US President Election 2024: EVM या बैलेट बॉक्स... अमेरिका में कैसे होते हैं चुनाव?
US Election 2024: अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप ने आयोवा कॉकस में जीत दर्ज की और अब वे न्यू हैम्पशायर में होने वाले चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं।
ट्रंप को विवेक रामास्वामी का भी समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया। लिहाजा हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज शुरू कर चुके हैं। इसमें हम चुनाव से संबंधित दिलचस्प बातें आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरिज का दूसरा भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरिज आपको काफी पसंद आ रही होगी...

अमेरिकी चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली
भारत में कई विपक्षी नेता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते रहे हैं और अमेरिका का उदाहरण देते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से सच नहीं है कि अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का इस्तेमाल नहीं होता। 2020 के अमेरिकी चुनाव में, देश के 28 राज्यों में डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का प्रयोग किया गया था।
डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स क्या है?
डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कंपनी है, जिसकी शुरुआत 2003 में एक कनाडाई कंपनी के रूप में हुई थी। अब इसका मुख्यालय डेनवर और टोरंटो में है। यह कंपनी कंप्यूटर प्रोग्राम, डेटाबेस, चुनाव ऑडिट, टच-स्क्रीन वोटिंग मशीन, मतपत्र स्कैनर और मतपत्र प्रिंटर जैसे उत्पादों के जरिए चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने का काम करती है। डोमिनियन का दावा है कि यह अमेरिका के 40 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को अपनी सेवाएं देता है।
2020 के चुनाव में डोमिनियन पर विवाद
2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स को लेकर काफी विवाद हुआ। डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि इन मशीनों में धांधली की गई, जिससे उनके लाखों वोट डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन को मिल गए। फॉक्स न्यूज ने ट्रंप के इस दावे को समर्थन दिया, जिसके बाद डोमिनियन ने फॉक्स न्यूज पर 1.6 अरब डॉलर का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया।
फॉक्स न्यूज पर मुकदमा और समझौता
फॉक्स न्यूज पर लगे इस आरोप के बाद कोर्ट में मामला पहुंचा। हालांकि, कोर्ट का फैसला आने से पहले ही फॉक्स न्यूज और डोमिनियन के बीच समझौता हो गया, जिसके तहत फॉक्स ने 787.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। इस मामले में फॉक्स न्यूज के मालिक रुपर्ट मर्डोक ने भी माना कि ट्रंप के आरोप फर्जी थे, लेकिन उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से नहीं रोका।
अमेरिकी और भारतीय चुनावों में अंतर
अमेरिका और भारत के चुनावी प्रक्रियाओं में काफी अंतर है। जहां अमेरिका में इलेक्टोरल कॉलेज प्रणाली के तहत राष्ट्रपति का चुनाव होता है, वहीं भारत में संसद के सांसद मिलकर प्रधानमंत्री का चयन करते हैं।
- अमेरिकी इलेक्टोरल कॉलेज: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदाता सीधे राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं करते। इसके बजाय, वे "इलेक्टर्स" का चुनाव करते हैं। हर राज्य से चुने गए ये इलेक्टर्स फिर राष्ट्रपति के लिए वोट डालते हैं। इसमें 538 इलेक्टर्स होते हैं, जिनमें से 270 से अधिक इलेक्टोरल वोट प्राप्त करने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है।
- भारत में संसदीय प्रणाली: भारत में लोकसभा सांसदों का चुनाव होता है, जो प्रधानमंत्री का चयन करते हैं। यहां मतदाता सीधे सांसदों के लिए वोट करते हैं, न कि प्रधानमंत्री के लिए।
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा डोमिनियन पर लगाए गए धांधली के आरोपों के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को लेकर फिर से विवाद खड़ा हुआ। हालांकि, फॉक्स न्यूज के साथ हुए समझौते ने इस मामले को ठंडा कर दिया। अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया भारत से भले ही अलग हो, लेकिन दोनों ही देशों में चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता का महत्व समान है।












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