लाल सागर में अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज, क्या दुनियाभर में तेल के दाम बढ़ने वाले हैं?
हूती विद्रोहियों ने इजराइल और हमास के बीच जंग में हमास के खुले समर्थन का ऐलान किया है। हूती विद्रोही लाल सागर के रास्ते से जाने वाले जहाजों को टारगेट कर रहे हैं। हूतियों का कहना है कि वे इजराइल जाने वाले जहाजों को टारगेट करेंगे।
बतादें कि लाल सागर तेल और ईंधन के शिपमेंट के लिए एक अहम रास्ता है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमले से व्यापारिक कंपनियों में खलबली मच गई है। इस हमले की वजह से कुछ कंपनियों ने अपना रास्ता बदल दिया है तो कुछ कंपनियों ने अपने शिपमेंट रोकने का फैसला किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की एनर्जी बीपी ने लाल सागर से अपने शिपमेंट रोकने का फैसला ले लिया है। कंपनी का कहना है कि लाल सागर के क्षेत्र में सुरक्षा की स्थितियां काफी खराब हो गई हैं। इसके अलावा एवरग्रीन लाईन ने कहा है कि उसने अपने कंटेनर शिप को अगले आदेश तक यात्राएं निलंबित करने को कहा है।
एक अन्य तेल कंपनी बीपी ने कहा, उनके लिए काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। ऐसे में लाल सागर में खराब होते सुरक्षा के हालातों को देखते हुए कुछ दिनों के लिए शिपमेंट को रोका जा रहा है।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि लाला सागर में कॉमर्सियल जहाजों पर हमले से तेल और वस्तुओं की कीमतें बढ़ते की आशंका है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मेर्स्क ने कहा है कि वह अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के आसपास अपने कुछ जहाजों का रास्ता बदल देगी।
कंपनियों की चिंता ही वो वजह है जिसके कारण अमेरिका को लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतराष्ट्रीय नौसैनिक अभियान शुरू करना पड़ा है। अमेरिका ने 10 देशों के साथ मिलकर गठबंधन बनाया है, जोकि हूती विद्रोहियों से वाणिज्यिक जहाजों को बचाने के लिए गश्त करेंगे। इस मिशन को ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन नाम दिया गया है।
गठबंधन में अमेरिका के अलावा बहरीन, कनाडा, फ्रांस, इटली, सेशेल्स, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह हमलों को रोकने की कोशिश में चीन का भी स्वागत करेगा।
हालांकि हूतियों ने अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रयास का विरोध करने का वादा किया है। उन्होंने कहा है कि वे अपने हमले तभी रोकेंगे जब इज़राइल गाजा में अपना युद्ध बंद कर देगा। उन्होंने संकेत दिया है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन कूटनीति अब तक उनके हमलों को रोकने में विफल रही है।
जर्मन कंपनी हापाग-लॉयड पर पिछले शुक्रवार को हमला किया गया था। उसने नई टास्क फोर्स का स्वागत किया है। लेकिन कंपनी का कहना है कि उसे 100 फीसदी आश्वासन की जरूरत है कि जहाजों की वापसी के लिए लाल सागर सुरक्षित रहेगा।
दक्षिणी लाल सागर में वैश्विव भागेदारी का 10 से 12 फीसदी व्यापार होता है। लाल सागर से गुजरने वाली लेन को सुरक्षित रखा जाना विश्व के लिए जरूरी है, ताकि व्यापार आसानी से हो सके। यदि व्यापारिक कंपनियां लाल सागर के बदले कोई दूसरा रास्ता अपनाती हैं तो इससे चीजों की लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगी।
हापाग-लॉयड के संचार प्रमुख निल्स हाउप्ट ने बीबीसी को बताया कि वे पूर्वी मेड से सिंगापुर जाते हैं। स्वेज नहर के रास्ते उन्हें यात्रा करने में 13 दिन लगते हैं यदि वह इस नहर का उपयोग किए बिना यात्रा करेंगे तो इसमें उन्हें 31 दिन लगेंगे।
रूट बदलने से तेल ही बल्कि अन्य चीजों पर भी अधिक प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतों से मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है। इससे दुनिया का व्यापार चौपट हो सकता है। सप्लाइ चेन की दिक्कत आ सकती है और मालभाड़ा भी काफी बढ़ सकता है।












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