CAA पर हमें काफी चिंता है... भारत के आंतरिक मामलों में फिर कूदा अमेरिका, क्यों चौधरी बन रहे हैं बाइडेन?
US Express Concern on CAA: दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिका को अपनी नाक घुसाने की हमेशा से आदत रही है और वो अपनी इस आदत से बाज नहीं आ रहा है। भारत में जब CAA, यानि नागरिकता संशोधन कानून लागू हो चुका है, तो बाइडेन प्रशासन ने चौधरी बनने की कोशिश की है।
अमेरिका ने गुरुवार को कहा है, कि वह भारत में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की अधिसूचना को लेकर चिंतित है और इसके कार्यान्वयन पर बारीकी से नजर रख रहा है।

CAA पर अमेरिका का बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपनी दैनिक ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा, "हम 11 मार्च को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की अधिसूचना को लेकर चिंतित हैं।"
उन्होंने कहा, कि "हम बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा। धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत हैं।"
आपको बता दें, कि भारत सरकार ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 लागू किया, जिससे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने का मार्ग खुल गया है।
भारत सरकार ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है, कि भारतीय मुसलमानों को CAA को लेकर चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि सीएए उनकी नागरिकता को प्रभावित नहीं करेगा और मुसलमानों का सीएए से कोई लेना देना नहीं है। भारत सरकार का कहना है, कि सीएए नागरिकता देने के बारे में है और देश के किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी।
भारत सरकार ने बार बार साफ किया है, कि सीएए कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इन देशों में अल्पसंख्यकों को काफी प्रताड़ित किया जाता है और जबरन धर्म परिवर्तन से लेकर उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है, लिहाजा भारी संख्या में इन देशों से शरणार्थी भारत आते रहे हैं।
लेकिन, भारत में भी कई राजनीतिक पार्टियों ने सीएए को मुस्लिमों के खिलाफ करार दिया है। केरल की कम्युनिस्ट सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने घोषणा की है, कि इन राज्यों में सीएए लागू नहीं किया जाएगा।












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