भारत में 2021 में धार्मिक असहिष्णुता और धार्मिक जगहों पर हमले बढ़े, अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपनी रिपोट में उन देशों के उदाहरण के रूप में वियतनाम और नाइजीरिया का भी हवाला दिया जहां धार्मिक अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाया जा रहा है।
वॉशिंगटन, जून 03: अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि, भारत में धार्मिक असहिष्णुता की वजह से धार्मिक स्थलों पर हमलों में वृद्धि देखी गई है। दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग ने यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें भारत को लेकर कई दावे किए गये हैं।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में, जो कई धर्मों को मानने वालों का घर है, वहां धार्मिक स्थलों पर हमलों की संख्या में इजाफा हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि, इन हमलों में हत्याएं, मारपीट और उत्पीड़न शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, "... भारत में, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, और विश्वासों की एक महान विविधता के लिए, हमने लोगों और पूजा स्थलों पर बढ़ते हमलों को देखा है"। एंटनी ब्लिंकन ने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की 2021 की रिपोर्ट जारी करते हुए ये बातें कही हैं।

वियतनाम और नाइजीरिया का भी हवाला
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपनी रिपोट में उन देशों के उदाहरण के रूप में वियतनाम और नाइजीरिया का भी हवाला दिया जहां धार्मिक अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाया जा रहा था। इस रिपोर्ट में साल 2021 में दुनियाभर के देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का आकलन शामिल है और अमेरिकी विदेश विभाग के लिए ये रिपोर्ट इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (आईआरएफ) के राजदूत रशद हुसैन के नेतृत्व में संकलित किया गया है। यह दस्तावेज़ अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) द्वारा जारी IRF रिपोर्ट से अलग है। अप्रैल में आयोग ने लगातार तीसरे वर्ष विदेश विभाग से सिफारिश की थी, कि भारत को 'विशेष चिंता वाले देश (सीपीसी)' के रूप में वर्गीकृत किया जाए। इस श्रेणी में वैसे देश रखे जाते हैं, जिनका रिकॉर्ड धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में सबसे ज्यादा खराब होता है। हालांकि, भारत को सीपीसी की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है और नाही अमेरिकी विदेश विभाग इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य है।

रशद हुसैन ने भारत पर क्या कहा?
वहीं, इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले रशद हुसैन ने कहा कि, ‘जैसा की विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, भारत में कुछ अधिकारी लोगों और पूजा स्थलों पर बढ़ते हमलों की अनदेखी या समर्थन कर रहे हैं'। आपको बता दें कि, धार्मिक स्वतंत्रता प्रतिबंधों वाले देशों की लिस्ट में सऊदी अरब के साथ-साथ चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों को रखा गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, ‘चीन मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के नरसंहार और दमन को जारी रखता है।" उन्होंने कहा कि, "अप्रैल 2017 से शिनजियांग में 10 लाख से अधिक उइगर जातीय कज़ाख, किर्गिज़ और अन्य लोगों को नजरबंदी शिविरों में हिरासत में रखा गया है।" अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, पाकिस्तान में साल 2021 में कम से कम 16 व्यक्तियों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था या अदालतों द्वारा मौत की सजा सुनाई गई है।

'महत्वपूर्ण विदेश नीति प्राथमिकता'
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को कहा कि, धार्मिक स्वतंत्रता केवल एक मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि एक "महत्वपूर्ण विदेश नीति प्राथमिकता" है। अप्रैल में वाशिंगटन डीसी में अमेरिका-भारत "2+2" रक्षा और विदेश मंत्रियों के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि, अमेरिका भारत में मानवाधिकारों के संबंध में "हाल के घटनाक्रम" पर नज़र रख रहा है। गुरुवार को एंटनी ब्लिंकन ने मोरक्को, तिमोर लेस्ते, ताइवान और इराक को उन देशों के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जहां धार्मिक स्वतंत्रता में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि, कुछ देश नागरिकों के "मूल अधिकारों" का सम्मान नहीं कर रहे हैं, जिसमें धर्म परिवर्तन और ईशनिंदा कानूनों का उपयोग करना और धार्मिक अभिव्यक्ति को कम करना शामिल है, जिसमें धार्मिक पोशाकों को भी प्रतिबंधित करना शामिल है।

भारत पर रिपोर्ट में क्या कहा गया?
इंडिया कंट्री रिपोर्ट में कहा गया है कि, "धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर हमले, जिनमें हत्याएं, हमले और डराना-धमकाना शामिल है, साल भर होते रहे। इनमें गोहत्या या बीफ के व्यापार के आरोपों के आधार पर गैर-हिंदुओं के खिलाफ 'गौ सतर्कता' की घटनाएं शामिल हैं'। यह रिपोर्ट ‘भारत खंड' देश में धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें कहा गया है कि, भारत के 28 राज्यों में धर्मांतरण कानून है और इस कानून के तहत कई गिरफ्तारियां की गईं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, "पुलिस ने गैर-हिंदुओं को मीडिया या सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया, जिन्हें हिंदुओं या हिंदू धर्म के लिए अपमानजनक माना जाता है।"

हिंदूओं पर हमले का जिक्र
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘जम्मू-कश्मीर में संदिग्ध आतंकवादियों के द्वारा हिंदू और सिख अल्पसंख्यों को निशाना बनाया गया, उन्हें मारा गया, प्रवासियों को निशाना बना गया, जिसमें बिहार के मजदूर भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में प्रवासियों का पलायन हो रहा है'। इस रिपोर्ट में पिछले साल त्रिपुरा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों की लिंचिंग की घटनाओं का भी जिक्र है।












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