किम जोंग उन हीरो और खुद कहीं विलेन न बन जाएं, इसलिए डोनाल्‍ड ट्रंप ने पलटा नॉर्थ कोरिया के साथ वार्ता का फैसला!

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन की मुलाकात 12 जून को सिंगापुर में होनी थी लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने इस शिखर सम्‍मेलन को कैंसिल करने का ऐलान कर दिया।

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन की मुलाकात 12 जून को सिंगापुर में होनी थी लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने इस शिखर सम्‍मेलन को कैंसिल करने का ऐलान कर दिया। लेकिन एक ही दिन बाद फिर से उन्‍होंने अपना इरादा बदला और कहा कि अमेरिका-नॉर्थ कोरिया के अधिकारी इस शिखर सम्‍मेलन की तैयारी कर रहे हैं। अब 12 जून को सिंगापुर में क्‍या होगा इस पर कन्‍फ्यूजन बना हुआ है। बातचीत हो भी सकती है और नहीं भी। ट्रंप और किम जोंग की यह मुलाकात कई मायनों में एतिहासिक हो सकती है। अभी तक नॉर्थ कोरिया के किसी भी नेता की मुलाकात अमेरिका के किसी भी राष्‍ट्रपति से नहीं हुई है। जो कुछ भी हुआ है उससे एक बात तो साफ है कि अगर यह वार्ता नहीं हुई तो फिर ट्रंप की जगह‍ किम जोंग उन वाहवाही लूट ले जाएंगे और ट्रंप को दुनियाभर में आलोचना का शिकार होना पड़ेगा।

किम जोंग उन बन जाएंगे हीरो

किम जोंग उन बन जाएंगे हीरो

नॉर्थ कोरिया ने आज अगर साउथ कोरिया के साथ दोस्‍ती का हाथ मिलाया है और परमाणु परीक्षण न करने का वादा किया है तो इसके पीछे कई लोग डोनाल्‍ड ट्रंप को श्रेय दे रहे थे। इतना ही नहीं रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्‍यों ने तो ट्रंप के लिए नोबेल के शांति पुरस्‍कार के लिए चिट्ठी तक लिख डाली थी। वहीं इससे अलग किम जोंग उन जिन्‍हें कुछ लोग इन सारे घटनाक्रमों से पहले तानाशाह कहकर संबोधित करते थे, वह वार्ता कैंसिल होने पर एक अलग तरह के ही नेता के तौर पर उभरते। तल्‍ख तेवरों वाले किम जोंग उन ने अमेरिका और साउथ कोरिया के बीच जारी मिलिट्री एक्‍सरसाइज के बीच कहा था कि अमेरिका के साथ सिंगापुर में होने वाली वार्ता का भविष्‍य अभी तय नहीं हैं। जिन लोगों को इस बात की उम्‍मीद थी कि किम जोंग उन शिखर सम्‍मेलन कैंसिल करेंगे, वे सभी गलत साबित हो जाते। ट्रंप नहीं चाह रहे होंगे कि एक ताकतवर देश के मुखिया के तौर पर कोई उनसे यह मोमेंट छीने। साथ ही वार्ता अगर नहीं हुई तो फिर वह एक 'विलेन' और किम जोंग एक 'हीरो' वाली छवि विशेषज्ञों के बीच हासिल कर लेंगे।

अमेरिका की विश्‍वसनीयता पर सवाल

अमेरिका की विश्‍वसनीयता पर सवाल

नॉर्थ कोरिया की तरफ से इस बयान के बाद यहां की पुंग री परमाणु परीक्षण साइट को नष्‍ट किया जा चुका है, ट्रंप ने वार्ता खत्‍म करने का बयान दे डाला। ट्रंप का बयान जहां नॉर्थ कोरिया को नाराज करने वाला था तो कहीं न कहीं तमाम देशों के बीच अमेरिका और इसके राष्‍ट्रपति की बातों पर यकीन करने तक को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। चीन ने तो दोनों देशों को धैर्य रखने तक की सलाह दे डाली थी। चीन ने कहा था कि हाल ही में कोरियाई प्रायद्वीप में जो भी घटनाक्रम हुए हैं वे बहुत मुश्किल से जीते हुए पल हैं, ऐसे में अमेरिका और राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को धैर्य रखना होगा और आधे रास्‍ते तक आकर और फिर लौटना अच्‍छी बात नहीं है। चीन ने कहा था कि अगर यह वार्ता नहीं हुई तो फिर एक एतिहासिक पल हाथ से निकल जाएगा।

नॉर्थ कोरिया के रवैये ने बदल दी इमेज

नॉर्थ कोरिया के रवैये ने बदल दी इमेज

अमेरिका और नॉर्थ कोरिया को बातचीत की टेबल तक लाने में साउथ कोरिया और राष्‍ट्रपति मून जे इन ने खासी मेहनत की है। जैसे ही मून जे इन को इस बात का पता लगा कि ट्रंप ने मीटिंग कैंसिल कर दी है तो उन्‍होंने आधी रात में एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। वहीं दूसरी तरफ कई लोग इस बात की उम्‍मीद कर रहे थे कि ट्रंप के इस फैसले से नॉर्थ कोरिया की तरफ से उनका अपमान करने वाले कई बयान आ सकते हैं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ बल्कि नॉर्थ कोरिया के एक अधिकारी की तरफ से कहा गया कि वह अमेरिका के इस फैसले काफी निराश है और वह बातचीत का इच्‍छुक था। नॉर्थ कोरिया के इस बयान के बाद कहीं न कहीं अमेरिका की छवि कुछ मिनट के लिए एक अड़‍ियल देश की और नॉर्थ कोरिया की छवि एक नरम दिल वाले देश की बन गई थी। ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के इसी बयान के बाद अपना फैसला बदला और कहा कि 12 जून को होने वाली बातचीत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों देश के अधिकारी मीटिंग की तैयारियों में व्‍यस्‍त हैं।

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