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US Iran War: अमेरिकी वॉरशिप पर हंगामा! जाम हुए सैंकड़ों टॉयलेट, पेट साफ करने के लिए तड़पे सैनिक

US Iran War: एक तरफ अमेरिका, ईरान पर हमले की तैयारी कर चुका है तो दूसरी तरफ उसका सबसे बड़ा वॉरशिप USS Gerald R. Ford अब एक अजीब और बदबूदार समस्या से जूझ रहा है। दरअसल इस वॉरशिप पर टॉयलेट्स को लेकर संकट आ गया है। जिसकी वजह से वॉरशिप पर तैनात फौजी भयंकर परेशानी से जूझ रहे हैं और इसी के कारण उनमें आपस में झगड़ा हो रहा है।

650 में से ज्यादातर शौचालय बंद

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और जवानों के इंटरव्यू के मुताबिक, जहाज पर मौजूद 650 शौचालयों में से अधिकतर काम नहीं कर रहे। 13.3 बिलियन डॉलर की लागत से बने युद्धपोत पर फिलहाल सबसे बड़ी दिक्कत है, ऐसे टॉयलट्स की जो काम कर रहे हों। दरअसल इस वॉरशिप के ज्यादातर टॉयलेट जाम (Choke) हो गए हैं। जिसकी वजह से मानव-मल जहाज पर ही अटक जा रहा है।

US Iran War

40-45 मिनट तक लाइन में खड़े रहते हैं फौजी

लगातार मिशन पर सक्रिय रहने के कारण नियमित रखरखाव नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि टॉयलेट जाम हो गए। जिससे इस्तेमाल करने वालों की तादाद टॉयलेट्स की संख्या से काफ ज्यादा हो गई। लिहाजा पेट साफ करने के लिए अमेरिकी सोल्जर्स को रोजाना 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि प्लंबिंग टेक्नीशियन दिन में 19 घंटे काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही।

वैक्यूम सिस्टम की इंजीनियरिंग खामी

यह दिक्कत नई नहीं है। पिछले साल मार्च में चार दिनों के भीतर 205 शौचालय खराब हो गए थे। असल समस्या जहाज के वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम में है। एक भी वाल्व खराब हो जाए तो पूरे सेक्शन के टॉयलेट्स बंद हो जाते हैं।

'टॉयलेट वॉर' तक पहुंची बात

कैल्शियम जमाव पतली पाइपों को ब्लॉक कर देता है। सिस्टम ठीक करने के लिए हर बार करीब 400,000 डॉलर (लगभग 3.3 करोड़ रुपये) खर्च कर एसिड फ्लश करना पड़ता है। अमेरिकी सार्वजनिक प्रसारण समूह NPR को मिले ईमेल में इस स्थिति को 'टॉयलेट वॉर' बताया गया है। नाविकों ने अपने परिवारों को हालात की सच्चाई बताई है।

युवा जवान पर भारी पड़ रही तैनाती

इस जहाज पर कई जवान 20 साल की उम्र के लगभग हैं। लगातार ड्यूटी और परिवार से दूरी ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया है। कई लोग जन्मदिन, शादी, अंतिम संस्कार और अपने बच्चे के जन्म जैसे खास मौके मिस कर चुके हैं।

4,500 से ज्यादा जवानों की मुश्किलें

डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर कड़ी बयानबाजी के बीच मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे समय में इस युद्धपोत पर सवार 4,500 से अधिक जवान जाम शौचालयों और खराब सीवेज सिस्टम की समस्या से परेशान हैं। इससे जहाज पर रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है।

आठ महीने की लंबी तैनाती से बढ़ा दबाव

आमतौर पर छह महीने की तैनाती होती है, लेकिन इस बार यह आठ महीने से ज्यादा लंबी हो गई है। जनवरी 2026 में वेनेजुएला में अमेरिकी हमले में भूमिका निभाने के बाद, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण इसे मध्य-पूर्व भेज दिया गया। इससे नाविकों की घर वापसी और टल गई। लंबी तैनाती ने मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

पहले भी लंबी तैनाती का असर दिख चुका

अप्रैल-मई 2025 में विमानवाहक पोत USS Harry S. Truman ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष में कई लड़ाकू विमान खो दिए थे। जांच में पाया गया था कि अत्यधिक काम के कारण दल पर दबाव था।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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