जैश कमांडर मसूद अजहर पर बैन के लिए अमेरिका पहुंचा यूएन, चीन फिर लगाया टेक्निकल होल्ड
जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर के बैन पर भारत को कामयाबी। अमेरिका ने किया बैन के लिए यूनाइटेड नेशंस का रुख। चीन का विरोध जारी।
वॉशिंगटन। भारत के लिए ट्रंप प्रशासन की ओर से एक बड़ी और अहम खबर आ रही है। खबरें हैं कि जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर पर बैन के लिए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) का रुख किया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की ओर से यह जानकारी दी गई है कि अमेरिका ने यह कदम चीन के विरोध के बावजूद उठाया है।

चीन ने फिर लगाया टेक्निकल होल्ड
अमेरिका की ओर से यह अहम कदम उस समय उठाया गया है जब चीन ने दिसंबर में भारत के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें मसूद अजहर को ग्लोबल टेरिरस्ट घोषित करने की मांग की गई थी। लेकिन वहीं चीन ने फिर से एक बार इस प्रस्ताव पर छह माह का टेक्निकल होल्ड लगा दिया है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के प्रस्ताव को फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम का भी समर्थन मिला है। अमेरिका ने यूएन की प्रतिबंध समिति 1267 के तहत यह प्रस्ताव भेजा है। दिलचस्प बात यह है कि प्रस्ताव जनवरी माह के सेकेंड हाफ में भेजा गया यानी उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेने वाले थे और बराक ओबाम के कार्यकाल के अंतिम दिन थे। यह प्रस्ताव भारत और अमेरिका के बीच सलाह-मशविरे के बाद यूएन को भेजा गया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि जैश एक आतंकी संगठन है और ऐसे में उसके नेता खुले आम नहीं घूम सकते हैं।
यूरोपियन यूनियन ने किया भारत का समर्थन
अमेरिका से पहले यूरोपियन यूनियन ने भी चीन से अपील की थी कि वह मसूद अजहर पर अपने रुख पर एक बार फिर से विचार करे। चीन की ओर से मसूद अजहर को बैन करने वाले भारत के प्रस्ताव पर दो बार अड़ंगा लग चुका है। यूरोपियन यूनियन के सदस्य डॉक्टर चार्ल्स टैननॉक ने एक आर्टिकल में लिखा है कि चीन साफ तौर पर एशिया और दूसरे हिस्सों में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यूरोपियन यूनियन से पहले फ्रांस के विदेश मंत्री जीन मार्क अयरॉल्ट पिछले दिनों भारत की चार दिवसीय यात्रा पर थे। यहां पर ही उन्होंने यह बात कही थी। उन्होंने यह बयान देकर चीन को भी एक कड़ा संदेश भेजा है। अयरॉल्ट ने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन कहा, 'अतंराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट है और यह संकल्प हर जगह और हर देश के लिए एक जैसा होना चाहिए।' उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि अजहर का आतंकी संगठन जैश पहले ही आतंकवादी संगठनों लिस्ट में है। ऐसे में उसे आतंकवादी घोषित करने के भारत के अनुरोध के पीछे कई सारे तर्क हैं और सभी वैध हैं।
चीन ने डाली हर बार बाधा
इससे पहले चीन ने दिसंंबर में पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मौलाना मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर फिर से अड़ंगा लगा दिया था। भारत ने यूनाइटेड नेशंस की 1267 कमेटी में मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने के लिए एप्लीकेशन दी हुई थी और 31 दिसंबर को चीन की ओर से दूसरे 'टेक्निकल होल्ड' की आखिरी तारीख थी। इससे पहले ही चीन ने वीटो पावर के जरिए भारत के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। पढ़ें-कौन है चीन का 'चहेता' आतंकी मौलाना मसूद अजहर












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