"असंतोषजनक" लेकिन "आश्चर्यजनक नहीं", रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख पर फिर बोला अमेरिका

यूक्रेन संकट शुरू होने से पहले ही दिल्ली ने रूस की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद के साथ वाशिंगटन को परेशान कर दिया था और 2017 के अमेरिकी कानून के तहत भारत पर अमेरिका ने प्रतिबंध नहीं लगाए हैं।

वॉशिंगटन, मार्च 26: यूक्रेन संकट के दौरान अमेरिका की तरफ से लगातार भारत को घेरने की कोशिश की जा रही है और भारत को लेकर अलग अलग स्तरों पर बयानबाजी की जा रही है। अब अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी भारत के खिलाफ बयान दिया है और यूक्रेन पर भारत के कदम को 'असंतोषजनक' करार दिया है।

भारत का कदम असंतोषजनक

भारत का कदम असंतोषजनक

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थिति "असंतोषजनक" रही है, लेकिन रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए यह आश्चर्यजनक भी नहीं था। व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में इंडो-पैसिफिक के निदेशक मीरा रैप-हूपर ने वाशिंगटन के स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज इंडिया द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन फोरम को बताया कि, रूस के साथ घनिष्ठ संबंधों को जारी रखने के लिए भारत को विकल्पों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि हम निश्चित रूप से स्वीकार करेंगे और सहमत होंगे, कि जब संयुक्त राष्ट्र में वोट की बात आती है, तो मौजूदा संकट पर भारत की स्थिति 'असंतोषजनक' रही है, लेकिन यह पूरी तरह से आश्चर्यजनक भी नहीं है"।

भारत को विकल्पों की जरूरत

भारत को विकल्पों की जरूरत

उन्होंने कहा कि, भारत ने हाल के वर्षों में वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं और चीन को रोकने के उद्देश्य से बनाए गये क्वाड ग्रुपिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन मॉस्को के साथ भारत के लंबे समय से संबंध रहे हैं, जो इसके रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। आपको बता दें कि, भारत ने यूक्रेन में रूसी कार्रवाइयों की निंदा करने से परहेज किया है और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वोटों में भाग नहीं लिया है। रैप-हूपर ने कहा कि, चीन के साथ भारत के संबंध खराब होने के कारण भारत को बवाव के मुद्रा में आ पड़ा है, क्योंकि भारत हथियारों को लेकर काफी ज्यादा रूस पर निर्भर है और रूस के चीन के साथ काफी अच्छे संबंध स्थापित हो गये हैं, लिहाजा भारत के पास विकल्प नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि हमारा दृष्टिकोण यह होना चाहिए, कि हम आगे भी भारत के साथ करीबी संबंध बनाए रखें और भारत के पास क्या विकल्प होने चाहिए, इसपर विचार करें, ताकि भारत को रणनीतिक स्वायत्तता हासिल हो सके।

भारत ने रूस से खरीदा एस-400

भारत ने रूस से खरीदा एस-400

यूक्रेन संकट शुरू होने से पहले ही दिल्ली ने रूस की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद के साथ वाशिंगटन को परेशान कर दिया था और 2017 के अमेरिकी कानून के तहत भारत पर अमेरिका प्रतिबंध लगाए या नहीं लगाए, इसको लेकर अमेरिका में अभी भी विचार जारी है। अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद अपने सहयोगी देशों को रूसी सैन्य हार्डवेयर खरीदने से रोकना था। विश्लेषकों का कहना है कि भारत के खिलाफ कोई भी प्रतिबंध चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के उद्देश्य से जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड फोरम में दिल्ली के साथ अमेरिकी सहयोग को खतरे में डाल सकता है। वहीं, रैप-हूपर ने कहा कि, वाशिंगटन और उसके सहयोगियों और भागीदारों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नजर बनाने और इस बारे में सोचने की जरूरत है, ताकि वे उन देशों की मदद कैसे कर सकते हैं जो रूसी रक्षा प्रणालियों को बदलने पर विचार कर रहे हैं।

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