अब सस्ते दर पर लोन नहीं ले पाएगा चीन, अमेरिका ने छीना दर्जा, गुस्से से आग बबूला हुआ ड्रैगन
अमेरिका के इस कदम पर चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि यह तय करना अमेरिका का काम नहीं है कि चीन एक विकासशील देश है या नहीं।
अमेरिकी संसद में चीन को आर्थिक तौर पर कमजोर करने के लिए मंगलवार को एक नए कानून को मजूंरी दे दी गई है। इस नए कानून का उद्देश्य चीन के विकासशील देश के स्टेट्स को हटाना है।
अमेरिका के इस कदम से चीन को करारा झटका लगने वाला है। अंकल सैम के इस कदम से चीन, अब विश्व बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थाओं से आसानी से और कम ब्याज पर लोन हासिल नहीं कर पाएगा।

दरअसल चीन अपने विकासशील देश होने के स्टेट्स का खूब फायदा उठाता है। वह विश्व बैंक जैसे वित्तीय संस्थाओं से सस्ते कर्ज लेकर अविकसित देशों को महंगी शर्तों पर लोन देकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसा लेता है।
लेकिन अब बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब ऐसा कोई भी वित्तीय संस्थान जिसकी फंडिंग में अमेरिका शामिल है, वह आसानी से या सस्ती दर पर चीन को लोन नहीं दे पाएगा।
अमेरिकी संसद में ये माना गया कि चीन अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में उसे अन्य विकासशील देशों की तरह रियायत नहीं दी जा सकती।
इसी साल मार्च में अमेरिकी संसद के निचले सदन में "विकासशील राष्ट्र स्थिति अधिनियम" के रूप में जाना जाने वाले इस कानून को विदेश संबंध समिति द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
अमेरिका में चीन के खिलाफ कितना तगड़ा माहौल बन चुका है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब इस बिल पर मार्च में वोटिंग हुई थी तो कुल 415 सांसदों में से एक भी सांसद ने चीन के पक्ष में वोट नहीं डाला।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 9/11 हमले के बाद बीते 22 सालों में ये पहला मौका था जब किसी प्रस्ताव को लेकर हर एक सांसद की सहमति थी। अमेरिकी सांसदों का कहना था कि चीन को अब उसकी महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति और दुनिया भर में व्यापक निवेश को देखते हुए एक विकासशील देश नहीं माना जा सकता है।
अमेरिकी सांसदों ने ये दावा किया कि बहुपक्षीय वार्ताओं में अनुचित लाभ के लिए चीन इस स्टेट्स का फायदा उठाता रहा है। इसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 27 मार्च को 415 से 0 के सर्वसम्मत वोट के साथ चीन एक विकासशील देश अधिनियम नहीं है पारित कर दिया।
इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सांसदों का मानना है कि चीन को वित्तीय संस्थाओं से जो सस्ता कर्ज हासिल हुआ, उसने उसका इस्तेमाल 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' में किया। चीन ने सस्ता कर्ज लेकर गरीब देशों में मनमाफिक शर्तों पर बांट दिया। चीन की इसी परियोजना की वजह से कई देश कर्ज के जाल में फंस गए।
हडसन इंस्टीट्यूट में एशिया-प्रशांत सुरक्षा परियोजना के निदेशक और अमेरिकी रक्षा विभाग और विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी, पैट्रिक क्रोनिन ने अप्रैल में 'अल जजीरा' चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि चीन डेवलपिंग कंट्री स्टेटस का फायदा उठा रहा है और एक साथ दो स्तरों पर लाभ ले रहा है।
इस बीच अमेरिका के इस कदम पर चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि यह तय करना अमेरिका का काम नहीं है कि चीन एक विकासशील देश है या नहीं।
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देश के रूप में चीन की स्थिति तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून में निहित है, और यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे अमेरिकी कांग्रेस के बिल द्वारा आसानी से मिटाया जा सकता है।
वांग वेनबिन ने एक नियमित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, "चीन के विकास की सफलता की प्रशंसा या मान्यता के कारण अमेरिका चीन को 'विकसित देश' नहीं कह रहा है। चीन के विकासशील देश का दर्जा समाप्त करने के पीछे असली मकसद चीन के विकास को रोकना है।"
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