बाग्राम एयरपोर्ट से 20 सालों बाद निकली यूएस फौज, जानिए अमेरिका के लिए कितना महंगा रहा अफगानिस्तान?
करीब 20 सालों के बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में बाग्राम एयरफील्ड को खाली कर दिया। जानिए 20 सालों में अमेरिका को अफगानिस्तान में क्या कीमत चुकानी पड़ी।
काबुल, जुलाई 02: करीब 20 साल पहले अफगानिस्तान से आतंकियों का सफाया करने के मकसद से अमेरिकी सेना सबसे पहले बाग्राम एयरपोर्ट पर ही उतरी थी और आज 20 सालों के बाद जब अमेरिकी फौज ने अफगानिस्तान में बनाए अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे को अलविदा कहा, तो कम से कम उसके हाथों में कामयाबी की मिसाल तो नहीं थी। तालिबान फिर से एक्टिव है और अगले 6 महीनों में अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने ही आशंका जताई है कि तालिबान, अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लेगा। वहीं, अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को जरूर मार दिया, लेकिन एक बार फिर से अलकायदा अफगानिस्तान में सिर उठाने लगा है।

बाग्राम एयरपोर्ट से विदाई
अमेरिकी सेना ने अब बाग्राम एयरपोर्ट और एयरफील्ड को पूरी तरह से अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा बल को सौंप दिया है। हालांकि, सैनिकों की सुरक्षा का अधिकार और सैन्य क्षमताएं अभी भी अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल एस मिलर के पास है, लेकिन वो भी चंद दिनों के लिए। एक अफगानिस्तानी मिलिट्री अधिकारी ने इस बात की पुष्टि नाम ना छापने की शर्त पर कर दी है कि बाग्राम एयरपोर्ट को अमेरिकी सेना ने पूरी तरह से खाली कर दिया है। अफगानिस्तानी न्यूज टोलो न्यूज के मुताबिक राजधानी काबुल से 69 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित इस एयरपोर्ट से अमेरिकी सैनिकों को उड़ान भरते देखा गया है। बताया जा रहा है कि करीब 2500 से 3500 अमेरिकी फौज आज अफगानिस्तान को छोड़कर अमेरिका के लिए रवाना हो गये हैं।

करोड़ों का कचरा छोड़ा
टोलो न्यूज के मुताबिक अमेरिकी सेना बाग्राम एयरपोर्ट पर अपने पीछे बर्बाद हो चुके ट्रकों और दूसरे मलबों को छोड़ रही है। स्क्रैप खरीदने वाले व्यापारियों का कहना है कि करोड़ों रुपये का मलबा यूएस सैनिकों ने एयरपोर्ट पर छोड़ दिया है। कुछ लोगों ने मांग की थी कि यूएस फोर्स को इस तरह के सामान अफगान सैनिकों के हवाले कर देनी चाहिए थी, लेकिन अमेरिकी सैनिकों ने आतंकियों के हाथ ऐसे सामान पड़ने के डर से उन्हें नष्ट कर दिया। वहीं, अफगानिस्तान सरकार ने कहा है कि करीब 1 अरब डॉलर के सामान अमेरिकी फौज ने अफगान फौजियों के हवाले किया है। आपको बता दें कि बाग्राम एयरफील्ड पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा एयरबेस रहा है। अमेरिकी सेना ने 1 मई को वापसी शुरू की थी और 11 सितंबर से पहले अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकल जाना है।

तालिबान कैसे हुआ था सत्ता से बाहर
सितंबर 2001 में अमेरिका में हुए हमलों के बाद अमेरिकी फौज ने उस वक्त अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान से जिम्मेदार आतंकियों को सौंपने के लिए कहा था। लेकिन, तालिबान ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद अमेरिका और नाटो सेना ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया था, वहीं, अफगानिस्तान में मौजूद तालिबान विरोधी गुट ने अमेरिकी और ब्रिटिश फौज की जबरदस्त मदद की थी। जिसके बाद पश्चिमी देशों की फौज ने सत्ता से तालिबान को हटा दिया और फिर अलकायदा को पाकिस्तान की सीमा पर खदेड़ते हुए बाद में ओसामा बिन लादेन को भी मौत के घाट उतार दिया था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब से अमेरिकी फौज ने अफगानिस्तान की धरती पर कदम रखा था, उसके बाद से अफगानिस्तान की धरती से किसी दूसरे देश पर एक भी आतंकी हमला नहीं हुआ, लेकिन एक बार फिर से तालिबान काफी तेजी से अफगानिस्तान में अपना विस्तार कर रहा है।

तेजी से पांव फैलाता तालिबान
आपको बता दें कि जब से अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी फौज निकालने का ऐलान किया है, तब से तालिबान अफगानिस्तान में लगातार पैर पसार रहा है। हाल ही में अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेबरा लियोन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी थी कि अगर तालिबान को नहीं रोका गया, तो वह पहले की तरह अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लेगा। उनके मुताबिक, मई से अब तक तालिबान ने 50 से ज्यादा जिलों पर हमला कर कब्जा कर लिया है। कुछ दिन पहले तालिबान ने अपने एक बयान में साफ कर दिया था कि वे अफगानिस्तान में इस्लामिक कानून लागू करना चाहते हैं। उनके मुताबिक वह इस कानून के आधार पर महिलाओं को भी अधिकार देंगे। उनके इस बयान ने तालिबान शासन खत्म होने के बाद खुली हवा में सांस लेने वाली महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों की राय में अगर तालिबान दोबारा सत्ता में आता है तो यहां की महिलाओं को एक बार फिर अपने घरों में कैद रहना पड़ सकता है।












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