'सिर्फ चेन्नई को मिला 2,20,000 H-1B वीज़ा', इकोनॉमिस्ट के गंभीर आरोप से अमेरिका से भारत तक बवाल
Dave Brat H-1B visa fraud claims: पूर्व अमेरिकी हाउस प्रतिनिधि और अर्थशास्त्री डेव ब्रैट ने H-1B वीज़ा कार्यक्रम में "इंडस्ट्रियल स्तर के फ्रॉड" का आरोप लगाते हुए भारत को निशाना बनाया है। स्टीव बैनन के पॉडकास्ट पर ब्रैट ने दावा किया कि भारत के एक जिले (चेन्नई) को कानूनी वार्षिक सीमा 85,000 से 2.5 गुना अधिक 220,000 वीज़ा आवंटित किए गए। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी बताया।
ब्रैट ने एक पूर्व अमेरिकी राजनयिक के दावों का भी हवाला दिया कि 80-90% H-1B आवेदनों में नकली दस्तावेज़ थे। ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा पर कार्रवाई तेज़ किए जाने के बीच आया यह बयान अमेरिकी कामगारों के भविष्य पर चिंताएं बढ़ा रहा है।

220,000 वीज़ा चेन्नई को मिला
डेव ब्रैट ने पॉडकास्ट पर चौंकाने वाला दावा किया कि 71% H-1B वीज़ा भारत से आते हैं, जबकि चीन से केवल 12$। उन्होंने इस असमानता पर सवाल उठाते हुए कहा कि, जबकि वार्षिक राष्ट्रीय सीमा 85,000 वीज़ा है, फिर भी भारत के एक क्षेत्र, मद्रास (चेन्नई) को 220,000 वीज़ा मिले। ब्रैट ने इसे धोखाधड़ी बताया, क्योंकि यह कॉन्ग्रेस द्वारा निर्धारित सीमा से 2.5 गुना अधिक है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट 2024 में लगभग 220,000 H-1B और 140,000 H-4 आश्रित वीज़ा जारी करने की बात करता है, जो तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना को कवर करता है।
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अमेरिकी कामगारों के लिए बताया सीधा खतरा
अर्थशास्त्री ब्रैट ने इस कथित धोखाधड़ी को अमेरिकी कामगारों के भविष्य के लिए सीधा खतरा बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जब इन वीज़ा पर आने वाले लोग खुद को "स्किल्ड" (कुशल) होने का दावा करते हैं, जबकि वे वास्तव में नहीं होते, तो यह फ्रॉड होता है। ब्रैट ने कड़े शब्दों में कहा कि ये "फ्रॉड वीज़ा" आपके परिवार की नौकरी, मॉर्गेज, और घर छीन रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी परिवारों से आग्रह किया कि जब वे H-1B के बारे में सुनें, तो अपने परिवार के भविष्य के बारे में सोचें, क्योंकि यह धोखाधड़ी उनका भविष्य "चुरा" रही है।
इस आधार पर किया गया दावा
राजनयिक महवश सिद्दीकी के पुराने आरोपब्रैट ने अपने आरोपों की पुष्टि के लिए 2005-2007 तक चेन्नई कॉन्सुलेट में कार्यरत भारतीय मूल की अमेरिकी विदेश सेवा अधिकारी महवश सिद्दीकी के दावों का उल्लेख किया। सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि भारत से आने वाले 80-90% H-1B वीज़ा आवेदनों में नकली दस्तावेज़ होते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2006-2007 के बीच 51,000 से अधिक वीज़ा आवेदनों पर फैसला सुनाया था और हैदराबाद के अमीरपेट इलाके को एक फ्रॉड हॉटस्पॉट बताया, जहाँ नकली डिग्री और दस्तावेज़ बेचे जाते थे।
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