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WTO में भारत के खिलाफ मुकदमा चलाएगा अमेरिका? किसानों को लेकर मोदी सरकार के कदम से नाराजगी

28 से ज्यादा अमेरिकी सांसदों के समूह ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को चिट्ठी लिखकर भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पिछले महीने भी अमेरिकी सांसदों ने बाइडेन प्रशासन को चिट्ठी लिखी थी।

वॉशिंगटन, जनवरी 21: विश्व व्यापार संगठन, यानि डब्ल्यूटीओ में अमेरिका भारत की शिकायत कर सकता है गेहूं को लेकर भारत और अमेरिका आमने-सामने आ सकते हैं। अमेरिकी सांसदों ने भारतीय गेहूं को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडेन को चिट्ठी लिखी है और विश्व व्यापार संगठन में भारत के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है। अमेरिकी सांसदों को भारतीय किसानों को गेहूं उत्पादन में मिलने वाली सब्सीडी से गहरी आपत्ति है।

भारत की शिकायत?

भारत की शिकायत?

यूएस व्हीट एसोसिएट्स भारत के खिलाफ काफी सख्त और उसने काफी आक्रामकता से राष्ट्रपति जो बाइडेन को जोर देकर कहा है कि, भारत की शिकायत डब्ल्यूटीओ में की जाए। यूएस व्हीट एसोसिएट्स ने उन अमेरिकी सांसदों की चिट्ठी क स्वागत किया है, जिसमें डबल्यूटीओ में भारत की शिकायत करने की मांग राष्ट्रपति जो बाइडेन से की गई है। दअरसल, भारत सरकार भारतीय किसानों को गेहूं के उत्पादन मूल्य का 50 फीसदी से ज्यादा की सब्सिडी देती है, जिसको लेकर अमेरिकी सीनेटर्स को गहरी आपत्ति है और वो बाइडेन प्रशासन से इस मामले को डब्ल्यूटीओ के पास उठाने की मांग कर रहा है।

बाइडेन से कार्रवाई की मांग

बाइडेन से कार्रवाई की मांग

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 28 से ज्यादा अमेरिकी सांसदों के समूह ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को चिट्ठी लिखकर भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस चिट्टी में लिखा गया है कि, "अमेरिकी कमोडिटी उत्पादक अपने प्रतिस्पर्धियों के लिए एक स्पष्ट नुकसान में काम कर रहे हैं, मुख्य रूप से भारत से, जहां भारत सरकार चावल और गेहूं के उत्पादन के आधे से अधिक मूल्य पर सब्सिडी दे रही है, जबकि डब्ल्यूटीओ के नियमों के मुताबिक, एक देश अपने किसानों को सिर्फ 10 प्रतिशत ही सब्सिडी दे सकती है''। अमेरिकी सांसदों ने पत्र में कहा है कि, भारत सरकार की इस नीति से अमेरिकी कमोडिटी प्रोड्यूसर्स को नुकसान हो रहा है और भारत की नीति से इंटरनेशनल ट्रेड पॉलिसी भी बर्बाद हो रही है।

बाइडेन करेंगे शिकायत?

बाइडेन करेंगे शिकायत?

यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव कैथरीन ताई और कृषि सचिव टॉम विल्सैक को लिखे गये पत्र में कहा गया है, "हम चाहते हैं कि आप विवाद निपटान मामले की शुरुआत भारत की इस नीति के खिलाफ मुकदमा दायर करके करें, क्योंकि डब्ल्यूटीओ के समर्थन मूल्य की अवहेलना भारत कर रहा है, लिहाजा इसे रोकने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई करें"। अमेरिकी सीनेटर्स ने पत्र में लिखा है कि, विश्व व्यापार संगठन में भारत पर मूल्य समर्थन कार्यक्रम में सुधार के लिए अमेरिका लंबे अर्से से दवाब बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसका भारत पर कोई असर नहीं हुआ है। अमेरिकी सांसदों ने बाइडेन को लिखे पत्र में कहा है कि, भारत की जो प्रतिक्रिया रही है, उसे देखकर लगता है कि, आपको भारत के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में शिकायत प्रक्रिया की शुरूआत करनी चाहिए।

पिछले महीने भी लिखा गया था पत्र

पिछले महीने भी लिखा गया था पत्र

आपको बता दें कि, अमेरिकी सांसदों ने ये पत्र 13 जनवरी को राष्ट्रपति बाइडेन समेत अमेरिकी कृषि मंत्री और यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव कैथरीन ताई को लिखी है। जबकि, पिछले महीने भी अमेरिकी सांसदों ने इसी तरह की एक चिट्ठी भारत के खिलाफ लिखी थी। पिछली बार 18 सांसदों ने बाइडेन प्रशासन को लिखे अपने पत्र में भारत द्वारा अपने किसानों को दिए जा रहे घरेलू समर्थन मूल्य के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में भारत की शिकायत करने और भारत के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की थी।

पहले भी हो चुकी है शिकायत

पहले भी हो चुकी है शिकायत

ऐसा नहीं है कि, अमेरिका ने पहले डब्ल्यूटीओ में भारत के खिलाफ शिकायत नहीं की है, इससे पहले भी विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका भारत की सब्सिडी पॉलिसी को लेकर शिकायत कर चुका है। वहीं, भारत के खिलाफ शिकायत की मांग को लेकर सांसदों द्वारा लिखी गई चिट्ठी पर प्रतिक्रिया देते हुए यूएस व्हीट एसोसिएट्स ने शिकायत की मांग का स्वागत किया है और कहा है कि, भारत के खिलाफ कार्रवाई
की मांग करना खुशी की बात है। अमेरिका में गेहूं प्रोड्यूसर्स के नेशनल एसोसिएशन के सीईओ चांडलर गौले ने कहा कि, ''चूंकी भारत विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है, लिहाजा भारत के लिए नियमों को मानना जरूरी है''। उन्होंने कहा कि, ''भारत अपने घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की अवहेलना कर रहा है और भारत को ऐसा करने से बचना चाहिए''।

अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को चुनौती

अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को चुनौती

दरअसल, विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका नहीं चाहता है कि, अमेरिकी गेहूं प्रतिस्पर्धा से बाहर हों, लिहाजा सीईओ चांडलर ने कहा कि, ''अमेरिकी सांसदों ने इस मुद्दे को बाइडेन प्रशासन के सामने लाया है, जिसकी हम सराहना करते हैं और हम अमेरिकी गेंहूं की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए अमेरिकी कृषि विभाग और संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे''।

कितना गेहूं बेच सकता है भारत?

कितना गेहूं बेच सकता है भारत?

अमेरिकी कृषि विभाग ने अनुमान लगाया है कि, 30 जून 2022 को खत्म हो रहे इस साल के मार्केटिंग साल में भारत करीब 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेच सकता है और एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि, भारत के उस कदम से विश्व बाजार में दुनिया के बाकी देशों को नुकसान होगा। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि, ''भारत के गेहूं एक्सपोर्ट से करीब 280 लाख मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक बचा रह जाएगा। वहीं, यूएलडब्यू और यूएसए राइस द्वारा कमीशन किए गये 2020 टेक्सास एंड एम विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत की इस नीति की वजह से अमेरिकी किसानों को करीब 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होगा''। लिहाजा अमेरिकी सांसदों की तरफ से बाइडेन प्रशासन को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर चिट्ठी लिखी गई है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा, कि क्या बाइडेन प्रशासन भारत को विश्व व्यापार संगठन में कटघरे में खड़ा कर पाता है और अगर अमेरिका एक्शन लेता है, तो फिर भारत की तरफ से क्या प्रतिक्रिया दी जाएगी?

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