अमेरिका में अब नस्ल के आधार पर नहीं होगा कॉलेज में एडमिशन, US सुप्रीम कोर्ट का फैसला
US Supreme Court On race-based college admissions: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब नस्ल के आधार पर किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में एडमिशन नहीं होगा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नस्ल को किसी कॉलेज में एडमिशन का आधार नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि नस्ल को अब यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए एक कारण के तौर पर नहीं माना जा सकता है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस ऐतिहासिक फैसले से दशकों से चली आ रही पुरानी अमेरिकी नीतियों को खत्म कर दिया है। यह अमेरिकी शिक्षा में सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक था।
अमेरिका के कुछ लोगों को ये फैसला सकारात्मक लग रहा है। वहीं कुछ लोग इसके खिलाफ भी हैं। पहली बार साल 1960 के दशक में यह नीति अमेरिका में अपनाई गई और फिर से विविधता बढ़ाने के उपाय के रूप में बचाव किया गया। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अमेरिका के शिक्षा विभाग ने इसकी आलोचना की है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन बोले- मैं फैसले से असहमत हूं
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वह गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के इस बहुप्रतीक्षित फैसले से पूरी तरह असहमत हैं। जो बाइडेन ने कहा, ''हम इस फैसले को आखिरी फैसला नहीं बनने दे सकते हैं।अमेरिका में भेदभाव अभी भी मौजूद है।''
जो बाइडेन ने कहा, ''यह कोई सामान्य अदालत नहीं है। जिन नौ न्यायाधीशों ने ये फैसला सुनाया है, वो भी वैचारिक रूप से छह रूढ़िवादियों और तीन उदारवादियों के बीच बंटे हुए हैं।''
अमेरिकी शिक्षा विभाग ने क्या कहा?
बीबीसी न्यूज के मुताबिक अमेरिकी शिक्षा सचिव मिगुएल कार्डोना ने कहा कि कोर्ट ने ये फैसला देकर बहुत ही जरूरी उपकरण छीन लिए हैं, जो यूनिवर्सिटी में विविधता सुनिश्चित करने के काम आते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि हमसे से कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता है कि हमारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी देश की तरह सुंदर विविध छात्रों से मिलकर बने हैं। इस फैसले के बाद भी व्हाइट हाउस विश्वविद्यालयों के लिए मार्गदर्शन जारी करेगा।












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