अमेरिका में H1B VISA Bill पेश, भारतीयों की नौकरी और पढ़ाई पर लटकी तलवार, डिटेल में समझें इसके नुकसान

US H1B VISA Bill: भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए लंबे समय से अमेरिका जाने का एक तय रास्ता रहा है। पहले F-1 स्टूडेंट वीज़ा, फिर पढ़ाई के बाद OPT (Optional Practical Training) के जरिए कुछ समय काम, उसके बाद H-1B वर्क वीज़ा, और आखिर में ग्रीन कार्ड का लंबा इंतजार। आज की तारीख में भारतीय छात्र और H-1B वीज़ा होल्डर्स, दोनों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। लेकिन अब इस पूरे सिस्टम पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। क्या है ये खतरा जानेंगे विस्तार से।

क्या है ये नया बिल ?

22 अप्रैल को अमेरिकन कांग्रेस में एली क्रेन नाम के नेता ने एक नया बिल पेश किया, जिसका नाम है "End H-1B Visa Abuse Act of 2026"। नाम से ही साफ है कि यह बिल H-1B सिस्टम को पूरी तरह बदलने का इरादा रखता है। वकील और एक्सपर्ट इसे गेम-चेंजर बता रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि पूरे इमिग्रेशन सिस्टम को रीसेट करने की कोशिश करता है।

US H1B VISA Bill

बिल के नए प्रावधान-

इस प्रस्ताव में कई बड़े और सख्त नियम शामिल हैं, जैसे:

• नए H-1B वीज़ा पर 3 साल का बैन
• हर साल की सीमा घटाकर सिर्फ 25,000 वीज़ा
• न्यूनतम सैलरी $200,000 (लगभग ₹1.6 करोड़)
• OPT प्रोग्राम खत्म करने का प्रस्ताव
• ग्रीन कार्ड में कन्वर्जन पर रोक

US H1B VISA Bill

यानी साफ शब्दों में कहें तो यह बिल उस पूरे रास्ते को बंद कर सकता है, जिससे भारतीय स्टूडेंट्स अमेरिका में सेटल होते हैं।

पहले के बिलों से कितना अलग है ये?

पहले जो भी इमिग्रेशन बिल आते थे, वो एक या दो चीजों पर फोकस करते थे। जैसे- वीज़ा लिमिट या सैलरी। लेकिन इस बार मामला अलग है। यह बिल एक साथ पूरी सिस्टम को बदलने की कोशिश करता है। वॉशिंगटन डीसी के वकील राजीव खन्ना के मुताबिक, यह कदम पिछले 30 साल से चल रही स्किल्ड वर्कफोर्स पाइपलाइन को खत्म कर सकता है।

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सिस्टम बदलने की जरूरत क्यों ?

डलास के एक इमिग्रेशन वकील का कहना है कि मौजूदा H-1B सिस्टम 1990 के कानून पर आधारित है। तब टेक्नोलॉजी, ग्लोबल जॉब मार्केट और वर्क कल्चर आज जैसा नहीं था। अब AI, रिमोट जॉब्स और ग्लोबल टैलेंट की वजह से पूरा गेम बदल चुका है। इसलिए अमेरिका में यह बहस तेज हो रही है कि सिस्टम को अपडेट किया जाए और अगर बाहरियों के जरूरत नहीं है तो फिर वीजा और ग्रीन कार्ड पर सख्ती हो।

क्या यह सिर्फ पॉलिटिक्स है या सच में पास होगा?

यहां कहानी में यहीं ट्विस्ट आता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे बिल अक्सर पॉलिटिकल मैसेज देने के लिए लाए जाते हैं। ह्यूस्टन के वकील राहुल रेड्डी के मुताबिक, ऐसे प्रस्ताव अपने वोटर्स को खुश करने के लिए पेश किए जाते हैं, जरूरी नहीं कि वे पास ही हों। साथ ही, अमेरिका के सीनेट में ऐसे बिल पास करने के लिए 60 वोट चाहिए होते हैं, जो फिलहाल मुश्किल दिख रहा है।

अगर पास हो गया तो क्या होगा?

थ्योरी में देखें तो अमेरिका सरकार के पास पूरा अधिकार है कि वह H-1B वीज़ा को रोक दे। लेकिन प्रैक्टिकली हालात काफी मुश्किल होंगे। जबकि मौजूदा H-1B वीज़ा होल्डर्स को देश छोड़ना पड़ सकता है। या उन्हें दूसरे वीज़ा में शिफ्ट होना पड़ेगा।साथ ही कई लोग मजबूरी में वापस अपने देश लौट सकते हैं

सबसे ज्यादा खतरे में कौन?

सबसे बड़ा असर उन भारतीयों पर पड़ेगा जो ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हैं। कई लोग 10-20 साल से इंतजार कर रहे हैं। अगर यह बिल लागू होता है, तो उनका पूरा सपना खत्म हो सकता है। यहां तक कि यह कानूनी और संवैधानिक विवाद भी पैदा कर सकता है।

OPT खत्म होने का क्या असर होगा?

OPT (Optional Practical Training) को अगर खत्म कर दिया जाता है, तो स्टूडेंट्स के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। अभी OPT पढ़ाई और जॉब के बीच एक ब्रिज का काम करता है।
अगर यह हट गया, तो-

• स्टूडेंट्स को पढ़ाई के बाद तुरंत देश छोड़ना पड़ेगा
• H-1B तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा

राजीव खन्ना के मुताबिक, "फिर अमेरिका स्टूडेंट्स से कहेगा- आओ पढ़ो, लेकिन यहां रुकने का कोई मौका नहीं।"

क्या दूसरे देश फायदा उठाएंगे?

बिल्कुल। अगर अमेरिका अपने दरवाजे बंद करता है, तो कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देश इन टैलेंटेड लोगों को तुरंत मौका देंगे। यानी टैलेंट कहीं जाएगा, बस अमेरिका नहीं जाएगा।

$200,000 सैलरी रूल- फायदा या नुकसान?

पहली नजर में लगता है कि यह नियम हाई-स्किल लोगों को फायदा देगा। लेकिन असल में मिड-लेवल प्रोफेशनल्स बाहर हो जाएंगे, स्टार्टअप्स टैलेंट हायर नहीं कर पाएंगे और सिर्फ बड़ी कंपनियां ही लोगों को हायर कर पाएंगी। यानी टैलेंट से ज्यादा पैसा मायने रखेगा।

क्या इससे अमेरिकी जॉब्स बचेंगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है। इस मामले पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां टैलेंट नहीं मिलने पर काम बाहर शिफ्ट कर देंगी। यानी जॉब्स अमेरिका से बाहर चली जाएंगी। उदाहरण के लिए- अगर अमेरिका में इंजीनियर नहीं मिलेगा, तो कंपनी बेंगलुरु या लंदन में टीम बना लेगी।

क्या कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो इसे चुनौती देना आसान नहीं होगा। लेकिन कुछ हिस्सों पर सवाल उठ सकते हैं। जैसे- ग्रीन कार्ड वेटिंग वाले लोगों के अधिकार औक आश्रितों (dependents) के नियम। इस वजह से लंबे समय तक कोर्ट केस चल सकते हैं।

भारतीयों के पास क्या विकल्प?

अगर H-1B और OPT दोनों कमजोर हो जाते हैं, तो ऑप्शन बहुत सीमित रह जाएंगे-

• O-1 वीज़ा (लेकिन यह सिर्फ टॉप टैलेंट के लिए है)
• वापस स्टूडेंट वीज़ा लेना (जो अनिश्चित है)
• या दूसरे देशों का रुख करना

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, "अगर ये नियम लागू होते हैं, तो 90% लोग इस सिस्टम से बाहर हो जाएंगे।" लिहाजा यह सिर्फ एक वीज़ा पॉलिसी का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक बड़ा ग्लोबल सिग्नल है। अमेरिका अब अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी को सख्त करना चाहता है, जबकि बाकी देश इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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