'रूस या चीन नहीं है भारत...', कनाडा विवाद के बीच अमेरिका ने क्यों दिया ये बयान, बाइडेन प्रशासन की परीक्षा!
India is not Russia said US: कनाडा के साथ खालिस्तान विवाद के बीच अमेरिका का भारत को लेकर बड़ा बयान आया है। भारत की तुलना रूस और चीन जैसे देशों के साथ करने पर अमेरिका ने कहा है, कि 'भारत चीन या रूस जैसा नहीं है।'
संयुक्त राज्य अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) जैक सुलिवन ने कहा है, कि भारत "रूस नहीं है" और चीन की अपनी समस्याएं हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि संबंधित देशों के साथ व्यवहार करते समय वाशिंगटन उन सभी को संदर्भ में लेता है।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने यह टिप्पणी तब की, जब उनसे बाइडेन प्रशासन द्वारा भारत और चीन को रूस को आर्थिक मदद देने को लेकर "पास" देने के बारे में पूछा गया था।
अमेरिका का एनएसए जैक सुलिवन ने कहा, कि "हमने पीआरसी से खतरों के मुकाबले अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए कई तरह की कार्रवाई की है... हमारे पास हमारे टेक्नोलॉजी निर्यात नियंत्रण के संबंध में एक पूरी रणनीति है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल हमारे खिलाफ नहीं किया जा सके।"
'भारत नहीं है रूस या चीन'
उन्होंने कहा, कि राष्ट्रपति बाइडेन का प्रशासन, अमेरिका का पहला ऐसा प्रशासन है, जिसने चीन के खिलाफ इतने सख्त कदम उठाए हैं। एनएसए ने कहा, कि भारत "रूस नहीं" है जबकि शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले देश के पास चुनौतियों का अपना सेट है।
वहीं, कनाडा को लेकर पूछे गये सवाल पर जैक सुलिवन ने कहा, कि "कनाडा ने जो आरोप लगाए हैं, अमेरिका उनको लेकर काफी गंभीर है और अमेरिका, कनाडा के जांच का समर्थन करता है। अमेरिका का मानना है, जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।"
वहीं, इस सवाल पर, कि क्या जो बाइडेन ने इस मुद्दे को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की है, तो अमेरिकी एनएसए ने कहा, कि "नहीं, ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन दोनों ही देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत जरूर की गई है।"
अमेरिका के लिए परीक्षा की घड़ी
अमेरिका के लिए एशिया में सबसे बड़ा सहयोगी सिर्फ भारत है, जो चीन से सीधी टक्कर ले सकता है। जापान और दक्षिण कोरिया भले ही अमेरिका के काफी करीबी हैं, लेकिन ये दोनों देश भारत के मुकाबले काफी छोटे हैं और इनके पास भारत जितना ना ही विशालकाय जनसंख्या है और ना ही भारत की तरह, जियो-पॉलिटिकल फायदे हैं।
अगर अमेरिका सीधे तौर पर कनाडा मुद्दे पर भारत के खिलाफ उतरता है, तो ये एक ऐसा मुद्दा है, कि दोनों देशों के संबंध फौरन खराब हो जाएंगे और इसका संदेश यही जाएगा, कि जून महीने में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्हाइट हाउस के निमंत्रण पर अमेरिका का राजकीय दौरा किया था, उसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
इसके साथ ही, इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की रणनीति बुरी तरह से फेल हो जाएगी, लिहाजा अमेरिका फूंक फूंक कर कदम रख रहा है और अभी तक भारत के खिलाफ सीधा बयान जारी करने से परहेज कर रहा है।












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