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तिब्बत ने नये पीएम पेंपा सेरिंग को US ने दी बधाई तो चीन ने तिब्बत में धार्मिंक आयोजनों पर लगाई रोक

तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये पीएम पेंपा सेरिंग का जन्म भारत के कर्नाटक शहर में बेलाकूपी में साल 1967 में हुआ था और उन्होंने स्कूल ऑफ तिबेतन बेवाकूपी से जमा दो तक की पढ़ाई की।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, मई 15: तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग को अमेरिका ने बधाई दी है। पेंपा सेरिंग तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये प्रधानमंत्री बने हैं, जिन्होंने अपने प्रतिद्वंदी केलसंग दोरजे को चुनाव में पराजित किया है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुख्यालय में चुनावी नजीते घोषित किए गये थे जिसमें पेंपा सेरिंग को विजेता घोषित कियाल गया है। पेंपा सेरिंग के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका ने उन्हें बधाई पेश किया है। वहीं, चीन ने इसके साथ ही एक बार फिर से तिब्बत पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। चीन ने तिब्बत में कई धार्मिक आयोजनो पर रोक लगा दी है।

तिब्बत के नये पीएम बने पेंपा सेरिंग

तिब्बत के नये पीएम बने पेंपा सेरिंग

प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने चुनाव में 34 हजार 324 मत हासिल किए थे जबकि उनके प्रतिद्वंदी केसलंग दोरजे को 28 हजार 907 मत प्राप्त हुए। आपको बता दें कि पेंपा सेरिंग 17वें तिब्बती संसद के तीसरे प्रधानमंत्री चुने गये हैं। प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग के साथ 45 सांसदों का भी चुनाव किया गया है। तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग को बधाई देते हुए अमेरिका ने कहा कि 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका तिब्बत के नये प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग को सेन्ट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन का चुनाव जीतने के लिए बधाई देता है। हम उनके साथ आगे काम करेंगे और सीटीए ग्लोबल तिब्बतन समुदाय को सपोर्ट कर पाए, इसमें हम उनकी मदद करेंगे।'

कौन हैं तिब्बत के नये पीएम पेंपा सेरिंग

तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये पीएम पेंपा सेरिंग का जन्म भारत के कर्नाटक शहर में बेलाकूपी में साल 1967 में हुआ था और उन्होंने स्कूल ऑफ तिबेतन बेवाकूपी से जमा दो तक की पढ़ाई की। जिसके बाद वो आगे की पढ़ाई करने के लिए मद्रास आ गये । जहां उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज चेन्नई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर तिब्बत की आजादी के संघर्ष में शामिल हो गये। बचपन से ही पेंपा सेरिंग तिब्बतियन फ्रीडन मूवमेंट से जुड़े रहे हैं और 2001 से 2008 तक नई दिल्ली में तिब्बतियन पार्लियामांट एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर रहे। पेंपा सेरिंग साल 1996, 2001, 2006 और 2011 में सांसद बन चुके हैं।

पेंपा सेरिंग के सामने चुनौतियां

पेंपा सेरिंग के सामने चुनौतियां

पेंपा सेरिंग के सामने बतौर प्रधानमंत्री कई तरह की चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती होगा चीन के साथ रूकी हुई बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाना। वहीं, तिब्बत के मुद्दे को जोर-शोर के साथ यूनाइटेड नेशंस में रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। वहीं, भारत सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी अच्छा संबंध बनाना पेंपा सेरिंग के लिए बेहद जरूरी होगा। हालांकि, पिछले साल अमेरिका ने तिब्बतियन नीति एवं समर्थन अधिनियम 2020 को पास कर चीन को बड़ा झटका देते हुए तिब्बत के मुद्दे को फिर से हवा दी थी लेकिन पेंपा सेरिंग के लिए ये संघर्ष आसान नहीं होने वाला है।

तिब्बत में धार्मिक आयोजनो पर रोक

तिब्बत में धार्मिक आयोजनो पर रोक

तिब्बत को लेकर जैसे ही एक बार फिर से राजनीति सक्रिय हुई, ठीक वैसे ही चीन ने फिर से तिब्बत पर और शिकंजा कर दिया है। ल्हासा में रहने वाले तिब्बतियों के लिए नया निर्देश जारी करते हुए चीन ने कई धार्मकि आयोजन मनाने पर रोक लगा दी है। चीन ये फैसला तब लिया है जब तिब्बत में पवित्र महीना 'सागा दवा' शुरू होने वाला है। फयाल न्यूज चैनल पोर्टल के मुताबिक ल्हासा सिटी बुद्धिस्ट एसोसिएशन के द्वारा ये नोटिफिकेशन जारी किया गया है। आपको बता दें कि बुधवार से तिब्बतियों का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और उससे पहले चीन ने तिब्बतियों की धार्मिक आजादी पर एक और चोट किया है। धार्मिक आयोजनों के इस रोक के पीछे कोरोना वायरस का हवाला दिया गया है।

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