US-Iran Ceasefire टूटा? Lebanon में इजरायल के विनाशकारी हमले-254 मारे गए, IRGC बोला- 'दंडात्मक जवाब देंगे'
US-Iran Ceasefire Israeli Attacks in Lebanon: अमेरिका-ईरान के बीच घोषित 14 दिन के युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने लेबनान पर हमले और तेज कर दिए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बताया कि पूरे देश में इजरायली हमलों में 254 लोग मारे गए और 1,165 से ज्यादा घायल हुए।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों को 'क्रूर नरसंहार' बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर हमले बंद नहीं हुए तो 'खेदजनक जवाब' दिया जाएगा। आइए समझते हैं कि सीजफायर के बावजूद लेबनान क्यों फिर आग में? IRGC का रुख कितना सख्त? ट्रंप ने क्या कहा? और पूरा मध्य पूर्व फिर से क्यों उबल रहा है?

US-Iran Ceasefire के बीच सबसे बड़ा हमला: 254 शहीद, अस्पतालों में चीख-पुकार
इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों, बेरूत के आसपास और बेका घाटी में भारी बमबारी की। लेबनान स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सिर्फ आज के हमलों में मौत का आंकड़ा 254 पहुंच गया है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) ने बेरूत के रफिक हरीरी अस्पताल की स्थिति बताते हुए कहा कि आपातकालीन कक्ष में बच्चों समेत सैकड़ों घायल आ रहे हैं। छर्रे के घाव, गंभीर रक्तस्राव... अस्पताल के कमरे भर गए हैं। डॉक्टर और नर्स अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं। MSF की मेडिकल कोऑर्डिनेटर असिस्टेंट सफा ब्लेक ने ऑडियो में ये दर्दनाक तस्वीर साझा की।
IRGC की कसम: 'हमला बंद न किया तो दंडात्मक जवाब'
ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमलों के बाद IRGC ने आधिकारिक बयान जारी किया कि इजरायल द्वारा बेरूत में क्रूर नरसंहार हो रहा है। अगर हमले तुरंत बंद नहीं हुए तो ईरान क्षेत्र भर में दंडात्मक जवाबी कार्रवाई करेगा। IRGC ने साफ चेतावनी दी कि ये सीजफायर का उल्लंघन है और ईरान इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
ट्रंप का खुलासा: 'लेबनान सीजफायर में शामिल नहीं'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने PBS के व्हाइट हाउस संवाददाता को बताया कि ईरान के साथ 2 हफ्ते का युद्धविराम समझौता लेबनान को शामिल नहीं करता। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी पोस्ट कर कहा कि कई लोग झूठे समझौते और सूचियां भेज रहे हैं। केवल एक ही सार्थक बिंदु हैं जो अमेरिका को मंजूर हैं। हम बंद दरवाजों के पीछे चर्चा करेंगे।
खाड़ी देशों में ईरानी हमले: सऊदी, UAE, कुवैत, बहरीन अलर्ट
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन ने ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की। इन हमलों में ऊर्जा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
पाकिस्तान की बड़ी भूमिका: शुक्रवार को बातचीत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल 10 अप्रैल (शुक्रवार) को इस्लामाबाद पहुंचेंगे। दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते पर चर्चा होगी। पाकिस्तान इस सीजफायर का मुख्य मध्यस्थ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र का आह्वान: 'सभी पक्ष सीजफायर का पालन करें'
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सीजफायर का स्वागत करते हुए कहा कि नागरिकों के जीवन की रक्षा और मानवीय पीड़ा कम करने के लिए शत्रुता का तुरंत अंत जरूरी है। सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें।
अमेरिकी दूतावास का अलर्ट: इराक में ड्रोन हमले जारी
बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने X पर चेतावनी जारी की। लिखा कि ईरान से जुड़े इराकी समूहों ने 8 अप्रैल को बगदाद हवाई अड्डे और राजनयिक केंद्र पर ड्रोन हमले किए। अमेरिकी नागरिकों और लक्ष्यों पर और हमले हो सकते हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, राजधानी तेहरान में हवाई रक्षा प्रणालियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं।
1982 की भयावह याद क्यों ताजा हो रही?
लेबनान के लिए आज के हमले 1982 की घटना की याद दिलाते हैं। लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान इजरायल ने जून 1982 में बेरूत पर हमला किया। सबरा और शतीला शरणार्थी शिविरों में 16-18 सितंबर को 2,000-3,500 फिलिस्तीनियों की हत्या हुई। ज्यादातर चाकू से। आज के हमले कई लेबनानियों को उसी नरसंहार की याद दिला रहे हैं।
क्या सीजफायर टूट रहा है?
अमेरिका-ईरान समझौता मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर था। लेबनान और हिजबुल्लाह को इसमें शामिल नहीं किया गया। खाड़ी देशों पर ईरानी हमले और IRGC की चेतावनी से पूरा इलाका उबल रहा है। IRGC का जवाब आ सकता है या पाकिस्तान में 10 अप्रैल की बातचीत से नया रास्ता निकलेगा? फिलहाल लेबनान में खूनखराबा जारी है।












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