Bangladesh violence: बांग्लादेशी हिंदुओं को मिला भारतीय-अमेरिकी सांसदों का साथ, डायरेक्ट हस्तक्षेप की मांग
Bangladesh violence: बांग्लादेश में हिंसा प्रभावित हिंदुओं को भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों का साथ मिल गया और दो भारतीय-अमेरिकी सांसद, श्री थानेदार और राजा कृष्णमूर्ति ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ "कॉर्डिनेटेड हमलों" को रोकने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की मांग की है।
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले बढ़ गये हैं और पिछले एक हफ्ते में हिंदुओं के खिलाफ 205 से ज्यादा हमले रिकॉर्ड किए गये हैं। अमेरिकी सांसदों ने तर्क दिया है, कि क्षेत्र में "धार्मिक असहिष्णुता और हिंसा से प्रेरित" अस्थिरता अमेरिका या उसके सहयोगियों के हित में नहीं है।

बांग्लादेश में बनी अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस को लिखे पत्र में दो हिंदू संगठनों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सोमवार से 52 जिलों में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर कम से कम 205 हमले हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को 9 अगस्त को लिखे पत्र में कांग्रेस सदस्य श्री थानेदार ने कहा, कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अपने रुख में वह अकेले नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई लोगों ने, जिनमें उनके अपने जिले के कुछ लोग भी शामिल हैं, उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ हो रही हिंसक कार्रवाइयों की निंदा की है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को बचाने की मांग
वहीं थानेदार ने लिखा, कि "मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के साथ, संयुक्त राज्य अमेरिका का दायित्व है, कि वह इस नई सरकार की सहायता करे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके, कि हिंसा और नागरिक अशांति समाप्त हो। मैं बाइडेन प्रशासन से आग्रह करता हूं, कि वह सताए गए बांग्लादेशी हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को शरणार्थी के रूप में अस्थायी संरक्षित दर्जा प्रदान करे।"
ढाका में हिंदू समुदाय के नेताओं के मुताबिक, शेख हसीना देश से भागने के बाद बांग्लादेश में हुई हिंसा में कई हिंदू मंदिरों, घरों और व्यवसायों में तोड़फोड़ की गई, महिलाओं पर हमला किया गया और हसीना की अवामी लीग पार्टी से जुड़े कम से कम दो हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई।
यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। थानेदार ने बाइडेन प्रशासन से बांग्लादेश में हिंदुओं पर समन्वित हमलों को समाप्त करने के लिए यूनुस और उनकी सरकार के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। इससे एक दिन पहले राजा कृष्णमूर्ति ने भी दक्षिण एशियाई देश में अस्थिर स्थिति के बारे में एंटनी ब्लिंकन को एक पत्र लिखा था, जिसमें समन्वित हिंदू विरोधी हिंसा बढ़ने की चश्मदीदों का हवाला दिया।
कृष्णमूर्ति ने कहा, कि "दुख की बात है, कि यह पहली बार नहीं है कि बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंदू विरोधी हिंसा में बदल गए हैं। अक्टूबर 2021 में हुए हिंदू विरोधी दंगों में सैकड़ों घरों, व्यवसायों और मंदिरों को नष्ट करने के बीच नौ लोग मारे गए थे... 2017 में, 107 से ज्यादा हिंदू मारे गए और 37 'गायब' हो गए... युद्ध अपराधों के लिए जमात-ए-इस्लामी नेता डेलवर सईदी को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की गई।"
उन्होंने एंटनी ब्लिंकन से हिंसा को खत्म करने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने में मदद करने के लिए अमेरिकी प्रभाव डालने की अपील की।
बांग्लादेश में हिंसा के खिलाफ हिंदुओं का हल्लाबोल
बांग्लादेश की 17 करोड़ की आबादी में हिंदुओं की संख्या लगभग 8 प्रतिशत है, जो उन्हें भेदभाव और हिंसा के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है। वे पारंपरिक रूप से शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के समर्थक रहे हैं, जो खुद को काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष मानती हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के पाकिस्तान से संबंध हैं और वह हिंदुओं पर कई हमलों में शामिल है।
इस बीच, सैकड़ों लोग देश के अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों के विरोध में ढाका की सड़कों पर उतरे, "हम कौन हैं, बंगाली बंगाली" के नारे लगाते हुए, शांति की अपील करते हुए उन्होंने शहर के एक चौराहे को ब्लॉक कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और तख्तियां ले रखी थीं, जिसमें बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को "बचाए जाने" की मांग की गई थी।












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