अमेरिकी कांग्रेस में पाकिस्तान का हिसाब-किताब, तालिबान पर इमरान खान के 'डबल गेम' पर एक्शन
अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के सदस्यों को शरण मिलती रही है और पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ चालबाजी की है।
वॉशिंगटन, सितंबर 14: अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान को तालिबान के लिए शरणस्थली बता दिया है। अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान ने तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के सदस्यों को, जिनमें आतंकवादी भी शामिल हैं, उन्हें शरण दी है, इसीलिए फौरन पाकिस्तान को इंटरनेशनल कम्यूनिटी के साथ व्यापक बहुमत वाले देशों के सात आ जाना चाहिए। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसके साथ ही कहा है कि अफगानिस्तान में भारत ने जो काम किया है, पाकिस्तान ने उनमें भी 'हानिकारक' रूकावटें पैदा की हैं।

आतंकियों की शरणस्थली
अफगानिस्तान से निकलने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर काफी सख्त रूख का अख्तियार किया है। अमेरिका के विजेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकियों को पाकिस्तान में रखा गया। उन्होंने कहा कि, ''पाकिस्तान अपने कई ऐसे हितों को देख है, जिनमें से कई हितों का सीधे तौर पर अमेरिका के साथ संघर्ष है, अमेरिका से मेल नहीं खाते हैं। जब अमेरिकी विदेश मंत्री से पूछा गया कि 'अमेरिका अफगानिस्तान में इस्लामाबाद की मौजूदगी को किस तरह से देखते हैं?' तो इस सवाल के जवाब पर एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ''हम मानते हैं कि पाकिस्तान अपने हितों को देख रहा है, जिनमें से कई मुद्दों पर अमेरिका के साथ साफ संघर्ष है और वहां (पाकिस्तान में) आतंकियों को शरण दी गई है। अमेरिकी कांग्रेस के सामने अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी पर बोलते हुए एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ''अफगानिस्तान में भारत की भागीदारी ने पाकिस्तान द्वारा किए गये 'हानिकारक' कामों को प्रभावित किया है।''

पाकिस्तान को सख्त संदेश
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने व्हाइट हाउस अफेयर्स कमेटी के सामने अफगानिस्तान के मुद्दे पर अमेरिकी सरकार का पक्ष रखा है। जहां उन्होंने कहा कि, ''हमें जिस चीज पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, वो ये है कि पाकिस्तान समेत हर देश को इंटरनेशल कम्यूनिटी की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। क्योंकि इंटरनेशनल कम्यूनिटी के पास वो सब है, जिसकी तालिबान की नेतृत्व वाली सरकार को जरूरत है, जिसमें चाहे उसे मान्यता देने की बात हो या फिर मदद। लिहाजा पाकिस्तान को भी उन सभी लक्ष्यों पर और इंटरनेशनल कम्यूनिटी के बहुमत के साथ खड़े होने की जरूरत है।

पाकिस्तान तालिबान के गहरे संबंध
पाकिस्तान के तालिबान के साथ काफी गहरे संबंध रहे हैं और उस पर खुले तौर पर और गुप्त रूप से तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इस्लामाबाद ने इन आरोपों का खंडन किया है, लेकिन, पाकिस्तान के गृहमंत्री से लेकर तमाम नेता सार्वजनिक मंचों पर ही बोल चुके हैं कि तालिबान को पाकिस्तान में पूरा समर्थन मिला है। तालिबान पर सबसे अधिक प्रभाव रखने वाले देशों में कतर के साथ-साथ पाकिस्तान को भी गिना जाता है। पाकिस्तान एक ऐसी जगह भी है, जहां 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में नाटो के अफगानिस्तान पर हमले के बाद तालिबान के कई वरिष्ठ नेता भाग कर आ गये थे। पूर्व अफगान उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने इस महीने की शुरुआत में आरोप लगाया था कि तालिबान को आईएसआई-पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी द्वारा हर तरह की मदद दी जा रही है, और पाकिस्तान, अफगानिस्तान को उपनिवेश में बदलना चाहता है।

अमेरिका में इमरान खान की टिप्पणी पर बात
अमेरिका के विदेश मंत्री जब अमेरिकी कांग्रेस की फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने अफगानिस्तान के मुद्दे पर अपनी राय रख रहे थे, उस वक्त अमेरिकी सांसद बिल कीटिंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उस बयान का भी जिक्र किया है, जो उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान की जीत के बाद दिया था। इमरान खान ने काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद कहा था कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं। अमेरिकी सांसद बिल कीटिंग ने फॉरेन अफेयर्स कमेटी को कहा कि, ''हम अकसर सुनते आए हैं कि पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध जटिल हैं, लेकिन मेरा मानना है कि पाकिस्तान धोखेबाज है डबल गेम खेलता है''।

सैनिकों की मौत के पीछे पाकिस्तान
अमेरिका के फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने सांसद बिल कीटिंग ने कहा कि, ''पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के हक्कानी नेटवर्क के साथ इतने मजबूत संबंध थे, कि हमारे कुछ सैनिकों की मौत सहित कई चीजों के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है, और यहां तक कि हाल ही में जब तालिबान ने पिछले महीने सत्ता संभाली थी"। कीटिंग ने ब्लिंकन से पूछा, कि कैसे अमेरिका उस रिश्ते का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है, जिस पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, पाकिस्तान अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में "अपने दांव लगातार लगाने" में शामिल है। "यह ऐसा है जिसमें पाकिस्तान का हक्कानी नेटवर्क सहित तालिबान के सदस्यों को शरण देना शामिल है। यह पाकिस्तान है, जो हर किसी के साथ हर मुद्दे पर शामिल है। वो आतंकवाद के विरोध पर हमारे साथ शामिल होता है और फिर आतंकियों को बचाने के लिए भी काम करता है। लेकिन, अमेरिका के साथ पाकिस्तान के हितों के काफी टकराव हैं, ये पूरी तरह से साफ है''।
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