US Sanctions Impact: अमेरिकी प्रतिबंधो से बर्बाद हुआ ये देश, तेल खत्म तो बैलगाड़ियों से ढोया जा रहा सामान
Cuba fuel Crisis: क्यूबा इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ पिछले साल आए चक्रवात 'मेलिसा' की तबाही से हजारों लोग अब भी उबर नहीं पाए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से देश गंभीर ईंधन संकट से गुजर रहा है। हालात ऐसे हैं कि राहत सामग्री लोगों तक पहुंचाने के लिए ट्रक और गाड़ियों की जगह बैलगाड़ियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस अमेरिका ने क्यूबा पर आर्थिक और ईंधन संबंधी सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं, वही अब राहत सामग्री भी भेज रहा है। इस विरोधाभास ने एक बार फिर क्यूबा की मुश्किलें दुनिया के सामने ला दी हैं।

तूफान ने उजाड़े घर, अब तक नहीं संभल पाए लोग
चक्रवात मेलिसा ने क्यूबा के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। हजारों घरों की छतें उड़ गईं और कई परिवार बेघर हो गए। महीनों बीत जाने के बाद भी बहुत से लोग अपने घरों की मरम्मत नहीं करा पाए हैं। आर्थिक संकट और संसाधनों की कमी ने हालात और खराब कर दिए हैं। गांवों में रहने वाले लोग आज भी बिजली, साफ पानी और जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई परिवार अस्थायी इंतजामों के सहारे अपनी जिंदगी चला रहे हैं।
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तेल खत्म, बैलगाड़ी बनी लाइफलाइन
क्यूबा में ईंधन संकट इतना गंभीर हो चुका है कि कई जगहों पर गाड़ियां और ट्रक खड़े-खड़े बेकार हो गए हैं। पेट्रोल और डीजल की भारी कमी के कारण राहत सामग्री को गांवों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में वालंटियर्स ने पुराना तरीका अपनाया और बैलगाड़ियों के जरिए राशन व दवाइयां पहुंचानी शुरू कर दीं। ग्रामीण इलाकों में यही बैलगाड़ियां अब सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट बन गई हैं। संकट के इस दौर में पुराने साधन लोगों की मदद कर रहे हैं।
अमेरिका से मदद भी, प्रतिबंध भी
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अमेरिका एक तरफ क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ मानवीय सहायता भी भेज रहा है। अमेरिकी मदद के जरिए प्रभावित लोगों को चावल, बीन्स, कुकिंग ऑयल, डिब्बाबंद खाना, साबुन, टूथब्रश और पानी साफ करने की गोलियां दी जा रही हैं। यह सहायता कैथोलिक NGO कारिटास के जरिए लोगों तक पहुंच रही है। हालांकि कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रतिबंधों से संकट बढ़ रहा है तो सिर्फ राहत सामग्री भेजना क्या समस्या का स्थायी समाधान है?
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एक व्यक्ति की कहानी बताती है पूरा दर्द
सैंटियागो डे क्यूबा के रहने वाले तियोदार्दो देबार्देत की कहानी हालात की सच्चाई दिखाती है। एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा चुके तियोदार्दो हाथों से ट्राईसाइकिल चलाकर घर लौटते हैं। उनके घर की छत तूफान में उड़ गई थी और शौचालय भी पूरी तरह तबाह हो गया था। अमेरिकी राहत पैकेज मिलने से उन्हें कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बिजली और पानी की कमी आज भी बनी हुई है। उनकी कहानी क्यूबा के हजारों प्रभावित लोगों की स्थिति को दर्शाती है।
दुनिया ने बढ़ाया हाथ, लेकिन क्यूबा की मांग अलग
क्यूबा की मदद के लिए सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, चीन, वेनेजुएला और मैक्सिको भी आगे आए हैं। कई देशों ने राहत सामग्री और आर्थिक सहायता भेजी है। अमेरिका ने भी अतिरिक्त 100 मिलियन डॉलर की मदद की पेशकश की है। हालांकि क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल का कहना है कि असली समाधान राहत पैकेज नहीं बल्कि प्रतिबंधों को हटाना है। उनके मुताबिक जब तक व्यापार और ईंधन पर लगी पाबंदियां खत्म नहीं होंगी, तब तक क्यूबा की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं होंगी।












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