भारतीय टेक कंपनियों ने 2024 में 20 प्रतिशत अमेरिकी H1B वीजा हासिल किए, जानिए कौनसी कंपनी रही अव्वल
भारतीय मूल की टेक कंपनियों ने 2024 में अमेरिका द्वारा जारी किए गए कुल H1B वीजा में से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। जिसमें इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सबसे आगे रहीं। यह जानकारी अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आई है।
H1B वीजा वितरण में भारतीय कंपनियों का दबदबा
अप्रैल से सितंबर 2024 की अवधि में अमेरिका ने विभिन्न नियोक्ताओं को कुल 1.3 लाख H1B वीजा जारी किए। जिनमें से 24,766 वीजा भारतीय मूल की कंपनियों को मिले। इंफोसिस ने 8,140 वीजा के साथ सबसे अधिक लाभ उठाया। TCS को 5,274 और HCL अमेरिका को 2,953 वीजा मिले। अमेजन कॉम सर्विसेज LLC 9,265 वीजा के साथ सूची में शीर्ष पर रही।

अन्य भारतीय कंपनियां
कॉग्निजेंट की शुरुआत चेन्नई में हुई और वर्तमान में इसका मुख्यालय न्यू जर्सी में है। इसने 6,321 वीजा प्राप्त किए और यह तीसरे स्थान पर रही। इसी तरह विप्रो ने 1,634 और टेक महिंद्रा ने 1,199 वीजा हासिल किए।
H1B वीजा कार्यक्रम और भारतीय कंपनियां
H1B वीजा कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेष पेशों में विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय आईटी कंपनियां इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL टेक्नोलॉजीज इस कार्यक्रम का लंबे समय से बड़ा लाभ उठाती रही हैं। हालांकि यह कार्यक्रम अब नियामक बदलावों और जनभावनाओं के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है।
एलन मस्क और H1B वीजा पर समर्थन
टेस्ला के सीईओ और पूर्व H1B वीजा धारक एलन मस्क ने विदेशी कर्मचारियों पर तकनीकी उद्योग की निर्भरता का समर्थन किया। 28 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मस्क ने लिखा कि हमें उन सभी का स्वागत करना चाहिए जो कड़ी मेहनत से अमेरिका में योगदान करते हैं। अमेरिका को हमेशा स्वतंत्रता और अवसरों की भूमि बने रहना चाहिए। मस्क के इस बयान को डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला। जिन्होंने अपनी पिछली सरकार में H1B कार्यक्रम पर सख्ती बरती थी। यह दावा करते हुए कि इससे अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम वेतन वाले विदेशी श्रमिक ले लेते हैं।
भारतीय टेक कंपनियों का H1B वीजा कार्यक्रम में प्रमुख हिस्सा यह दर्शाता है कि वे अमेरिकी टेक उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हालांकि भविष्य में इस कार्यक्रम की दिशा इस पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी व्यवसायों की कुशल श्रमिकों की मांग को व्यापक आव्रजन नीति सुधारों के साथ कैसे संतुलित किया जाता है।
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