिया पर हमला किया गया तो रूस- अमेरिका के हमले का करारा जवाब देगा।

अमेरिका के लिए चुनौती है रूस की ये मिसाइल
लेकिन अमेरिका के लिए सीरिया में सबसे बड़ी चुनौती है एस-400 मिसाइलों का एक बेस होना। ये मिसाइलें रूस द्वारा सीरिया में स्थापित की गई थी। एस-400 मिसाइल को काफी ताकतवर माना जाता है। इन मिसाइलों में विमान, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता होती है, जो मध्यम दूरी की मिसाइलें के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। एस -400 मिसाइल को पहले साल 2015 में सीरिया में तैनात किया गया था, ये मिसाइल 248 मील की दूरी के क्षेत्र का कवर करने की क्षमता रखती है।

एक साथ भेद सकती है 80 लक्ष्य
ये मिसाइलें एक साथ 80 लक्ष्यों को भेद सकती है। इन मिसाइलों की स्पीड 10,000 मील प्रति घंटे से अधिक होती है। रूस इन मिसाइलों को ईरान और तुर्की को बेचने की सोच रहा है। ये दोनों देश अमेरिका के खिलाफ रहते हैं। रूस इसका फायदा उठाना चाहता है। नवंबर 2015 में सीरिया की सीमा पर रूस के एक विमान पर तुर्की ने हमला कर दिया था, जिसके बाद रूस ने सीरिया में अपने बेस पर एस -400 मिसाइलें का बेस तैयार किया था।

रूस ने दी अमेरिका को चुनौती
शनिवार को सीरिया में केमिकल हमला हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस रसायन हमले में कई लोगों के शिकार होने की खबर है। इस अटैक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस चुनौती की तरह लिया। जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीट करके रूस पर तज कसा तो रूस ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका जो भी योजना बना रहा है उससे बचे। उनका कहना था कि अमेरिकी मिसाइलों का रूख आतंकवादियों की तरफ होना चाहिए ना कि कानूनी सरकार पर। वहीं रूस इस केमिकल अटैक मानने को तैयार नहीं है। रूस का कहना है कि उसने अपने खुद के रक्षा विशेषज्ञों से जांच कराई है, जिसमें असद पर लगाए गए रासायनिक हमले का कोई भी सबूत नहीं मिला है।












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